Sunday, November 19, 2017
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इस बार मकर संक्रांति का स्नान पर्व दो दिन है 14 और 15 जनवरी। 2014 के माघ मेले का यह पहला स्नान पर्व है। लाखों लोगों ने हर हर गंगे के उदघोष के साथ  माघ मेले का शुभारंभ किया। स्नान की शुरूआत 14 जनवरी के भोर से ही हो गर्इ थी जो देर शाम तक जारी रही। प्रशासन ने पहले स्नान पर्व पर 40 लाख स्नानार्थियों की उम्मीद जतार्इ थी।

 14 जनवरी को दिन में मेले में भीड़ कम थी। मकर संक्रांति 14 जनवरी शाम पांच बजे के बाद  लग रही थी इसीलिए भीड़ भी शाम से बढ़ने लगी। परंतु अनेक लोग मकर संक्रांति लगने से 16 घंटे पहले से ही मानते हैं। 14 जनवरी को सुबह 6 बजे तक स्नानार्थियों की संख्या एक हजार से भी कम थी।प्रशासन के अनुसार सुबह दस बजे तक संगम सहित 12 घाटों पर दो लाख लोग स्नान कर चुके थे। दोपहर दो बजे के बाद संगम पर भीड़ काफी कम हो गर्इ। प्रशासन ने अपरान्ह तीन बजे घोषणा  की कि साढ़े नौ लाख लोगों ने स्नान कर लिया है।वहीं तीर्थ पुरोहितो और घाटियों के अनुसार पांच लाख से अधिक लोगों ने स्नान नहीं किया। सूर्य का मकर राशि में शाम को प्रवेश करने की वजह से भीड़ दोपहर बाद से ही बढ़ने लगी और देर शाम तक डुबकी लगाने का सिलसिला चलता रहा। बुधवार 15 जनवरी को भी अनेक लोगों ने यहां तक की कुछ साधू संतों , शंकराचार्य ने भी मकर संक्रांति का स्नान किया।


कल दिन में स्नान करने वालों को भीड़ कम होने की वजह से और मौसम साफ रहने के कारण स्नान और पूजा पाठ में आसानी हुर्इ। किले से लेकर गंगा के पशिचमी पटटी तक काफी चौड़ा घाट होने के कारण श्रद्धालुओं को असुविधा नहीं हुर्इ। पानी में खतरे के निशान से पहले बैरिकेडिंग की गर्इ थी। बैरिकेडिंग के पास जल पुलिस के जवान भी थे।


घाटों पर सुरक्षा की जिम्मेदारी आरपीएफ और कमांडो ने संभाली जबकि स्नानार्थियों , श्रद्धालुओं के सहयोग के लिए नागरिक सुरक्षा कोर और जिला अपराध निरोधक समिति के सदस्य थे। पुलिस के आला अफसरों ने मेले की पूरी कमान संभाल रखी थी। परेड में बनाए गए पार्किंग स्थलों में वाहनों को रोक दिया गया। मेले में बड़े वाहनों का प्रवेश तो प्रतिबनिधत था ही यहां तक कि दोपहिया वाहनों के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया। पहली बार ऐसा हुआ कि मीडिया के लोगों के दोपहिया वाहन भी मेले में नहीं जा पाए। कुल मिलाकर सुरक्षा व्यवस्था चौकस थी और  श्रद्धालू  तथा कल्पवासी काफी खुश थे। बिना धक्का मुक्की किए ही उन्हें स्नान करने के लिए घाट मिल गए। घाटों पर लोगों ने आराम से पूजा अर्चना भी की और दान भी दिया। कुछ लोगों ने खिचड़ी का दान भी दिया, उन स्थानों पर खिचड़ी का प्रसाद लेने के लिए लोग कतार में खड़े दिखे। छुटटी का दिन होने के कारण शहर के लोग भी मेले में घूमने गए। शाम चार बजे के बाद मेला क्षेत्र में भीड़ बढ़ने लगी जिसे देखते हुए ति्रवेणी रोड पर वाहनों का प्रवेश रोक दिया गया।

14 जनवरी को मौसम साफ रहने के कारण स्नानार्थियों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। किस्मत ने प्रशासन का साथ दिया और प्रशासन की कमियां लोगों को नहीं दिखी। परंतु आज 15 जनवरी को  मौसम प्रशासन पर इतना मेहरबान नहीं रहा।

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