Wednesday, January 17, 2018
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माघ मकर रवि गति होर्इ, तीरथपतहिं आवै सब कोर्इ

तीर्थराज प्रयाग की महिमा का बखान करते हुए गोस्वामी तुलसीदास जी की यह पंकितयां कान्वैन्ट स्कूल में पढ़ने वाली प्रेप क्लास की छात्रा छ: वर्षीय कृति के मुख से बरबस ही निकलती हैं।

गौरतलब है कि बीते महाकुम्भ के दौरान ज्योतिष-वास्तु के रहस्य, दोहे और संस्कृत के कठिन श्लोक कृति की जुबान से सुनकर देश-विदेश के श्रद्धालु चकित रह गए। इस बार कुम्भ की तरह माघ में भी तुलसीदास जी की पंकितयों के माध्यम से नन्ही कृति राम नाम सेवा संस्थान तथा ग्रह नक्षत्रम ज्योतिष शोध संस्थान के संयुक्त तत्तवाधान में ज्योतिष के गूण संदेश देते हुए प्रयागराज में सबका स्वागत करेगी। माघ मास में जब सूर्य मकर राशि में आता है, तो तीर्थराज प्रयाग सबको बुलाता है, ऐसा कृति के वाणी से लोगों को सुनने को मिलता है। प्रेप में पढ़ने वाली कान्वैन्ट स्कूल की छात्रा कृति ने जब अंतरास्ट्रीय ज्योतिष महाकुम्भ के मंच से बारह राशियों और नौ ग्रहों को ज्योतिष का आधार बताया तो पूरा कुम्भ ज्योतिष नगर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। छ: वर्ष की बालिका की प्रतिभा देखकर अंतरास्ट्रीय ज्योतिष महाकुम्भ के मंच पर उपसिथत देश-विदेश से आए मर्मज्ञ विद्वानों द्वारा अंग वस्त्रम पहनाकर सम्मानित कर बालिका को शुभाशीष प्रदान कर देश की नन्ही ज्योतिर्विद घोषित किया।

•             ज्योतिष-वास्तु की मर्मज्ञ है छ: वर्षीय बालिका

•             छोटी उम्र में कुण्डली देखकर बताती है ग्रहदशा

•             विश्व के विशालतम अध्यातिमक मेले में सम्मानित हुर्इ बालिका

•             कर्इ सामाजिक आयोजनों में ज्योतिष विधार्थियों एवं जिज्ञासुओं के समक्ष काशी एवं प्रयाग के विद्वानों द्वारा ली जा चुकी है कृति की परीक्षा

ज्योतिष और वास्तु के मर्म से अवगत कराती है नन्ही कृति - कृति ज्योतिष और वास्तु को हमारे जीवन का मुख्य आधार समझाते हुए बताती है कि ज्योतिष शक्ति अनुसार कब क्या करना है अच्छे समय में कड़ी मेहनत, अशु समय में सावधानी वास्तुशक्ति अनुसार पंचतत्व अगिन, वायु, जल, पृथ्वी, आकाश सी को अपने अनुकूल बनाना यही है सुखी जीवन का आधार, क्या आप सुखी हैं ?

रत्न और रूद्राक्ष की भी जानकारी है कृति के पास - महाकुम्भ के दौरान एक अन्तर्राष्ट्रीय मीडियाकर्मी ने अपनी जन्मपत्री कृति के सामने प्रस्तुत की तो नन्ही बालिका बोली, आपकी वृशिचक राशि है, चन्द्रमा नीचस्थ है, शिवलिंग पर कच्चा दूध नित्य चढ़ाऐं, इसी प्रकार छ: वर्षीय बालिका कृति सभी की कुण्डली, ग्रहदशा देखकर भविष्य बताती है। नन्ही बच्ची ने जन्मपत्री देखकर आगे विष्यवाणी की, कि दस वर्ष की चन्द्रमा की महादशा अब डेढ़ वर्ष ही शेष बची है, फिर उच्च के मंगल का राजयोग आपके जीवन में आने वाला है। बारह राशियां मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृशिचक, धनु, मकर, कुम्, मीन और नौ ग्रह सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु ज्योतिष का आधार हैं। कृति को रत्न एवं रूद्राक्ष की भी जानकारी है, वह बताती है सूर्य के लिए माणिक्य, चन्द्रमा के लिए मोती, मंगल के लिए मूंगा, बुध के लिए पन्ना, गुरू के लिए पुखराज, शुक्र के लिए हीरा, शनि के लिए नीलम, राहु के लिए गोमेद और केतु के लिए लहसुनिया पहनाया जाता है। कृति की जुबान में तुतलाहट है, लेकिन वास्तुशास्त्र एवं ज्योतिषशास्त्र के प्रश्नों का ऐसे जवाब देती है जैसे ज्योतिष का कोर्इ बहुत बड़ा विद्वान जिज्ञासा शांत कर रहा हो। छ: वर्ष की बालिका की यह प्रतिभा देखकर अन्तर्राष्ट्रीय ज्योतिष महाकुम्भ में अंग वस्त्रम पहनाकर सम्मानित किया गया, साथ ही बालिका को शुभाशीष प्रदान किया। इससे पूर्व कृति ने कर्इ ज्योतिष सम्मेलनों में अनेक लोगों की कुण्डली देखकर उनका भविष्य बतलाया है। कृति ने यह भी बताया कि जब माघ मास में मकर राशि में सूर्य का संचरण होता है, तब देश-विदेश से श्रद्धालु तीर्थराज प्रयाग में दर्शन, पूजन, स्नान, दान करने आते हैं।

भगवान राम की स्तुति एवं किलष्ट शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करती है कृति -

राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे सहóनाम तत्तुल्यं राम नाम वरानने

भगवान राम की महिमा इस एक पंकित में कृति सभी को सुनाकर आश्चर्यचकित कर देती है।

जटाटवी गलज्जल प्रवाहपावि तस्थले गलेवलम्ब्य लमिबतां ुजंगतुंग मालिकां

डमडमडमडमडम निनादवड डमरवयं चकारचंड तांडवं तनो तुन: शिव शिवम

रावण रचित शुद्ध संस्कृत के कठिन श्लोकों द्वारा निर्मित शिव तांडव स्तोत्र की पंक्तिया जिन्हें बड़े-बड़े विद्वान ी पूरा कंठस्थ नहीं कर पाते।

लाल किताब के उर्दू के फरमान कण्ठस्थ हैं कृति को - ज्योतिष की प्रसिद्ध लाल किताब के कठिन उर्दू के फरमान भी तर्क सहित कृति आमजनमानस तक पहुंचाती है।

बीमारी का बगैर दवा इलाज है मगर मौत का इलाज नहीं

ज्योतिष दुनियाबी हिसाब-किताब है कोर्इ दावे खुदार्इ नहीं

अरबी फारसी के फरमान और ब्रहाण्ड की संरचना की सटीक जानकारी है कृति के पास - खानखानाविरिचतम खेटकौतुकम के किलष्ठ फारसी के श्लोक नन्ही कृति की जुबान से बर्बस ही निकलता है।

यदा मुश्तरी कर्कटे व कमाने यदा चश्मकोरा जमी व आसमाने तदा ज्योतिषी क्या गुने करेगा हुआ बालक बादशाही करेगा

बालिका कृति पिंड और ब्रह्राण्ड की संरचना की जानकारी लोगों को बखूबी देती है।

यत पिण्डे तत ब्रह्राण्डे तत ब्रह्राण्डे यत पिण्डे, जो पिण्ड में है, वही ब्रह्राण्ड में है, जो ब्रह्राण्ड में है, वही मानव पिण्ड में है

कृति के मां गुंजन बताती हैं कि उसे बचपन से ही ज्योतिष, वास्तु, अध्यात्म की शिक्षा स्कूली शिक्षा के साथ प्रदान की जाती है, अपने पिता ज्योतिषाचार्य आशुतोष वाष्र्णेय की देख-रेख में कृति की तरह अन्य बच्चे इसी प्रकार ज्योतिष, वास्तु, अध्यात्म को पुन: जागृत करने के लिए प्राचीन ग्रंथों का अध्ययन कर रहे हैं।

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