Sunday, November 19, 2017
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प्रयाग में स्नान के बाद हनुमान जी के दर्शन और राम नाम लेखन एवं परिक्रमा का अदभुत महत्व

राम नाम की परिक्रमा करते समय श्रद्धालु करते हैं मानस मंत्रों का उच्चारण

                माघ मेला, सैक्टर 1, अक्षयवट मार्ग सिथत राम नाम बैंक में महाकुम्भ में एकत्र राम नाम लिखे प्रपत्रों से बना परिक्रमा पथ पुण्य कमाने का स्त्रोत बना हुआ है। श्रद्धालु त्रिवेणी संगम स्नान कर राम नाम लिखकर पुण्य अर्जित कर रहे हैं, मकर संक्रांति से लेकर अब तक हजारों लोग इस परिक्रमा पथ पर भगवान राम के नाम लिखे प्रपत्रों की परिक्रमा कर रहे हैं और पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं, वे लोग इसी क्षेत्र में भगवान राम का नाम लाल कलम से लिखते हैं, जमा करते हैं और परिक्रमा भी करते हैं ताकि वे अपने लोक और परलोक दोनों को संवार सकें। तम्बुओं और बांस-बलिलयों से बने राम नाम बैंक का शिविर संगम टावर के नजदीक अक्षयवट मार्ग पर होने के कारण काफी अधिक संख्या में श्रद्धालु नित्य राम नाम लिखकर परिक्रमा कर रहे हैं। संस्थान की अध्यक्ष गुंजन वाष्र्णेय बताती हैं कि महाकुम्भ में देश-विदेश के श्रद्धालुओं द्वारा संगम की रेती पर लिखे राम नाम प्रपत्रों को संजोकर परिक्रमा पथ बनाया गया है ताकि परिक्रमा करने वाले सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण हो सकें। प्रसाद के रूप में यहां से भक्त नि:शुल्क राम नाम लेखन पुसितका एवं लाल कलम गंगाजल के साथ लेकर जाते हैं। ग्रह नक्षत्रम ज्योतिष शोध संस्थान के निदेशक ज्योतिषाचार्य आशुतोष वाष्र्णेय के अनुसार माघ मेले में अब तक राम नाम खाताधारकों की संख्या सैकड़ों में पहुंच चुकी है और उम्मीद है कि माघी पूर्णिमा तक हजारों में पहुंच जाएगी। प्रयाग में स्नान के बाद हनुमान जी के दर्शन और राम नाम लेखन का अदभुत महत्व है।


परिक्रमा का महत्व - राम नाम की परिक्रमा करने का सर्वाधिक महत्व शास्त्रों में वर्णित है। शास्त्र और संत कहते हैं कि राम नाम की परिक्रमा ब्रह्रााण्ड की परिक्रमा है और ब्रह्राण्ड में साढ़े तीन करोड़ तीर्थ है। ूलोक, आकाश लोक, पाताल लोक में एक-एक करोड़ और वायुमण्डल में पचास लाख तीर्थ हैं। इतने तीथो± की परिक्रमा सौ जन्म में ी सम्व नहीं है, अत: गणेश जी ने समस्त तीथो± की परिक्रमा के पुण्य ला का सरल मार्ग राम नाम की परिक्रमा करके हमें दिखाया है। मान्यता है कि राम नाम अंकित प्रपत्रों की परिक्रमा से ब्रह्राण, विष्णु और महेश की परिक्रमा संपन्न हो जाती है। राम नाम की परिक्रमा करते समय मानस मंत्रों का उच्चारण विशेष लाभदायक रहता है। लिखित राम महामंत्रो की परिक्रमा का पुण्य ला अकथनीय है जो मुख से वर्णन नहीं किया जा सकता है।

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