Wednesday, January 17, 2018
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 shankaracharya


इलाहाबाद। एक साथ चारों पीठों के शंकराचार्यों को मेला क्षेत्र में न बसाए जाने पर नाराज शंकराचार्य के शिष्यों ने कुंभ मेला छोड़ने का फैसला कर लिया। शंकराचार्य स्वरूपानंद के प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भी मंगलवार को मेला छोड़ दिया। उनके साथ ही शंकराचार्य स्वामी भारती तीर्थ व शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद के प्रतिनिधि भी मेला क्षेत्र से निकल गए। यह सभी अपने शिविर गिराकर समर्थकों व शिष्यों के साथ चारों पीठों के शंकराचार्यों की तस्वीर सिर पर रखकर निकले।


मेला प्रशासन ने इन्हें मनाने का प्रयास किया तथा वार्ता कई चक्रों में चली परंतु वह बेनतीजा रही। यह घटना रात करीब नौ बजे की है। यह जानकारी प्राप्त हुई है कि शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद ने भी काशी में सभी मान्य शंकराचार्यों द्वारा प्रयाग के कुंभ के बहिष्कार की घोषणा भी कर दी। सेक्टर दस में मंगलवार सुबह से ही द्वारिका, ज्योतिषपीठ, पुरी व श्रृंगेरीपीठ के शंकराचार्यों के प्रतिनिधि धरने पर बैठे थे। सभी लोग दोपहर दो बजे मंडलायुक्त देवेश चतुर्वेदी का इंतजार कर रहे थे। शाम लगभग चार बजे मंडलायुक्त मेला अधिकारी मणि प्रसाद के साथ धरना स्थल पर पहुंचे तथा वार्ता कर के समस्या का समाधान करना चाहा। लेकिन बात न बन पाई।

इस पूरे प्रकरण पर मंडलायुक्त का कहना है कि उन्होंने शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद के शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को मनाने का काफी प्रयास किया वे उन्हें सेक्टर सात में जमीन देने के लिए भी तैयार थे पर वह न माने। अविमुक्तेश्वरानंद जिस चतुष्पीठ के लिए जमीन की मांग कर रहे हैं वह केन्द्र और राज्य सरकार के संविधान में कहीं नहीं है। इसलिए उसे पूरा करने वह अक्षम हैं। वहीं दूसरी तरफ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि उन्होंने मेला प्रशासन को पूरा समय दिया तथा हर स्तर पर वार्ता की इसके बावजूद भी परिणाम निराशाजनक रहा। जो वादे किए गए थे वह पूरे नहीं किए गए इससे वह आहत हैं। फिलहाल अभी एक दौर की वार्ता बाकी है और उससे भी कोई सार्थक परिणाम नहीं निकल पाया तो फिर शंकराचार्यों से इस विषय पर बातचीत की जाएगी।

 

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