Friday, November 17, 2017
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ganga-danger
इलाहाबाद। सोमवार को मकर संक्राति के मौके पर कुंभ के प्रथम शाही स्नान पर डुबकी लगाने करोड़ों संगम नगरी आ रहे हैं परंतु गंगा में पानी की सिथति दयनीय है। पर्याप्त पानी न होने से जगह-जगह टापू उभर आए हैं। ऐसी हालत में स्नान कैसे किया जाएगा यह एक यक्ष प्रश्न है।


15 दिन पहले नरौरा से छोड़ा गया ढाई हजार क्यूसेक पानी का अता-पता नहीं है। गंगा में पानी का लेबल पहले से महज 15 सेमी ही बढ़ पाया है। अभी भी पानी स्वच्छ नहीं होने के कारण संतों में रोष है। 27 दिसंबर को नरौरा से पानी छोड़ा गया जिसको कि 15 दिनों में प्रयाग पहुंच जाना था परंतु जलस्तर अभी केवल 15 सेमी ही बढ़ पाया है।
विभाग के लोगों का यह दावा है कि पानी के कारण कोई परेशानी नहीं होगी। सिचाईं एवं बाढ़ प्रखंड के अधीक्षण अभियंता ए के श्रीवास्तव के अनुसार पानी की कोई कमी नहीं है। मकर संक्राति के एक दिन पहले 13 जनवरी को गंगा में 400 क्यूसेक पानी और छोड़ा जाएगा। शासन स्तर पर काफी कोशिश के बाद भी गंगा के जल में बीओडी स्तर 5 से नीचे नहीं आ पाया है। यह एक सोचनीय विषय है क्योंकि गंगा में स्नान करने लायक जल तभी माना जाता है जब उसका बीओडी लेबल 3 से कम हो। संबंधित विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गंगा के जल में बीओडी स्तर पांच से नीचे आ गया है और गंगा स्नान के योग्य है।

 

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