Sunday, November 19, 2017
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naga sringaar

इलाहाबाद। आमतौर पर महिलाओं को अधिक श्रृंगार करने के लिए जाना जाता है लेकिन सच्चाई यह है कि नागा साधु महिलाओं से श्रृंगार के मामले में कहीं भी कम नहीं बैठते हैं। महाकुंभ में पहले शाही स्नान के दौरान उनका श्रृंगार महिलाओं को मात देने वाला दिखा। पहले शाही स्नान के दौरान विभिन्न अखाड़े के नागा साधुओं के विभिन्न रूप देखने को मिले। जूना अखाड़े के नागा संत श्रवण ने बताया कि हम तो श्रृंगार महिलाओं से ज्यादा यानि सोलह के बजाए सत्रह श्रृंगार करते हैं। शाही स्नान से पहले श्रृंगार की तैयारी एक रात पहले ही हो जाती है। हम लोग पूरी तरह से तैयार होकर ईष्ट देव की अराधना करते हैं और स्नान के लिए जाते हैं।


नागाओं के सत्रह श्रृंगार में लंगोट, भभूत, चंदन, पैरों तें कड़ा, अंगूठी, पंचकेश, कमर में फूलों की माला, माथे पर रोली, कुंडल, चंदन, हाथ में चिमटा, कमंडल, जटाएं काजल, हाथ में कड़ा, बदन में भभूत शामिल हैं। नागा संत बताते हैं कि लोग नित्य कि्रया से शुद्ध होकर गंगा में स्नान करते हैं लेकिन नागा संन्यासी शुद्धीकरण के बाद ही शाहीस्नान के लिए निकलते हैं। महाकुंभ में पहुंचे नागा संन्यासियों की एक खासियत यह भी है कि इनका मन बच्चों के समान निर्मल होता है। यह अपने अखाड़ों में हमेशा धमा चौकड़ी मचाते रहते हैं। सबसे ज्यादा महानिर्वाणी, जूना और निरंजनी अखाड़ों में सबसे अधिक नागा साधुओं की संख्या है।

 

 

 

 

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