Friday, November 17, 2017
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videshi ganga
दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक मेला है कुंभ मेला। इस बार महा कुंभ 2013 का आयोजन तीर्थ राज प्रयाग में हुआ है। कुंभ का पहला शाही स्नान 14 जनवरी मकर संक्रांति के दिन कुशलता पूर्वक सम्पन्न हो गया है । लाखों लोगों ने इस अवसर पर ति्रवेणी संगम में डुबकी लगाकर पुण्य अर्जन किया। गंगा , यमुना और अदृश्य नदी सरस्वती के मिलन से ति्रवेणी संगम बना है। कुंभ मेले में कुछ श्रद्धालु कल्पवास करते हैं और कुछ स्नान करके घर लौट जाते हैं। हम गंगा स्नान से पुण्य कमा रहे हैं लेकिन हर्जाना गंगा नदी को भरना पड़ रहा है।

हम सब कुंभ मेले में स्नान करते हैं , घूमते हैं , वहां पिकनिक भी मनाते हैं और मेले की चर्चा करते हुए घर लौट आते हैं। बहुत हुआ तो गंगा नदी को देखकर कहते हैं कितनी गंदगी है , सरकार कुछ सोचती ही नहीं। हम यह नहीं सोचते कि गंगा को हम भी गंदा कर रहे हैं। हम से मेरा मतलब भारतीयों से है। भारतीयों की आस्था गंगा नदी से जुड़ी है। हम उन्हें मां कहते हैं। जितना हो सके हम भी उसे साफ रखने की कोशिश कर सकते हैं। लेकिन हम लोग बातें अधिक करते हैं काम कम। गंगा प्रदूषण को लेकर भारत में बहुत चर्चाएं ,गोषिठयां ,विरोध प्रदर्शन होते हैं। परियोजनाएं भी बनती हैं लेकिन कुछ खास नतीजा नहीं निकलता।

प्रयाग के कुंभ मेले में देश विदेश से श्रद्धालु आए हैं जिनमें विदेशियों की भी अच्छी -खासी संख्या है जिन्हे विदेशी सैलानी कहा जा रहा है। उनमें से अधिकांश भकित और आधात्म में डूबे हैं। परंतु कुछ ने इससे अलग गंगा सफाई को भी अपना मकसद बना लिया है।

जी हां कुंभ मेले में स्वामी चिदानंद द्वारा संचालित हरिद्वार के परमार्थ आश्रम के कैम्प में ठहरने वाले विदेशियों से गंगा की यह हालत देखी नहीं गई। हम भले ही उन्हे विदेशी कहें लेकिन गंगा के प्रति उनकी आस्था अनुकरणीय है।

विदेशी भक्त भी बहुत हैं लेकिन परमार्थ आश्रम के कैम्प में ठहरने वाले विदेशी गंगा भक्तों ने कुंभ मेले में आने के बाद केवल आधात्म में ही डूबे नहीं हैं बलिक गंगा की सफाई को अपना मकसद बनाया । मोक्षदायिनी व जीवनदायिनी गंगा को प्रदूषण मुक्त करने की कोशिश कर रहे यह विदेशी अन्य भक्तों द्वारा गंगा में फेंके जा रहे कचरे को गंगा से निकाल रहे हैं। गंगा घाट की सफाई कर रहे हैं , कूड़ा बिन रहे हैं ,गंदगी को साफ कर रहे हैं।

यह गंगा भक्त गंगा की हालत से बहुत दुखी हैं। कुंभ मेले में जहां यह रह रहे हैं वहां हर रोज तीन से चार घंटे तक सफाई अभियान चला रहे हैं। गंगा में बहने वाले कूड़े को यह लोग बिनते हैं, घाटों की सफाई करते हैं और कुंभ मेले में आने वाले अन्य श्रद्धालुओं को गंगा और उसके घाटों को साफ रखने का संकल्प दिला रहे हैं।

इस अभियान में कुंभ मेले में आने वाले अनेक भारतीय श्रद्धालु भी हाथ बटा रहे हैं। भारतीयों के भी इस अभियान में जुड़ने से एक उम्मीद की किरण नजर आ रही है। लेकिन होना चाहिए था उलटा हमारी देखा देखी विदशी भी गंगा सफाई अभियान में भारतीयों के साथ जुड़ते तो हम गर्व महसूस कर सकते।

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