Sunday, November 19, 2017
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lady sadhu
जीवन के हर क्षेत्र में सफलतापूर्वक अपनी पहचान बनाने वाली महिलाएं अब आधात्म की दुनिया में भी अपनी पहचान बनाने में कामयाब हुई हैं। अखाड़ों में महिलाओं की संख्या बढ़ रही है। अखाड़ों मे महिला महामंडलेश्वरों और महिला संतों की संख्या लगभग सौ के करीब पहुंच गई है। जब महिला संतों की संख्या बढ़ेगी तो उनके भक्तों की संख्या तो बढ़ेगी ही।


महिला संतो का सपना था अपना अलग अखाड़ा। इस महा कुंभ में वह पूरा हो गया। जूना अखाड़े ने माई बाड़ा को अखाड़े का दर्जा दिया। उसे अब दशनामी सन्यासिनी अखाड़े के नाम से जाना जाता है। श्री महंत दिव्यागिरी के अथक प्रयासों से माई बाड़ा को अखाड़े का दर्जा मिला। महिला सन्यासिनियों को अपनी अलग धर्म ध्वजा मिली ,अपने नियम कानून बनाने का अधिकार मिला। महिला संत एक दशक से माई बाड़ा को अखाड़े का दर्जा दिलाने की कोशिश कर रही थीं। दसनामी सन्यासिनी अखाड़ा की अध्यक्ष दिव्यागिरी के अनुसार यह उनकी पहली उपलबिध है और आने वाले समय में अखाड़े का और विकास होगा। इस अखाड़े की शकित का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है- यहां महिला सन्यासिनियों की संख्या पांच हजार से अधिक हो गयी है।

महिला संत वेदगिरी पंजाब के लुधियाना में आश्रम चलाती हैं। पिछले चार दशक से वह धर्म और समाज की सेवा कर रही हैं। कई स्कूल और अस्पताल भी उनके आश्रम द्वारा संचालित होता है। इस कुंभ में पहली बार किसी महिला को महामंडलेश्वर बनाया गया। महानिर्वाणी ने महिला संत वेदगिरी को महामंडलेश्वर की उपाधि से सम्मानित किया। अपना समर्थन दर्शाने के लिए विभिन्न अखाड़ों ने महिला संत वेदगिरी को चादर चढ़ाया। 

निरंजनी अखाड़ा साध्वी निर्भयानंद पुरी को महामंडलेश्वर की उपाधि से विभूषित करने जा रहा है। श्री अदवैदस्वरूप सन्यास आश्रम बिहार के रोहताश के एक इलाका रायपुर भोरे में है। इसकी अध्यक्ष हैं साध्वी निर्भयानंद पुरी। लगभग 38 सालों से वह अपने गुरू महाराज परमहंस ज्ञानानंद जी के बताए आदशोर्ं पर चल रही हैं। साध्वी निर्भयानंद पुरी का आश्रम बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश , दिल्ली एवं अन्य कई प्रदेशों में है जहां वह समाज सेवा भी करती है। 23 जनवरी को उनका पटटाभिषेक होगा। उनके भक्तों की संख्या हजारों में है। 

अनेक बड़े धार्मिक संगठन और आश्रमों की प्रमुख महिला संत ही हैं। प्रजापिता ब्रहमकुमारी आश्रम की संचालिका से लेकर कार्यकर्ता तक महिलाएं ही हैं। इसका मुख्यालय राजस्थान के माउंट आबू में है और देश के अनेक भागों में इसकी शाखाएं हैं लेकिन हर स्थान पर महिलाएं ही इसकी प्रमुख है। नारायणी आश्रम का प्रबंध तंत्र भी महिलाएं ही संभालती हैं। अपर्णा भारती को जगतगुरू की उपाधि मिल चुकी है। 
इस क्षेत्र में महिलाओं की संख्या अचानक नहीं बढ़ी है। इसकी तैयारी 2001 कुंभ मेला प्रयाग से ही प्रारंभ हो गई थी।

 

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