Sunday, November 19, 2017
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kumbh-ki-jhalkiya

कुंभ नगरी में केवल धर्म और आस्था ही नहीं जीवन का हर रंग देखने को मिलता है। एक ओर तप करते साधू हैं तो दूसरी ओर आधूनिक वेष भूषा में मेले का आनंद लेते लोग भी मिलेंगे। देश के कोने कोने से दुकानदार मेले में अपना उत्पाद बेचने आ रहे हैं। कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करने आ रहे हैं। कड़ी सुरक्षा के बीच में भी चोर उच्चके अपना धंधा मेले में बेधड़क चला रहे हैं। विश्व के कोने कोने से धर्म गुरू , विद्वान , शोधार्थी आ रहे हैं। राजनीतिक ,फिल्म स्टार, माडल , देश विदेश की मीडिया सभी एक अनजाने आकर्षन से बंधे चले आ रहे हैं जैसे फूल पर तितली मंडराती है।


दलाई लामा करेंगे जनता से सीधा संवाद -

dalai lama
बौद्ध धर्म गुरू दलाई लामा विश्व हिंदू परिषद के संत सम्मेलन में शामिल होंगे। कुंभ मेले में विश्व हिंदू परिषद द्वारा आयोजित इस संत सम्मेलन में अन्य कई बड़े बौद्ध धर्म गुरूओं का भी आगमन होगा। दलाई लामा इस बार जनता से सीधा संवाद करेंगे। तीन फरवरी को दलाई लामा यहां पहुंचेंगे। चार फरवरी को वह दिन में 11 से 1 बजे तक जनता से सीधा संवाद करेंगे। यह कुंभ में पहला मौका है जब जनता को यह सौभाग्य प्राप्त होगा। वह संत सम्मेलन में मुख्यत: भारतीय मत पंथ और मूल्य आधारित शिक्षा व चरित्र से संबंधित विषय पर संबोधन करेंगे।

गोल्ड बाबा का जलवा -

gold baba
कुभ में आपने कई तरह के बाबा देखे होंगे अब गोल्ड बाबा को देखिये।सही सोचा आपने यह हमेशा गोल्ड से लदे होते हैं। दिल्ली के गांधी नगर से आए सुधीर कुमार उर्फ बिटटू जी महाराज उर्फ गोल्ड बाबा सोने के आभूषण और हीरे की घड़ी पहने कुछ अलग ही नजर आते हैं। वह पंच दशनाम अखाड़ा से जुड़े हरिहर आश्रम में ठहरे हैं और स्वयं को मछन्दर पुरी जी महाराज एवं महंत भरत पुरी जी का शिष्य बताते हैं।उनके सभी हारों में देवी देवताओं का लाकेट है। उनके पास श्री यंत्र लाकेट युक्त हार है जो बाबा रामदेव ने उन्हें भेंट किया है। गोल्ड बाबा कहते हैं कि वह सन्यासी नहीं बलिक सन्यासियों के शिष्य हैं। उनके हीरे जडि़त घड़ी की कीमत 27 लाख रूपये है। जूता भी बहुत महंगा पहनते हैं , कपड़े भी ब्रांडेड और विलायती हैं ,महंगे गाडि़यों का काफिला है। दिल्ली में उनका रेडीमेड कपड़ों का कारोबार है। इन्हे शौकीन बाबा कहा जाए तो गलत नहीं होगा।

इलाहाबादी भाए चीनियो को -
कुंभ मेले में एक चाइनीज दल घूम रहा है। संगम पर उन्हे भारत की छवि नजर आई। उनका कहना है कि गंगा ,संगम और इलाहाबाद की खूबसूरती से ही पूरे देश की खूबसूरती का अंदाजा लगाया जा सकता है। पर्यटन विभाग के प्रदर्शनी में लगे चित्र उन्हे बहुत पसंद आए। इलाहाबाद के लोगों को भी उन्होने भला और मददगार कहा। पर्यटन विभाग ने उन्हे कुंभ के आधातिमक महत्व के बारे में भी बताया।

आ गई हावर्ड की टीम -

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अमरीका के हावर्ड विश्वविधालय की तीस छात्रों की टीम कल कुंभ नगरी पहुंच गई है। टीम जूना अखाड़ा गई। वहां स्वामीजी ने सबसे पहले उन्हे कुंभ को महसूस करने की सलाह दी। टीम गंगा एक्शन परिवार के स्वामी चिदानंद मुनि से मिली और उनके साथ संगम तट की साफ सफाई में भी भाग लिया। टीम की प्रोफेसर डायना के अनुसार देश की परंपरा , संस्कृति ,पर्यावरण ,शौचालयों की व्यवस्था आदि उनके शोध का विषय होंगे।यह टीम करीब एक सप्ताह तक यहां रहकर शोध कार्य करेगी।

देखिए महापगड़ी का कमाल -

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देखें पंजाब के रोपड़ जिले के मस्ताना बाबा को। 2000 मीटर कपड़े से बनी 80 किलो वजन की पगड़ी पहनकर बाबा कुंभ क्षेत्र में घुमते हैं। पीले रंग की इतनी बड़ी पगड़ी का राज पूछने पर वह कहते हैं कि बचपन से ही वह गुरू गोविंद सिंह की सेना में भर्ती हो गये थे। उनका आदेश था कि जुर्म और आतंकवाद के खिलाफ लड़ना होगा और हिंदू धर्म की रक्षा करनी होगी। उन्हे आदेश मिला कि वह जितनी बड़ी हो सके पगड़ी पहनें। बाबा के लिए पगड़ी बांधना भी आसान नहीं है। वह दिन में दो बार नहाते हैं और दो बार पगड़ी बांधते हैं। एक बार पगड़ी बांधने में उन्हें एक घंटे से ज्यादा समय लगता है।

 

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