Thursday, November 23, 2017
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 saksham-n-samarth


तीर्थों का तीर्थ प्रयागराज में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर चल रहे महाकुम्भ में पांच वर्षीय समर्थ और दस वर्षीय सक्षम की राम भकित लोगों को चकित कर रही है। कान्वैन्ट स्कूल में पढ़ने वाले ये बच्चे प्रयाग महिमा के साथ संस्कृत के श्लोक और राम कथा, राम महिमा का बखान कर लोगों का दिल जीत रहे हैं। इतना ही नहीं खेलने-कूदने की इस उम्र में दोनों भाइयों ने मिलाकर कई लाख राम नाम अंकित कर सच्ची राम भकित की मिसाल कायम की है। उनकी इस लगन से प्रभावित होकर स्वयंसेवी संस्थानों ने बच्चों को पौष पूर्णिमा पर सम्मानित करने की घोषण की है।

ये बच्चे अन्य बच्चों की तरह सुबह स्कूल जाते हैं, दोपहर को कोचिंग और फिर शाम को कुम्भ नगरी, सैक्टर 6 मे राम भकित में लीन दिखाई पड़ते हैं। सक्षम अग्रवाल कुम्भ महिमा का वर्णन करते हुए लोगों को बताता है कि अमृतरूपी कुम्भ स्नान का फल उसे ही मिलता है जिसमें सदगुण रूपी देवत्व होता है। सम्पूर्ण संसार इस बात से अवगत है कि समुद्र मंथन के समय 14 दुर्लभ रत्न उत्पन्न (प्रकट) हुए। उनमें से एक अमृत कलश था। जब देवराज इन्द्र के पुत्र जयंत अमृत कलश लेकर उड़ चले तो दैत्यों के गुरू शुक्राचार्य ने दैत्यों को जयंत का पीछा कर अमृत कलश छीनने को कहा। देवों और असुरों में बारह दिन तक संघर्ष चला। देवताओं का एक दिन मनुष्यों के एक वर्ष के बराबर होता है, अत: हर बारह वर्ष मे एक बार महाकुम्भ होता है। देवताओं और असुरों की खींचातानी की वजह से अमृत की बूंदे चार स्थानों पर गिरी वह है प्रयाग, हरिद्वार, नासिक, उज्जैन। इसी कारण इन चारों स्थानों पर महाकुम्भ पड़ता है। इसी के साथ सक्षम बताता है कि विष्णु पुराण में कुम्भ स्नान के महत्व को यहां तक कहा गया है कि हजार बार अश्वमेघ यज्ञ करने से, सौ बार बाजपेय यज्ञ करने से, एक हजार बार पृथ्वी की परिक्रमा करने से जो पुण्य प्राप्त होता है वह मात्र एक बार कुम्भ स्नान करने से प्राप्त होता है। उसकी वाणी से निकलता है कि कुम्भ का फल उसे ही प्राप्त होता है जो सदाचारी होता है जिसमें देवत्व के गुण होते हैं, जो माता-पिता को ही ईश्वर मानता है, जो सदा दूसरों की मदद करता है, दयालु होता है, पशु-पक्षी सभी से स्नेह करता है, जो ईश्वर की आराधना करता है, राम-राम लिखता है। जो राम-राम लिखता है तो उसे हनुमान जी की कृपा अपने आप मिल जाती है, जिसे हनुमान कृपा मिलती है, उसे शनि कृपा भी प्राप्त हो जाती है, अत: राम ही इस संसार के सार हैं।

नन्हा समर्थ जहां कैसियो पर राम नाम की महिमा की धुन निकालता है वहीं राम गीत गाकर लोगों को आकर्षित करता है,

राम नाम के धन में है शकित अपार, ये तो एक कुम्भ कलश है जो देता पुण्य अपार।
राम राम वो बाण है, जो करता दुश्मनों का नाश, ये तो एक नाव है, जो कराता भवसागर पार।
राम राम एक बूटी है, जो भक्तों की शकित हे, ये तो एक संजीवनी है, जो देती आरोग्यता अपार।
राम राम एक मशाल है जिसको हमें जलाना है, ये तो अमृतवाणी है, जिसे जन-जन पहुंचाना है।
जग में सुंदर है दो नाम चाहे कृष्ण कहो या राम बोलो राम राम राम, बोलो श्याम, श्याम, श्याम

 

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