Friday, November 17, 2017
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kumbh-ki-jhalkiya
पता नहीं प्रयाग की धरती में क्या है। इस साल तो महा कुंभ है इसलिए पूरी दुनिया से लोग आ रहे हैं। लेकिन प्रयाग में तो हर साल माघ मेले में और कुंभ के छह: साल बाद लगने वाले अर्धकुंभ में भी लोग आते रहते हैं । साल दर साल इनकी संख्या बढ़ती जा रही है। ज्यों ज्यों मनुष्य की समस्याएं बढ़ रही है त्यों त्यों मनुष्य आस्था को अपने जीने का सहारा बना रहे हैं। कहते हैं कि कल्पवास करने से समस्या का अंत हो जाता है और लोग कल्पवास करने के लिए प्रयाग में हर साल आते हैं।

अमृत कलश यात्रा पहुंची महा कुंभ -

kalash yatra

परंपरागत रूप से कुंभ की शुरूआत महा कलश यात्रा के साथ होती है। शुक्रवार को महा कलश यात्रा कुंभ पहुंची और अमृत कलश को कुंभ क्षेत्र में स्थापित कर दिया गया ।इसी के साथ परंपरागत रूप से महा कुंभ 2013 का प्रारंभ हो गया। कहा जाता है कि अमृत कलश के लिए देवताओं और दानवों में युद्ध हुआ था और जहां जहां अमृत कलश से अमृत की बूंदें छलककर गिरी थी वहां कुंभ होता है।
15 फीट के अमृत कलश में भारत के सभी पवित्र नदियों का जल और वहां की मिटटी है। महा कलश यात्रा में हाथी ,घोड़े ,बैंड-बाजे के साथ अनेक लोगों ने हिस्सा लिया।इस यात्रा में साधू , संतों ने भी भाग लिया। इस कलश के जरिये देवी देवताओं को कुंभ में आमंति्रत किया जाता है।

महा कुंभ जाएं राम फल खाएं -

ram fal

14 वषोर्ं के वनवास के दौरान भगवान राम ,सीता , लक्ष्मण की भूख शांत करने के लिए उन्होने जिस फल को खाया था वह फल आजकल कुंभ में बिक रहा है। कुंभ मेला और अर्धकुंभ मेले के दौरान यह आता है। वैसे तो यह कंद मूल है लेकिन इसको बेचने वाले इसे राम फल कहते हैं। इसका स्वाद हल्का मीठा है। मेले में अखाड़ों के बाहर यह फल बिकता है। अगली बार मेले में जाएं तो राम फल खाना न भूलें । इससे श्री राम का आर्शीवाद मिलेगा।

विदेशी बन गए भोले के भक्त -

shiv bhakt

मेले में आए सनातन धर्म के विदेशी अनुयायी आजकल शिव भकित में लगे हैं। सोमवार शाम को महा कुंभ में जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर पायलट बाबा और उनके रूसी शिष्य तथा महामंडलेश्वर स्वामी विश्वदेवानंद गिरी के नेतृत्व में विदेशी भक्तों ने भोले बाबा का दुग्धाभिषेक और जलाभिषेक किया। यह विदेशी भक्त भारतीय वस्त्र पहने हुए हैं। इसके बाद विश्व शांति और कल्याण के लिए भगवान शिव का लगातार जप किया और विश्व शांति के लिए यज्ञ करके कार्यक्रम समाप्त किया।

मामूली राख नहीं है नागाओं के शरीर पर मली भभूत -

naga baba

आपने देखा होगा नागा साधूओं के समस्त शरीर पर भभूत लगी होती है। देखने में तो यह आम राख जैसी ही है। अन्य साधूओं की तुलना में नागा साधू लोगों के कौतूहल का विषय बनते हैं विशेषकर विदेशियों के। संतो के अनुसार यह कोई मामूली राख नहीं है।यह सांसारिक मोह माया से मुकित का प्रतीक है। धुनी रमाकर तप करने बैठे नागा साधू लकड़ी के कुंदे से पैदा राख अपने शरीर पर मल मेते हैं। नागा साधू इस राख को भगवान शिव का प्रसाद मानते हैं। इसके साथ ही यह राख नागा साधूओं को सन्यास जीवन की याद दिलाता है और उन्हें सर्दी व गर्मी से भी बचाता है।

झटपट खबरें कुंभ की
1) सेक्टर सात में जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर सुरेंद्र गिरी के शिविर में 11 फरवरी से 25 फरवरी तक सीताराम नाम जप महायज्ञ किया जाएगा।
2) राम नाम बैंक का भूमि पूजन समपन्न।
3) कुंभ में आग की घटनाओं को देखते हुए छोटे सिलेंडरों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
4) स्वास्थ्य विभाग ने सेक्टर सात में दस बेड का अस्पताल खोला है।
5) निर्माता एकता कपूर की अगली फिल्म ' एक थी डायन की टीम महा कुंभ में डुबकी लगाएगी।
6) सेक्टर आठ में परमहंस स्वामी अड़गड़ानंद ने अपने शिविर में धर्म कर्म की व्याख्या प्रारंभ की।
7) कुंभ क्षेत्र के सांस्कृतिक मंच पर सोमवार को मुंबई से आये कलाकारों ने मां तुझे सलाम प्रस्तुत किया।

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