Friday, November 17, 2017
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kumbh-ki-jhalkiya
कुंभ में हर कोई पुण्य कमाने के लिए ही आता है। पैसे वाले पैसा खर्च करके आराम से पुण्य कमाने की कोशिश करते हैं ,आम लोग अपने हैसियत के अनुसार कष्ट करके पुण्य कमाने की कोशिश करते हैं। कुंभ में अनेक साधू आते हैं। सभी पुण्य कमाने के लिए आते हैं। कहा जाता है कि पुण्य के लिए कष्ट करना पड़ता है। सवाल यह है कि जो पैसा खर्च करके आराम से पुण्य कमाने की कोशिश कर रहे हैं क्या उन्हे कुंभ का पुण्य नहीं मिलेगा।

जेब ढ़ीली करें और कल्पवास के परेशानियों से बचें -

5 star kalpvaas

पैसा हो तो क्या नहीं हो सकता है। बिना तकलीफ के कल्पवास भी हो सकता है। कहते हैं कल्पवास के लिए आस्था और विश्वास का होना बहुत आवश्यक है। कल्पवासियों का जीवन कितना कठिन है यह तो आपको पता है परंतु मेला क्षेत्र में लगे यह टेंट कुछ और ही कहानी कह रहे हैं। यह फाइवस्टार टेंट हैं जहां आधूनिक सुख सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा गया है। इसके लिए एक कल्पवासी को 5 लाख रूपये देने पड़ेंगे।यह एक महीने रहने खाने का चार्ज है। यहां आम शिविरों की तरह पुआल पर सोना नहीं पड़ता है। सोने के लिए बेड पर गददा युक्त बिस्तर मौजूद है। मुंह धोने के लिए बेसिन , टावेल लगाने के लिए टावेल राड , चेहरा देखने के लिए आइना भी है। गंगा स्नान की विशेष व्यवस्था है।गंगा पूजन ,आरती के लिए 40 फीट उंचा मचान बना है। शाकाहारी भोजन बनाने के लिए रसोइया है। अब पुण्य भी कमाइये लेकिन आराम से ,बस जेब में पैसे होने चाहिए।

अदभुत गंगा आरती देखिये -

ganga arti

हरिहर आरती समाज द्वारा हर रोज गंगा आरती का आयोजन किया जाता है। हर शाम सैकड़ों लोग इस आरती को देखने संगम आते हैं। इस आरती का आयोजन केवल कुंभ मेले में ही नहीं गंगा महोत्सव और गंगा दशहरा के दिन भी होता है। कहा जाता है कि असली पुण्य पाने के लिए संगम स्नान के बाद इस आरती में समिमलित होना पड़ता है। प्रतिदिन भक्त इसमें भागीरथी का गुण गान करते हैं। नामी कलाकार भी इसमें भाग लेते हैं।

बाबा की धरोहर जटा -

story of jata

कुंभ में कितने तरह के बाबा आए हैं यह तो आपने पहले देखा है। आज आपका परिचय करवाते हैं बैरी बाबा से। नहीं नहीं उन्हें किसी इंसान से बैर नहीं है। उन्हे बैर है तेल और शैम्पू से। बाबा की जटा 3फीट से ज्यादा लंबी है। पिछले 21 सालों से उनकी जटाओं पर न तेल लगा है न कंघी। बाबा की जटाओं ने अदभुत रूप धारण कर लिया है। बाबा भक्तों को हाथ से नहीं इन जटाओं से ही आर्शीवाद देते हैं। इन जटाओं को संभालना भी बाबा के लिए आसान नहीं है। बाबा के अनुसार उनकी यह जटाएं उनके 21 साल के तपस्या का फल है और अब यह रस्सी की तरह बन गया है। बाबा कहते हैं कि वह इसकी सहायता से गाड़ी भी खींच सकते हैं।यह सिर्फ बाल नहीं बाबा की धरोहर है। बाबा चाहते हैं कि उनके मृत्यु के बाद उसे आने वाले साधू संतों को दे दिया जाय।

झटपट खबरें कुंभ की

1) जूना अखाड़े में बुधवार को 2000 नागा सन्यासियों का दीक्षा समपन्न हुआ।उन्होने तर्पण और अपना पिंडदान किया।
2) निरंजनी अखाड़े में मंगलवार को देहरादून के संत स्वामी महेश्वरानंद गिरी को महामंडलेश्वर बनाया गया। आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी पुण्यानंद गिरी ने उनका पटटाभिषेक किया। अब निरंजनी में महामंडलेश्वरों की संख्या 76 हो गयी है।
3) श्री श्री रविशंकर कुंभ में 13 फरवरी को आएंगे। वह सेक्टर आठ के प्लाट नंबर दो में 16 फरवरी तक रहेंगे।
4) राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष नवीन चंद्र वाजपेयी ने मंगलवार को संगम में डुबकी लगाई।
5) प्रशासन ने एकता कपूर की फिल्म 'एक थी डायन को कुंभ मेले में प्रचार की अनुमति नहीं दी।
6) पुरी मठ के शंकराचार्य निश्चलानंद ने कहा फांसी से रेप नहीं रूकेगा। युवाओं को आध्यातिमक और नैतिक शिक्षा देनी पड़ेगी।
7) धारावाहिक ' प्रतिज्ञा के मशहूर अभिनेता अनुपम श्याम ओझा कुंभ नगरी आए। प्रतिज्ञा में उन्होने सज्जन सिंह की भूमिका निभाई थी।
8) कुंभ मेला अगिन कांड के आठ पीडि़तों की हालत में मामूली सुधार हुआ है।
9) कुंभ मेला प्रशासन ने 1954 के ऐतिहासिक कुंभ का वीडियो अपनी वेबसाइट पर जारी कर दिया है। इसे यूटयूब पर भी देखा जा सकता है।
10) कुंभ मेले में आग की घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने फैसला किया है कि मोबाइल वैन कल्पवासियों को आग से बचाव के टिप्स देगी।

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