Sunday, November 19, 2017
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kumbh-ki-jhalkiya
कुंभ में तरह तरह के बाबा आते हैं । उनकी वेष भूषा , रहन सहन सभी के आकर्षण का केन्द्र बन जाती है। लेकिन उनका खास अंदाज , वेष भूषा सबमें एक संदेश छिपा होता है और वह अपनी तरह से लोगों में संदेश को फैलाने की कोशिश करते हैं। आज कुछ इसी तरह के बाबाओं की झलकियां आपको दिखाते हैं।

मचान पर बैठे बाबा -

machan baba

महात्यागी राम कृष्ण दास 12 सालों से मचान पर ही रहते हैं।2001 में प्रयाग कुंभ के दौरान शंकराचार्य ,अखाड़ों के प्रतिनिधि , संत -महात्मा सभी की अनुमति से महात्यागी बाबा मचान पर साधना में बैठे थे। 2001 कुंभ के दौरान अनेक साधू संतों ने गंगा को बचाने का आंदोलन छेड़ा था। प्रयाग के कोतवाल हनुमान जी की प्रेरणा से उन्होने भी गंगा को बचाने का संकल्प लिया। तभी उन्होने निर्णय किया कि भूमि को त्यागकर मचान पर साधना करेंगे। कुंभ से लौटने के बाद भी वह दिल्ली के अपने आश्रम श्री राम हनुमान वाटिका मंदिर में भी मचान पर ही साधना करते रहे।इस कुंभ में भी उन्होने गंगा को बचाने का संकल्प लेने के साथ साथ भूखों को भोजन कराने का भी संकल्प लिया है और मचान पर बैठे बैठे ही इसे पूरा भी कर रहे हैं।

अनेकता में एकता का संदेश फैलाने वाली टोपी पहने बाबा -

tirchi topi baba

राजस्थान के महात्मा सेवादास की टोपी इन दिनों कुंभ में आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है।उनकी रंग बिरंगी तिरछी टोपी देखकर यूं तो साधारण टोपी की तरह लगती है परंतु वास्तव में ऐसा है नहीं। बाबा के अनुसार उन्होने यह टोपी लोगों में अनेकता में एकता का संदेश फैलाने के लिए पहनी है। टोपी के अलग अलग रंग प्रतीक है कि विविधता में एकता से ही देश का कल्याण होगा। जिस तरह टोपी में एक के बाद एक रंग से टोपी खुबसूरत लगती है उसी तरह अलग अलग भाषा और बोली के लोगों के मिश्रण से ही भारत विविधता में एकता वाला देश कहलाता है। बाबा को उनकी टोपी के विषय में पूछने पर वह उसे यही संदेश देते हैं और अपनी इसी टोपी से आर्शीवाद भी देते हैं।

बाबा की पहचानरू रत्न ,अंगूठी ,मालाएं -

kali kamli baba

इनकी वेष भूषा से यह समझना मुशिकल है कि यह किसी अखाड़े के महंत हैं। यह बड़े उदासीन अखाड़े के महंत ' बिंदू महाराज हैं। इनकी पहचान है इनका काला चोला, दांत, नाखून और रूद्राक्ष। उनकी वेष भूषा और आभूषण इन दिनों कुंभ में चर्चा का विषय बन गयी है। ग्रह और रत्नों के अनुसार उनके दसों उंगलियों में सोने ,चांदी और ति्रधातु से बनी अंगूठियां हैं। गले में अनोखी और रंग बिरंगी मालाएं हैं।

बिंदू महाराज इलाहाबाद के ही हैं लेकिन आज से चालीस साल पहले इलाहाबाद के एक छोटे से गांव से निकलकर आध्यात्म की खोज में बड़ा उदासीन अखाड़ा पहुंच गये। बाबा की वेष भूषा जैसी भी हो उन्हे अखाड़े में विशेष दर्जा मिला है।

उनके गले में कई मालाएं हैं परंतु हर माला का अलग महत्व है। बाबा रूद्राक्ष ,शेर दांत की मालाएं ,चांदी से जडि़त मोतियों की माला , 1 से 21 मुखी 108 रूद्राक्ष की माला ,लामा पद्धति से यंत्र सहित स्फटिक की माला , हाथी दांत ,शेर के नाखून वाली महाशंख की मुंडमाल , गौरी शंकर,गणपति सहित चौदह मुखी रूद्राक्ष की माला ,सिंह ,बराह ,मगर के दांत सहित 54 पंचमुखी रूद्राक्षों का कंठा धारण करते हैं।

इनके माथे पर तांति्रक तिलक है और सभी उंगलियों में रत्न जडि़त अंगूठी है। दांए हाथ की उंगलियों में सोने ,चांदी से मढ़ा म्यांमार का 35 कैरेट का माणिक ,350 कैरेट का नेपाली मूंगा , 65 कैरेट का गोमेद ,40 कैरेट का पुखराज ,45 कैरेट की तीन मोतियों की अंगूठियां । अब बांए हाथ में देखें वह क्या पहनते हैं। 40 कैरेट का पन्ना ,12-12 कैरेट के दो माणिक के बीच 15 कैरेट का मूंगा , 80 कैरेट का कश्मीरी नीलम ,लहसुनिया ,कपालयंत्र की अंगूठियां धारण की हुई हैं। बाबा आजकल अखाड़े का प्रचार प्रसार करते हैं।

झटपट खबरें कुंभ की

1) कुंभ मेला अगिन कांड में गंभीर रूप से झुलसे आठ लोगों में एक बच्ची की बुधवार को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई।
2) विश्वशांति , जन कल्याण और महिलाओं के उत्पीड़न के खिलाफ एक फरवरी को मुकित मार्ग सिथत शिविर में जूना अखाड़े के नागा बाबा श्यामानंद सरस्वती भू- समाधि लेंगे।
3) विश्व हिंदू परिषद के संरक्षक अशोक सिंहल मौनी अमावस्या के शाही स्नान में शामिल हो सकते हैं।
4) कुंभ मेले के 29 घाटों पर150 विशेष जवान मुख्य स्नान पवोर्ं के दिन तैनात रहेंगे।
5) सभी स्नान पर्व से पहले नरोरा से 3500 क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा जाए-हाईकोर्ट।

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