Friday, November 17, 2017
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 nagaon k liye prachlit shabd
कुंभ मेले में ऐसी कोई चीज नहीं है जो नहीं मिलती लेकिन साधू संत हमेशा से ही कुभ में लोगों के आकर्षण का केन्द्र बने हुए हैं विशेषकर नागा साधू। नागा साधू आम जनता से दूर दूर रहते हैं और उनके बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं चलता। शायद इसीलिए लोगों में उनके प्रति कौतूहल भी अधिक होता है।एक आम धारणा है कि नागा साधू गुस्सैल प्रकृति के होते हैं लेकिन सच्चाई यह है कि सभी गुस्सैल नहीं होते कुछ होते हैं आइये जानते हैं क्यों।

नागाओं को राजराजेश्वर नागा , बर्फानी नागा ,खूनी नागा और खिचड़ी नागा कहते हैं। आप सोच रहे हैं कि नागा साधू चार प्रकार के होते हैं। नहीं हैं तो सब नागा साधू ही लेकिन ये चार शब्द उनके बारे में प्रचलित हैं।

प्रयाग ,हरिद्वार ,नासिक और उज्जैन में कुंभ होता है एवं यहां पर नागा साधू भी बनते हैं। कहा जाता है कि जिस स्थान पर नागा बनते हैं उस स्थान का प्रभाव उनके स्वभाव पर पड़ता है और इसीलिए उनके नाम के आगे राजराजेश्वर ,बर्फानी ,खूनी और खिचड़ी शब्द का प्रयोग होता है।

नागा बनने वाले साधू चाहते हैं कि उन्हें प्रयाग में ही नागा बनने का मौका मिले। तीर्थ राज प्रयाग के कुंभ में जो भी नागा बनते हैं उन्हें राजयोग प्राप्त होता है और उन्हें राजराजेश्वर नागा कहते हैं। प्रयाग में नागा बने साधू यह मानते हैं कि प्रयाग में नागा बनने के पश्चात वह राजाओं सा जीवन बिता रहे हैं।

जहां जहां कुंभ होता है उन सभी स्थानों के मुकाबले हरिद्वार सबसे अधिक ठंड है और चारों तरफ से पहाड़ों से घिरा हुआ है। यहां के कुंभ में बने नागा साधूओं को बर्फानी नागा कहते हैं। इनका स्वभाव भी ठंडा होता है।

उज्जैन के कुंभ में बनने वाले नागाओं को खूनी नागा कहते हैं। एक तो उज्जैन में महाकाल की पूजा होती है। हम सभी महाकाल के क्रोध के विषय में जानते हैं। दूसरी बात है उज्जैन का कुंभ गर्मियों में होता है। इसलिए यहां बनने वाले नागाओं का स्वभाव भी गुस्से वाला है।

नासिक का कुंभ बरसात के मौसम में होता है और वहां बनने वाले नागाओं को खिचड़ी नागा कहते हैं। आज मैने नागाओं के जीवन का एक पहलू आपके सामने लाने की कोशिश की है कल आप किसी और पहलू से रूबरू होंगे।

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