Wednesday, November 22, 2017
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gyandas
इलाहाबाद। हाईकोर्ट से अपनी जीत के बाद अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत ज्ञानदास शुक्रवार को प्रयाग पहुंचे। प्रयाग पहुंचते ही सभी को अपना काम सही तरीके से कर देने की हिदायत दे डाली। महंत ने दो टूक कहा कि संतों और श्रद्धालुओं की व्यवस्था को लेकर सभी अधिकारियों को दुरूस्त हो जाना चाहिए नही तो हम जरूरी कार्यवाही करेंगे। उन्होंने कहा की संतों और कल्पवासियों की व्यथा और परेशानियां उनकों इलाहाबाद ले आई हैं। महंत ज्ञानदास ने मेला प्रशासन को सारी कमिया पूरी करने के लिए पांच दिन की मोहलत दी है।


सुबह कालका मेल से जब महंत ज्ञानदास इलाहाबाद पहुंचे तो गाजे-बाजे से उनका स्वागत किया गया। महंत ज्ञानदास का काफिला पेशवाई की शक्ल में मेले की तरफ रवाना हुआ। महंत ज्ञानदास के समर्थन वाले वैष्णव अखाड़ों में उनके आगमन से बेहद खुशी थी। सबसे पहले काफिला जूना अखाड़े पहुंचा। वहां कोई संत नहीं मिले तो काफिला अनि अखाड़े की ओर बढ़ गया। संतों की बीच पहुंचने पर उनको भव्य स्वागत हुआ। इसके बाद ज्ञानदास दिगंबर अखाड़े पहुंचे। वहां उन्होंने ईष्टदेव का पूजन किया। महंत ज्ञानदास ने कहा कि अगर उन्हें बाकी अखाड़े उन्हें अध्यक्ष नहीं मानते तो संत के रूप में तो उनको स्वागत कर सकते हैं।

क्या है विवाद
अखाड़ा परिषद का विवाद हरिद्वार कुंभ से उपजा। यहां पर एक गुट ने ज्ञानदास को अध्यक्ष पद पर बरकरार रखने का समर्थन किया तो दूसरे गुट को ने बलवंत सिंह को अध्यक्ष माना। जिसमें वैष्णव संप्रदाय ज्ञानदास और शैव संप्रदाय बलवंत दास के साथ था। विवाद हाइकोर्ट पहुंचा। बुधवार को लखनऊ की पीठ ने महंत ज्ञानदास के पक्ष में अपना निर्णय सुनाया।

 

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