Sunday, February 25, 2018
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कुंभ मेला के त्रिवेणी रोड पर लगी खादी ग्रामोधोग की प्रदर्शनी में खरीददारों की संख्या बढ़ी है। उक्त प्रदर्शनी में विभिन्न प्रदेशों से आई 231 दुकानों में अब तक लगभग 2 करोड़ रूपये की बिक्री की जा चुकी है। विभिन्न प्रदेशों की लगी खादी ग्रामोधोग की दुकानों में लोगों की भीड़ देखी जा सकती है।

मुख्य कार्यपालक अधिकारी, खादी ग्रामोधोग उ0प्र0 श्री रमेश चन्द्र मिश्रा ने बताया कि उक्त पण्डाल में बिहार प्रान्त की 11 दुकानें, पशिचम बंगाल की 2 , हैदराबाद (आन्ध्र प्रदेश) 1, राजस्थान की 7, कश्मीर की 7, उत्तराखण्ड की 5, मध्यप्रदेश की 2, हरियाणा की 5, झारखण्ड की 2, छत्तीसगढ़ की 1 एवं नागालैण्ड की 1 सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों की विभिन्न प्रकार के वस्त्रों, खाधान्न वस्तुओं, सजावटी सामानों, प्राÑतिक औषधियों आदि की दुकानें लगी है। उक्त दुकानों में पशिचम बंगाल की लेदर व मसिलन का कपड़ा, वैस्त्रों पर बने आन्ध्रा प्रदेश की क्रोशिये की कारीगरी , राजस्थान की खाध सामग्र्री, जूते एवं औषधियां , कश्मीर के ऊलन वस्त्र तथा चादर, शाल आदि, उत्तराखण्ड के बैग व लेदर की वस्तुए, मध्यप्रदेश के हैंडीक्राफ्ट की वस्तुएं, हरियाणा के कम्बल व खादी वस्त्र आदि वस्तुओं की दुकानें आकर्षण का केन्द्र बनी हुयी है।

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उक्त पण्डाल में नागालैण्ड एवं झारखण्ड के मूँगा सिल्क एवं सिल्क की साडि़याँ, कपडे़ अपना आकर्षण बनाये हुए है। नागालैण्ड के डीमापुर से आये बिटटू ने बताया कि उनकी दुकान पर मुँगा सिल्क की साड़ी रू0 14000 की है जो कुंभ मेले में रू0 10500 में दे रहे है। मूँगा सिल्क के कपड़े रू0 1400 मीटर है। जो कुंभ मेले में रू0 1050 प्रति मीटर दिया जा रहा है। उनकी दुकान में घीचा साड़ी, झलक की साड़ी, आरी पर्क साड़ी भी है, जिसका मूल्य भी हजारों में है। उनकी दुकान में सबसे कम रू0 1500 की साड़ी है। एक ही पण्डाल में विभिन्न प्रदेशों की विभिन्न वस्तुओं की दुकानें लोगों को पसन्द आ रही हैं।
भारत वर्ष को ग्रामीण औधोगीकीकरण के पथ पर निरन्तर अग्रसर बनाये रखने में खादी एवं ग्रामोधोग आयोग सबसे महत्वपूर्ण संगठनों में से एक है। वर्ष 1957 में अपने प्रारम्भ होने से लेकर आज तक यह संगठन महात्मा गांधी जी के ग्राम स्वराज तथा स्वावलम्बन के सपने को चरितार्थ करने में सदैव प्रयत्नशील रहता है और ग्रामीण कारीगरों-बुनकरों के जीवन में खुशहाली और समृद्धि लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए लम्बी दूरी तय कर चुका है। कुंभ मेले में खादी गामोधोग की प्रदर्शनी में लोगों को विभिन्न प्रदेशों के सामान मिल रहे हैं अत: जैसे जैसे मेले में लोगों की संख्या बढ़ रही है वैसे वैसे इस प्रदर्शनी में भी लोगों की भीड़ बढ़ रही है।

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