Sunday, November 19, 2017
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kumbh sansad
कुंभ नगरी को धर्म नगरी ,आस्था की नगरी भी कहते हैं। लेकिन कल गुरूवार को धर्म संसद में जो हुआ वह केवल धर्म नहीं बलिक कुछ और ही कहलाता है जिसे हम सब आम बोल चाल की भाषा में राजनीति या सियासत कहते हैं। धर्म संसद का सीधा अर्थ तो यह समझ में आता है कि धर्म का अर्थ केवल धर्म है सिर्फ हिंदू धर्म नहीं लेकिन धर्म संसद में कुछ और ही महसूस हुआ।


पहले से ही विहिप के शिविर से जो बातें बाहर आ रही थी उससे स्पष्ट हो गया था कि धर्म संसद में राम मंदिर का मुददा ही प्रमुख होगा। लेकिन धर्म संसद में राम मंदिर मुददे से ज्यादा गुजरात के मुख्य मंत्री नरेन्द्र मोदी का नाम सुनाई दे रहा था।
संतों ने कहा कि नरेन्द्र मोदी जैसा प्रधानमंत्री ही देश के विकास के लिए जरूरी है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी धर्म संसद में भाग लेने कुंभ नगरी आए थे। सुबह गंगा स्नान के पश्चात उन्होने कहा था कि वह यहां राजनीतिक चर्चा के लिए नहीं आए हैं और नरेन्द्र मोदी को वह अपना मित्र मानते हैं। शाम को धर्म संसद खत्म होने से पहले मंच से उन्होने मोदी का नाम लिए बगैर कहा यह लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है कि अगला प्रधानमंत्री कौन हो परंतु यह काम राजनीतिज्ञों पर ही छोड़ देना चाहिए। उन्होने यह भी कहा कि भाजपा को उसी नाम पर गंभीरता से विचार करना चाहिए जिस नाम को भाजपा ने आगे बढ़ाया है और अब पूरे देश में वह नाम गूंज रहा है। उनके अनुसार संघ देश में हिंदुत्व को जागृत करने वाली शकित बनाना चाहता है। आरएसएस प्रमुख को जो भी कहना था उन्होने बिना किसी का नाम लिये ही कह दिया। मोहन भागवत की बातों का समर्थन वहां मौजूद साधू संतों ने हाथ उठाकर किया।
जगदगुरू रामानुजाचार्य स्वामी कौशलेंद्र प्रपन्नाचार्य ने धर्म संसद में सबसे पहले मोदी के नाम की चर्चा की। उन्होने सीधे सीधे शब्दों में कहा देश को अब यूपीए , एनडीए नहीं मोदी चाहिए। उन्होने यह भी कहा कि यदि मोदी के नेतृत्व में चुनाव हुए तो मजबूत सरकार बनेगी। मोदी के गुजरात माडल की भी चर्चा उन्होने की।
स्वामी वासुदेवाचार्य ने कहा कि यदि नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की घोषणा होती है तो उन्हें संत समाज का पूरा समर्थन मिलेगा। महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद ने मोदी के संघर्ष और गुजरात में उनकी सफलता की चर्चा की। उन्होने कहा मोदी को प्रधानमंत्री बनना चाहिए तभी देश विकास की राह पर चल पाएगा। महामंडलेश्वर वेद भारती ने तो यहां तक कह दिया कि यदि नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बनें तो वह देश के लिए हनुमान साबित होंगे। स्वामी गोविंद गिरी ने वहां मौजूद सभी संतों से नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट करने की अपील की। सभी संतों ने एकमत होकर प्रधानमंत्री पद के लिए मोदी के नाम का समर्थन किया।उनके अनुसार नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर ही मंदिर का निर्माण होगा।

संसद में राम मंदिर के लिए बिल लाया जाए -

ashok singhal

धर्म संसद में गुरूवार को मोदी के अलावा राम मंदिर का भी मुददा छाया रहा।साधू संत सभी चाहते हैं और कह भी रहें हैं कि राम मंदिर निर्माण के लिए हर स्तर पर अभियान चलाया जाएगा। वहां राम मंदिर के लिए संसद में भी बिल लाने की मांग उठी।
धर्म संसद में विहिप के संरक्षक अशोक सिंघल ने कहा राम मंदिर निर्माण की मांग केवल एक पार्टी ,संगठन और कुछ संतों की नहीं बलिक पूरे समाज की है। सिंघल ने गंगा यमुना की खराब सिथति पर भी कहा कि सरकार का सकारातमक रवैया नहीं दिख रहा है। उन्होने चेतावनी दी और कहा कि अयोध्या में वही होगा जो साधू संत चाहेंगे। पहले स्वराज के लिए आंदोलन हुआ था अब धर्म की रक्षा के लिए होगा। सिंघल ने संतों से कहा कि देश के नौ सौ जिले में अनुष्ठान प्रारंभ करके हिंदू समाज अपनी शकित दिखाएं। उन्होने एक वर्ष की समय सीमा तय करते हुए कहा कि संसद में मंदिर निर्माण पर निर्णय नहीं हुआ तो आगे की रणनीति बनाई जाएगी।
धर्म संसद की अध्यक्षता कर रहे शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने भी राम मंदिर मुददे का समर्थन किया। उन्होने कहा कि 13 मई से प्रारंभ होने वाले विजय महामंत्र में प्रतिदिन 13 माला जप किया जाएगा।मोहन भागवत ने कहा कि मंदिर बनवाने वाला ही संसद पहुंचेगा। इस मुददे पर कई साधू संतों ने अपना मत रखा लेकिन सभी की बातें एक जैसी ही थी। धर्म संसद में दस हजार संत उपसिथत थे। विहिप के कुछ बड़े नेता और संतों ने पहले जो भी कहा हो लेकिन धर्म संसद में वही हुआ जो पहले से तय था। धर्म संसद का आयोजन शंकराचार्य वासुदेवानंद के शिविर में हुआ। कुछ दिन पहले किसी बड़े नेता ने कहा था कि सरकार नहीं चाहती है कि सभी धर्म एक मंच पर आएं परंतु यहां तो पहले से ही तय था कि किस धर्म को मंच पर आना है। जब शिविर के अंदर मंच पर मोदी को प्रधानमंत्री बनाने की मांग हो रही थी तब बाहर भीड़ ' मोदी लाओ ,देश बचाओ का नारा लगा रही थी। कुंभ क्षेत्र का माहौल भी राजनीतिक माहौल जैसा गर्मा उठा था। समझ में नहीं आ रहा था यह राजनीतिक बैठक है या........

 

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