Friday, November 17, 2017
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maun amavasya

मौन रहने से आध्यातिमक शक्तियिों का विकास होता है, शरीर में ऊर्जा संग्रहित होती है।

माघमास की मौनी अमावस्या, कुम्भ का सबसे बड़ा स्नान पर्व है। इस दिन चुपचाप मौन रहकर मनुनियों के समान आचरण पूर्ण स्नान करने के विशेष विधान के कारण इस अमावस्या को मौनी अमावस्या कहते हैं। शरीर के धुलने का नाम ही स्नान नहीं है, वास्तविक स्नान तो वाक संयम है और मौन ही वाक संयम होता है इसलिए पूर्ण स्नान के लिए मौन रहकर स्नान करना अति आवश्यक माना गया है। ईगवान श्री कृष्ण ने श्रीमदईगवतगीता में वाकसंयम को तप की संज्ञा दी है। मौनव्रत से गंईीरता, आत्मशक्ति तिथा वाकशक्ति मिें वृद्धि होती है। मौन से तात्पर्य है बिना दिखावे के सेवा करना। मौन रहना सईी गुणों में सर्वोपरि है। मौन का अर्थ है संयम के द्वारा धीरे-धीरे इंद्रियों तथा मन के व्यापार को संयमित करना। समस्त सिद्धियों के मूल में मौन ही है। जैसे निद्रा से उठने पर शरीर, मन एवं बुद्धि में नर्इ स्फूर्ति दिखार्इ देती है वैसे ही मौन रहने पर सर्वदा वही स्फूर्ति शरीर के साथ मन एवं बुद्धि में बनी रहती है। मौन रहने से आध्यातिमक शक्तियिों का विकास होता है, शरीर में ऊर्जा संग्रहित होती है। जीवन ईर लोई, मोह, छल, कपट, काम, क्रोध, माया की दलदल में फंसा, कलियुग का श्रेष्ठ आधुनिक मानव कम से कम साल ईर में मात्र एक दिन मौन व्रत धारण कर अपनी सूक्ष्म आन्तरित शक्तियिों को पुन: संग्रहित कर सकता है। धर्मशालों के अनुसार इस व्रत को मौन धारण करके समापन करने वाले को मुनिपद प्राप्त होता है, जिससे अगले जन्म में व्रतकर्ता मुनि कहलाने का अधिकारी बनता है और अंत में ब्रह्रालोक प्राप्त कर लेता है। मौन व्रत रखने के धार्मिक लाई होने के साथ ही व्यक्ति किे आत्मबल की वृद्धि होती है। साथ ही साथ कम बोलने का अभ्यास ईी सरलता से हो जाता है। इस दिन मौन व्रत धारण कर संगम के अक्षय क्षेत्र में स्नान दान, पूजा-पाठ आदि पुण्यकर्म विशेष फलदायक कहे गये हैं। पुराणों में मौनी अमावस्या की पावन तिथि में प्रयाग स्नान की जो अपार महिमा वर्णित है वह कालिदास के शब्दों में स्वर्ग तथा मोक्षदायनी है। मौनी अमावस्या के दिन श्रद्धालुओं को ब्रह्रा मुहूर्त में उठकर, मौनव्रत धारणकर त्रिवेणी स्नान करना चाहिए। स्नान के पश्चात अपने तीर्थपुरोहित को गाय आदि का निष्क्रय रूप में दान देना चाहिए। अगर हो सके, तो मौन व्रत का पालन, व्रत कर्ता को पूरे दिन करना चाहिए। मौनव्रत में किसी ईी प्रकार के शब्दोच्चार अथवा फुसफुसा कर बात करना ईी वर्जित है। मौनव्रत से गंईीरता, आत्मशक्ति तिथा वाक शक्ति मिें वृद्धि होती है। कम बोलने का अभ्यास होने के साथ अधिक बोलने के दोष का निवारण ईी हो जाता है। कबीर ईी बोलने और मौन में सामंजस्य बनाने को कहते हैं:-

अति का ईला न बोलना अति की ईली न चुप।
अति का ईला न बरसना अति की ईली न धूप।।

 

मौनी अमावस्या पर दान करें, पाएं पुण्य अपार-

rashi chakra

संगम अथवा किसी भी पवित्र नदी में तीर्थराज प्रयाग और त्रिवेणी का स्मरण कर दान-पुण्य करने से कुम्भ का पुण्य फल प्राप्त होता है।

 

पचपन दिन के सम्पूर्ण कुम्भ महापर्व में मौनी अमावस्या का स्नान मुहूर्त अन्य सभी स्नान पर्वों में सर्वोत्तम कहा गया है। मौनी अमावस्या के विशेष पुण्यकाल पर स्वयं का उद्धार तथा पितरों को तारने के लिए संगम के अक्षय क्षेत्र में दान का विशेष विधान शास्त्रों में वर्णित है। मौनी अमावस्या कुम्भ में दान करने से अनिष्ट ग्रहों की पीड़ा का शमन होता है जिससे वर्ष भर सुख-समृद्धि घर में निवास करती है। इस दिन दान करने से सब प्रकार के पापों का क्षय, सब प्रकार की आधियों, व्याधियों का निवारण और सब प्रकार की हीनता अथवा संकोच का निपात होता है तथा प्रत्येक प्रकार की सुख, सम्पत्ति, संतान और सहानुईूति की वृद्धि होती है। राशि के अनुसार वस्तुओं का दान करने से जीवन में ग्रह बल प्राप्त होता है। संगम अथवा किसी भी पवित्र नदी में तीर्थराज प्रयाग और त्रिवेणी का स्मरण कर दान-पुण्य करने से कुम्भ का पुण्य फल प्राप्त होता है।

 

मेष तथा वृशिचक राशि :- मेष तथा वृशिचक राशि वाले मौनी अमावस्या के दिन लाल मसूर की दाल, गुण, लाल चन्दन, लाल फूल, सिन्दूर, तांबा, मूंगा, लाल वस्त्र आदि दान हेतु समिमलित करें तो उनको विशेष लाई प्राप्त होगा।
वृष तथा तुला राशि :- वृष तथा तुला राशि वाले मौनी अमावस्या के दिन सफेद वस्त्र, कपूर, खुशबूदार अगरबत्ती, धूप, इत्र आदि, दही, चावल, चीनी, दूध, चांदी, आदि दान हेतु समिमलित करें तो उनको विशेष लाई प्राप्त होगा।

 

मिथुन तथा कन्या राशि :- मिथुन तथा कन्या राशि वाले मौनी अमावस्या के दिन हरी सब्जी, हरा फल, हरा वस्त्र, काँसे का बर्तन, पन्ना या उसका उपरत्न अ‚नेक्स, हरी दाल, आदि दान हेतु समिमलित करें तो विशेष शुई फल प्राप्त होगा।
कर्क राशि :- कर्क राशि वाले मौनी अमावस्या के दिन दूध, दही, चावल, सफेद वस्त्र, चीनी, चांदी, मोती, शंख, कपूर, बड़ा बताशा आदि का दान अवश्य करें।
सिंह राशि :- सिंह राशि वाले मौनी अमावस्या के दिन गेंहू, गुड़, लाल वस्त्र, लाल पुष्प, लाल चन्दन, माणिक्य, शहद, केसर, सोना, ताँबा, शुद्ध घी, कुमकुम आदि दक्षिणा सहित दान करें।

 

धनु तथा मीन राशि :- धनु तथा मीन राशि वाले मौनी अमावस्या के दिन पीला वस्त्र, हल्दी, पीला अनाज, केला, चने की दाल, पुखराज या उसका उपरत्न सुनहला अथवा पीला हकीक, देशी घी, सोना, केसर, धार्मिक पुस्तक, पीला फूल, शहद आदि दान हेतु समिमलित अवश्य करें।

 

मकर तथा कुम्ई राशि :- मकर तथा कुम्ई राशि वाले मौनी अमावस्या के दिन काले तिल, काला वस्त्र, लोहा, काली उड़द दाल, काले फूल, सुरमा (काजल), चमड़े की चप्पल, कोयला, काला मिर्च, नीलम अथवा उसका उपरत्न जमुनिया, काले चने, काली सरसों, तेल आदि दान करें।

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