Friday, November 17, 2017
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punya-ki-dupki-1इलाहाबाद। रविवार को कड़ी सुरक्षा, आस्था और उत्साह के बीच दूसरा शाही स्नान संपन्न हुआ। सूर्योदय के साथ अमावस्या और इस मौके पर बन रहा ग्रहों का संयोग अब 147 साल बाद बना है तो इस पुण्य का लाभ उठाने के लिए देश दुनिया से करोड़ों लोगों ने स्नान किया। भारी भीड़ की सुविधा के लिए अठारह हजार फीट में 22 घाट बनाए गए थे। इस मौके पर लगभग तीन करोड़ लोगों ने स्नान किया।

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रविवार को महाकुंभ के दूसरे शाही स्नान के दौरान ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि पुलिस प्रशासन को उम्मीद से ज्यादा मशक्कत उठानी पड़ी। लोगों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को कहीं-कहीं बल प्रयोग भी करना पड़ा । खुद कमिश्नर देवेश चतुर्वेदी ने भी भीड़ को देखते हुए कमान संभाल ली। हालात को काबू करके थोड़े अफरा-तफरी के माहौल में इस महाकुंभ का शाही स्नान का यह दूसरा महापर्व शांति पूर्वक बीत गया। 

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सबसे पहले महानिर्वाणी और अटल अखाड़े ने सुबह सवा छह बजे शाही स्नान किया। उनके भव्य जुलूस में सैकड़ों नागा साधु संन्यासी और महामंडलेश्वर मौजूद रहे। तुरही ढोल की धुन और झंडे शस्त्रों के बीच जुलूस के शामिल संत नाचते गाते गंगा की तट की ओर पहुंचे। इसके बाद स्नान कर साधु उसी जुलूस के साथ वापस लौट गए। इसके बाद निरंजनी और आनंद अखाड़े ने शाही स्नान किया। जूना अखाड़े से पहले शाही जुलूस के रास्ते में पहुंच गई भीड़ को हटाने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। इसके बाद जूना अखाड़े का सबसे बड़ा जुलूस निकला। चांदी के हौदों पर सवार होकर महंत, श्रीमहंत निकले तो लोगों की निगाहें ही ठहर गई। सुबह 8 बजे जूना अखाड़े का शाही स्नान हुआ। इस दौरान घाट पर कफयर् जैसी सिथति दिखी। जूना अखाड़े के स्नान के दौरान एक नाव उलट गई थोड़ी अफरा-तफरी के बाद सिथति पर काबू कर लिया गया।

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इसके बाद आवाहन अगिन, निर्मोही, दिगम्बर निर्वाणी, नया पंचायती, बड़ा पंचायती और निर्मल पंचायती अखाड़े ने शाही स्नान किया। इन सभी जुलूसों में बड़ी संख्या में महामंडलेश्वर शामिल रहे। इसके अलावा मकर संक्रांति के बाद इस महाकुंभ पर पहली बार शंकराचार्यों ने स्नान किया। बड़ी संख्या में विदेशियों ने भी शाही स्नान के मौके पर पुण्य की डुबकी लगाई।

देश भर से सिर पर गठरी लादे लोगों का जत्था दिन भर मेले में प्रवेश करता रहा। लोगों ने कुटुंब सहित संगम में स्नान कर पुण्य की डुबकी लगाई और अपने साथ गंगा जल जरीकेन में भर कर ले गए। स्नान ध्यान और दान के बाद जिसे जहां जगह मिली वहीं रूककर खाना पकाया और अपने घरों की ओर निकल गए।

करीब 3 लाख लोग पहंचे भूले भटके शिविर
इस कुंभ में मौनी अमावस्या के दिन लाखों लोग ऐसे थे जो अपनों से बिछुड़ गए। दिन भर लाउडस्पीकरों की मदद से लोगों को अपनों से मिलाया गया। भूले भटके शिविर के संस्थापक राजा राम पांडेय ने बताया कि इस कुंभ में अब तक 16 लाख लोगों को अपनों से मिलाया जा सका है।

 

 

 

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