Sunday, November 19, 2017
User Rating: / 0
PoorBest 

kumbh-ki-jhalkiya
कुंभ में यूं तो अनेक रंग बिखरे हुए हैं और आज तो कुंभ का रंग कुछ और ही है। आवश्यकता है उनको समेटने की। आज के महास्नान में आकर जिन्होने इन रंगों को समेट लिया है उन्होने जिंदगी भर संचय करके रखने लायक पूंजी जमा कर ली है।

विदेशी और कुंभ-

videshi aur kumbh

भारतीय और विदेशी दोनो ने ही मौनी अमावस्या का स्नान किया लेकिन भारतीयों में केवल आस्था दिखी और विदेशियों में आस्था के साथ मस्ती भी दिखी। दो विदेशी संगम तट पर गंगा स्नान करने के पश्चात ' नजर के सामने जिगर के साथ गाते दिख गए। वह नमस्ते भी करते हैं। उनकी ही भाषा में ' हमें इन्दी तोड़ी तोड़ी ।

काफी विदेशी भारत आकर सन्यासी बन रहे हैं। चेक रिपबिलक की एक महिला अपने देश में योगा टीचर हैं। उन्हें हिंदू धर्म से लगाव था। वह इससे पहले भी अर्ध कुंभ में आ चुकी हैं। हिंदू आध्यात्म से गहरे लगाव के कारण ही वह इस कुंभ में सन्यासी बन गईं। ऐसा ही स्लोवाकिया के रहने वाले व्यकित के साथ हुआ। पूरे वैदिक रीति रिवाज से उन्होने सन्यास की दीक्षा ली और अब अपना सारा जीवन हिंदू धर्म के प्रचार प्रसार में बिताएंगे।वह कह रहे हैं कि अब उन्हें बहुत शांति मिल रही है।

12 साल पहले इटली के नागरिक सन्यासी बन गए हैं। अपना इटालियन नाम तो नहीं बताते। वह इटालियन बाबा के नाम से प्रसिद्ध हैं। नाम पूछने पर वह बताते हैं ईश्वर गिरी। बसंत पंचमी के शाही स्नान के अवसर पर वह नागा साधू के तौर पर शामिल होंगे। वह इटली के पहले नागा साधू बनेंगे।

आस्ट्रेलिया के सन्यासी सर्वांग गिरी अपना पुराना नाम भूल गए हैं ऐसा उनका कहना है। 2004 के उज्जैन कुंभ में वह सन्यासी बनें।

कितने विदेशी अपना धर्म छोड़कर हिंदू धर्म के आकर्षण में बंधे इसी के होकर रह जाते हैं। हिंदू धर्म अपनाने के बाद उन्हें शांति मिलती है। अनेक ऐसे विदेशियों ने कहा है कि उन्हें जिस शांति की तलाश थी वह हिंदू धर्म में आकर मिली। अगर दूसरे देश के लोग हिंदू धर्म के प्रति आस्थावान हैं ,उसे अपना रहे हैं , उनके बीच में हिंदू धर्म इतना लोकप्रिय है तो हिंदू धर्म के कर्ता धर्ता यह क्यों सोचते हैं कि हिन्दुत्व का प्रचार राम मंदिर निर्माण से जुड़ा है। मर्यादा पुरूषोत्तम श्री राम तो धरती के कण कण में निवास करते हैं।यदि राम मंदिर का निर्णय आने में देरी हो रही है तो क्या हिंदू धर्म कमजोर हो रहा है । नहीं हिंदुत्व का असितत्व केवल राम मंदिर से जुड़ा नहीं है। हां भगवान राम से अवश्य है और वह तो धरती के कण कण में निवास करते हैं ,हम सब में हैं किसी एक मंदिर में नहीं।

सम्राट अकबर को झुकने के लिए किया मजबूर-

akbar

श्री शंभू पंचायती अटल अखाड़ा का दावा है कि उनके सामने बड़े बड़े राजा महाराजाओं को हारना पड़ा है। जब भी राजा महाराजाओं ने अखाड़े को अनदेखा करने की कोशिश की तभी युद्ध हुआ और अखाड़े की जीत हुई। अखाड़े के अनुसार सम्राट अकबर को भी अखाड़े ने एक बार कैद किया था और उन्हें झुकने पर मजबूर किया था। इस अखाड़े का नाम अटल इसलिए है क्योंकि यह कभी पीछे नहीं हटा।

महिला सन्यासिनीयों की बढ़ती संख्या-

mahila sanyasini
महिला सन्यासिनीयों का अलग अखाड़ा तो बन गया है। इसका नाम है श्री पंच दशनाम सन्यासिनी अखाड़ा। महिला सन्यासिनीयों की संख्या दिनों दिन बढ़ रही है। पढ़ी लिखी महिलाएं सन्यासिनी बन रही हैं। इस अखाड़े में 63: महिला सन्यासिनीयां स्नातक हैं। नियम कानून तो वह निरंजनी का मानते हैं। अब महिला महामंडलेश्वरों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी हो रही है। महानिर्वाणी में दो महिला महामंडलेश्वर हैं।फिर भी इस महिला अखाड़े की मांग को नहीं माना गया। शाही जुलूस में पुरूषों से पहले एक संपूर्ण महिला अखाड़े के रूप में जाने का अधिकार ही उनकी मांग थी।पिछले दिनों महिला महामंडलेश्वर गुरू मां आनंदमयी ने पत्रकार वार्ता में कहा था हर जगर लेडीज फस्र्ट का चलन है तो यहां क्यों नहीं।

झटपट खबरें शाही स्नान की - 
1) प्रवीण तोगडि़या की बहुत दिनों की इच्छा थी महामंडलेश्वर की तरह शाही स्नान में भाग लेना। इस महाकुंभ में मौनी अमावस्या के दिन प्रवीण तोगडि़या आवाहन अखाड़े के साथ हौदे पर महामंडलेश्वर की तरह बैठ कर शाही स्नान के लिए पहुंचे।

2) इस कुंभ में सभी शंकराचायोर्ं ने पहली बार एक साथ शाही स्नान में भाग लिया।

3) महिला श्रद्धालू संगम तट पर छोटी छोटी कुंभी लेकर खड़े थे। कुंभी छोटे छोटे कलश को कहते हैं। इतनी छोटी कि हाथ में समा जाए। इस कुंभी के अंदर पंच रत्न सोना , चांदी ,तांबा , पीतल,लोहा होता है।पानी में बहा देने अर्थात इसका दान करने के बाद वह घर लौट जाती हैं।

4) चांदी की पालकी में अखाड़ों के देवता स्नान को चले । पालकी को नागा साधू ले जा रहे थे।देवता का यह रूप देखने लायक था।

5) बंगलूरू के नित्यानंद स्वामी महामंडलेश्वर के तौर पर महानिर्वाणी अखाड़े के साथ रथ पर सवार होकर शाही स्नान के लिए गए।

6) गुजरात का दाहोद जिला आदिवासी बहुल जिला है। यहां से आदिवासी कुंभ मेेले में मौनी अमावस्या का स्नान करने आए हैं। अपनी पारंपरिक पोशाक और अस्त्र शस्त्र लेकर जब वह नाचते गाते स्नान के लिए जा रहे थे तो नजर हटाए नहीं हट रही थी।

7) संगम तट पर गायक वंश गोपाल उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के राजा आल्हा के गीत सुना रहे थे।आलहा की वीर गाथा गाने के साथ ही उनकी तलवार भी चमक रही थी। आल्हा की तरह ही जब वह तलवार ललकार कर गा रहे थे तो उसे सुनने के लिए अच्छी खासी भीड़ जमा हो गयी थी।

8) गंगा स्नान के बाद शास्त्रीय गायक पंडित जसराज जूना अखाड़े के स्वामी अवधेशानंद के साथ दिखे।

Add comment

We welcome comments. No Jokes Please !

Security code
Refresh

Magh Mela 2014

Who's Online

We have 1596 guests online
 

Visits Counter

749180 since 1st march 2012