Friday, November 17, 2017
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nav durga
महाकुंभ नगर, महामंडलेश्वर, सेक्टर 91 में प्रजापिता ब्रहमाकुमारीज़ ईश्वरीय विश्व विधालय द्वारा आयोजित परमात्म शकित से आत्म जागृति आध्यातिमक मेले में चैतन्य देवियों की झांकी लगायी गयी है। जिसमें संस्था की बहनें चैतन्य देवी मूर्ति रूप में विराजमान होती हैं। बिना पलक झपके यह बहनें बहुत समय तक एकाग्र सिथति में बैठती हैं।


यह नवदुर्गा झांकी ध्वनि एवं प्रकाश का अदभुत संगम है। एक-एक देवी बहुत ही शोभनिक तरीके से प्रकट होती है। सबसे पहले ऊंची चोटी पर बैठी ब्रहमाकुमारी बहन, सूर्य के पीछे से प्रकट होती हैं। तत्पश्चात मा दुर्गा, सहस्र भुजाधारिनी, जिनके ध्यान मात्र से जन-जन की दरिद्रता का नाश हो जाता है, धरती से अवतरित होती है।


• मां लक्ष्मी खिलते हुए कमल से प्रकट होती दिखायी गयी हैं। जो धन की देवी, कमलासिनी हैं।

• मा काली गुफा से प्रकट होती दिखायी गयी हैं। जब पाप, अत्याचार, से धरती भी कांपने लगती है, ऐसी काल रात्री मं मां शकित रौद्र रूप धारण करती हैं ।

• मा शीतला, चन्द्रमा के समान शीतल ऊपर से नीचे की तरफ आती हैं।
• मा सरस्वती, हाथ में वीणा और ग्रंथ लिये, हंस पर प्रकट होती हैं।
• मा वैष्णो करूणा, दया की देवी ऊपर से अवतरित होती हैं।
• मां उमा, सर्व को उमंग-उत्साह से भरपूर करने वाली गुफा से प्रकट होती हैं।
रोज शाम को 6 बजे से 9 बजे तक मा का दरबार खुलता है। जिसमें अनेक भक्तजन दर्शन का लाभ उठाते हैं।
बरेली से पधारी स्थायी लोक अदालत की सदस्या, श्रीमती शशीबाला जौहरी जी ने चैतन्य देवियो की झांकी का दीप प्रज्जवलित कर उदघाटन किया। दीप प्रज्जवलन के पूर्व उन्होंने पूरे मेले का अवलोकन किया।

उन्होंने अपने हृदयोदगार व्यक्त करते हुए कहा कि आप सबने नारी को शकित के रूप में देखा। देवी का अर्थ ही है-देने वाली। सुख, शानित, आनंद, प्रेम, शकित देने वाली। देवी शकित स्वरूप होती है। आज की नारी या तो सद गृहस्थन बनती है या फिर फैशन की होड़ में है। अगर नारी अपनी शकितयों को पहचान ले तो नारी पुन: पूज्यनीय बन सकती है। लक्ष्य रखना है कि हम देवी समान पूज्यनीय बन जायें। आदिकाल की नारी शकित के समान आज की नारी भी बन जाये तो कई दुर्घटनाए होने से रूक सकती हैं। नारी तब भी पूज्यनीय थी-मां दुर्गा, मा लक्ष्मी, मा सरस्वती के रूप में, नारी आज भी पूज्यनीय है। प्रथम गुरू मा को ही माना गया है। आवश्यकता है केवल अपने नजरिये को बदलने की।

परमात्मा स्वयं अवतरित हो नारी की उन खोयी हुई शकितयों को पुन: जागृत कर रहे हैं। नर-नारी को श्री नारायण श्री लक्ष्मी समान देवतुल्य बना रहे हैं। इसके लिए आवश्यकता है अपने अंदर उन दिव्यगुणों को भरने की, जो दिव्यगुण हमारे पूज्य स्वरूप देवी-देवताओं में थे। दिव्यगुणों को अपने जीवन में धारण करने से भारत भूमि पुन: देव भूमि में परिवर्तित हो सकती है।

 

 

 

 

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