Friday, November 17, 2017
User Rating: / 0
PoorBest 

 

kumbh accident
147 वर्षों बाद मौनी अमावस्या के दिन बने दुर्लभ ग्रहीय संयोग और विशिष्ट योग के लिए इस वर्ष यह शाही स्नान सभी के लिए कुछ विशेष था। डुबकी लगाने की खुशी इतनी जल्दी मातम में बदल जाएगी यह किसी को मालूम नहीं था। ति्रवेणी संगम मे हो रहे महा कुंभ में मौनी अमावस्या का स्नान करके पुण्य अर्जन करने के पश्चात , मोक्ष की कामना करते श्रद्धालु अपने अपने घरों को रवाना हो गए।

नहीं जानते थे कि स्टेशन का यह हादसा उनके किये हुए पुण्य के आगे छोटा पड़ जाएगा। मृत्यु के समय उन्हें गंगा जल भी नसीब न हुआ। लाश पर से दूसरे लोग अपनी गाड़ी पकड़ने के लिए गुजरते रहे। कई घंटे बाद कफन के रूप में राजधानी एक्सप्रेस की बेडरोल मिली।

शाम को स्नान करने के पश्चात श्रद्धालूओं की भारी भीड़ ट्रेन पकड़ने के लिए इलाहाबाद जंक्शन पहुंची।फुट ओवर बि्रज पर अचानक भगदड़ मच गई। रेलवे ने हादसे में 36 लोगों के मरने की पुषिट की है। 100 से अधिक लोगों के घायल होने की खबर है। मृतकों की संख्या में बढ़ोत्तरी होने की पूरी संभावना है। रेलवे की ओर से आई पहली खबर में कहा गया था कि फुट ओवर बि्रज की रेलिंग टूटने से लोग गिर पड़े और यह हादसा हुआ। रेलवे के इस बयान के बाद मीडिया ने बि्रज के टूटे रेलिंग को ढूढ़ने की बहुत कोशिश की लेकिन उन्हें नहीं मिला। सवाल यह है कि रेलवे ने ऐसा क्यों कहा ? रेल मंत्री पवन बंसल भी इस सवाल का जवाब देने से बचने की कोशिश करते नजर आए।

kumbh accident

चश्मदीदों के अनुसार जंक्शन पर आने जाने के लिए एक ही रास्ता था। अचानक दो ट्रेनों का प्लेटफार्म बदल देने से भारी संख्या में लोग दूसरे प्लेटफार्म पर जाने के लिए फुट ओवर बि्रज पर से जाने लगे। भारी भीड़ को रलवे नहीं संभाल सकी और रेलवे पुलिस ने लाठी र्चाज किया जिसके फलस्वरूप भगदड़ मच गई। हादसे के बाद भी करीब दो घंटे तक न प्रशासन का कोई व्यकित ,न रेलवे अधिकारी , न ही कोई डाक्टर नर्स कोई भी झांकने नहीं आया। भगदड़ मचने के बाद कितने लोग घायल थे जिनकी सांसें चल रही थी लेकिन कोई भी डाक्टरी मदद न मिलने के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका। लोग अपने रिश्तेदारों से बिछड़ गये थे और पागलों की तरह उन्हें ढूढ़ रहे थे। घायलों और मृत लोगों के रिश्तेदार डाक्टरों के लिए चीख रहे थे। हादसे के बाद प्लेटफार्म नण्6 का नजारा कुछ ऐसा ही था। सिथति को नियंत्रण में लाने के लिए दो घंटे तक कोई नहीं आया। यह चश्मदीदों का कहना है। 

रेलवे और रेलवे पुलिस लाठी चार्ज की घटना से इंकार कर रही है लेकिन अचानक भगदड़ मची क्यों यह भी नहीं बता रही है। रेलवे ने कुंभ प्रारंभ होने से पहले बहुत बड़े बड़े दावे किये थे । उसका क्या हुआ ? क्या सभी दावे खोखले थे ?मौनी अमावस्या पर भारी भीड़ का अनुमान पहले से ही किया जा रहा था फिर रेलवे अफसर इस भीड़ को संभालने में नाकमयाब क्यों रहे। रेलवे केंद्र सरकार के अधीन है इसलिए राज्य सरकार पूरी जिम्मेदारी रेलवे पर डाल रही है और रेलवे किसी तरह राज्य सरकार को दोषी ठहराने की फिराक में है। कल रात से ही ब्लेम गेम शुरू हो गया है।

हादसे के करीब तीन घंटे बाद पहुंचे सपा विधायक पूरी जिम्मेदारी रेलवे पर डालकर बचना चाह रहे थे । सरकार की तरफ से मदद पहुंचने में इतनी देर क्यों हुई इसका जवाब उनके पास नहीं था। सपा नेता आजम खां कह रहे हैं कि जांच के बाद ही किसी पर उंगली उठाना चाहिए।अब सभी राजनीतिक दल हादसे को भूलकर सिर्फ केंद्र सरकार की ओर उंगली उठा रहे हैं क्योंकि मरने वाले आम श्रद्धालू हैं। अगले साल चुनाव है और मरने वालों को कैश करने के लिए राजनीति प्रारंभ हो चुकी है। क्या इसमें राज्य सरकार का कुछ भी दोष नहीं है। मान लेते हैं कि हादसा पूरी तरह से रेलवे की बदइंतजामी की वजह से ही हुआ है। लेकिन हादसे के बाद प्रशासन द्वारा मदद पहुंचाने में इतनी देर क्यों हुई ? जहां इतनी भारी भीड़ इकटठी होने का अनुमान प्रशासन को पहले से ही था वहां प्रशासन किसी भी आपात कालीन सिथति से निपटने के लिए तैयार क्यों नहीं था। वहां एमबुलेंस का इंतजाम पहले से क्यों नहीं था ? प्लेटफार्म पर फस्र्टएड एवं डाक्टर क्यों नहीं था ? आखिरी समय में ट्रेन का प्लेटफार्म क्यों बदला गया अगर बदला भी गया तो पहले इसकी घेषणा क्यों नहीं की गई ? पुलिस भीड़ को क्यों नहीं काबू कर पा रही थी ? याति्रयों को अपनी गाड़ी पकड़ने के लिए किस प्लेटफार्म पर जाना किस ओर से जाना है ,कौन सी गाड़ी किस प्लेटफार्म पर आ रही है , याति्रयों को कहां जाना है इसकी पूरी जानकारी और मदद के लिए रेलवे ने क्या इंतजाम किये ? यह कोई आम दिन नहीं था एक विशेष दिन था । इंतजाम भी आम नहीं विशेष होना चाहिए था। 

अब घटना की जांच के लिए कमेटी बैठाई गई है। मृतकों को पांच लाख रूपये और घायलों को एक लाख रूपये की मदद की घोषणा हुई है। रेलवे ने भी मदद की घोषणा कर दी है।

जिसको जाना था वह तो चले गये। आज से 59 साल पहले आजाद भारत का पहला कुंभ प्रयाग में हुआ था। उस बार मौनी अमावस्या 3 फरवरी को पड़ा था। संगम तट पर भगदड़ मचने से बहुत बड़ा हादसा हुआ था। लाशों का ढ़ेर लग गया था। वरिष्ठ पत्रकार वीण्एसण्दत्ता से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार - आधिकारिक तौर पर कहा गया था कि 500 लोगों की मौत हुई है और 100 से अधिक घायल हैं। समाचार पत्र गार्जियन में 800 लोगों के मौत की खबर थी। अमरीका के टाइमस मैगजीन में 350 मृत ,2000 घायल और 200मिसिंग। ला एंड आर्डर किताब में 500 लोगों के मरने की बात थी।

इलाहाबाद में कुंभ की बात होते ही लोग 1954 के कुंभ की चर्चा करते हैं। 1966 के कुंभ में लोग डरे हुए थे लेकिन बहुत अच्छी व्यवस्था की गई थी और वह कुंभ बिना किसी हादसे के निपट गया। 1954 के बाद प्रयाग में इतने सारे सफल कुंभ होने के बावजूद लोग उस कुंभ के हादसे को नहीं भूल पाए हैं। अब तो इलाहाबाद कुंभ के साथ हादसा शब्द हमेशा के लिए जुड़ गया। अगर रेलवे और प्रशासन अपने दिल और दिमाग का प्रयोग करके थोड़ी सी सावधानी बरतते तो इस बार का कुंभ गौरवमय इतिहास बनता।

 

Add comment

We welcome comments. No Jokes Please !

Security code
Refresh

Magh Mela 2014

Who's Online

We have 2983 guests online
 

Visits Counter

748452 since 1st march 2012