Sunday, November 19, 2017
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 dubki

तीन डुबकी दिलाएगी पूर्ण कुम्भ का पुण्य
अदृश्य रूप से विधमान है सरस्वती तीर्थराज प्रयाग में

बसंत पंचमी के पर्व पर ब्रहम मुहूर्त से 10 बजकर 57 मिनट तक गणपति तथा विधा की देवी मां सरस्वती का पूजन कर त्रिवेणी संगम में विधमान अदृश्य सरस्वती, गंगा एवं यमुना जी सहित तीर्थराज प्रयाग का स्मरण कर डुबकी लगाने वाला व्यकित महापुण्य का भागी बनता है।

धर्मशास्त्रों के अनुसार प्रयाग में सरस्वती अदृश्य रूप से विधमान है, यहां स्नान करने से सरस्वती के जितने जलकण स्नान के समय शरीर को स्पर्श करते हैं उतने ही समय तक मनुष्य स्वर्ग में वास करता है। सरस्वती पुण्यप्रदायनी, पुण्य की जननी तथा पवित्र तीर्थ स्वरूपा है। पाप रूपी अज्ञान की लकड़ी को जलाने के लिए यह अगिनस्वरूपा है। अतएव वसंत पंचमी को सरस्वती के दिन स्नान-दान और पूजन करने से पापों का क्षय और अविधा का नाश होता है, बुद्धिबल का विकास होता है। शाही स्नान पर तीन डुबकी लगाने से पूर्ण कुम्भ का पुण्य प्राप्त होता है। यधपि प्रयाग में सरस्वती अदृश्य है परंतु इसके असितत्व से इंकार नहीं किया जा सकता। गंगा और यमुना के साथ सरस्वती का नाम जुड़ने से ही त्रिवेणी का योग बनता है। वस्तुत: सरस्वती में स्नान करने का महान पुण्य है जो श्रद्धालु सरस्वती में स्नान करते हैं उनका पुनर्जन्म नहीं होता अर्थात मोक्ष की प्रापित होती है। मान्यता है कि जो व्यकित मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या के बाद तीसरे शाही स्नान बसंत पंचमी पर भी त्रिवेणी स्नान करता है, उसे पूर्ण कुम्भ का फल मिलता है।

 

 

 

 

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