Friday, November 17, 2017
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nav grah
कुम्भ कल्पवास का महाअनुष्ठान दान-पुण्य से करें पूर्ण

माघ पूर्णिमा के दिन स्नान, दान, जप, हवन आदि करने से अनंत फल की प्रापित के साथ ही नवग्रह जनित दोष समाप्त हो जाते हैं। इस बार सोमवार को माघी पूर्णिमा, मघा नक्षत्र का संयोग कुम्भ पर्व पर उच्च राशि के शनि आदि की सकारात्मकता के कारण यह पर्व विशेष मंगलकारी है। इस दिन सिंह राशि का चंद्रमा अपनी अमृतमयी रशिमयों से पृथ्वी के जल में एक विशिष्ट तत्व का संचार करेगा, जिससे दान-पुण्य करने वाले श्रद्धालुओं के कष्टों का निवारण होगा। महापर्व कुम्भ के सुअवसर पर माघ मास में माघी पूर्णिमा को प्रात: स्नान करके यदि सूर्य को अघ्र्य दें तथा आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ, लाल चन्दन, लाल वस्त्र, गेहूं का दान करें तो सूर्य का दोष समाप्त हो जाता है। इसी प्रकार अगर जन्मकुण्डली में चन्द्रमा निर्बल हो तो चंद्र दोष दूर करने के लिए चंद्रमा के निमित्त मिश्री, शक्कर एवं चावल का दान करें। कर्ज का बोझ अथवा मंगल का कष्ट होने पर माघी पूर्णिमा के दिन मंगल के निमित चने की दाल, गुड़ एवं लाल वस्त्र, ताम्बे के बर्तन आदि का दान अवश्य करना चाहिए। बुद्धि विवेक में वृद्धि एवं बुध की अनुकूलता के लिए बुध के निमित्त आवंला, आवंले के तेल, हरी सबिजयों का दान करना चाहिए। विवाह में बाधा हो अथवा गुरू दोष दूर करने के लिए गुरू के निमित्त पीली सरसों, केसर, पीला चंदन, मक्का, सामथ्र्य अनुसार सोने का दान करना चाहिये। दाम्पत्य जीवन में मधुरता अथवा शुक्र दोष दूर करने के लिए शुक्र के निमित्त शुक्रवार को माघी पूर्णिमा पर कपूर, देसी घी, मक्खन, सफेद तिल, गजक आदि का दान करना चाहिए। साढ़ेसाती, ढैयया से बचाव अथवा शनिदोष दूर करने के लिए माघी पूर्णिमा पर काले तिल, तिल्ली का तेल, लोहपात्र, काला वस्त्र आदि दान करना चाहिए। इसी प्रकार राहु के लिए चितकबरा कंबल, भोजन, अधोवस्त्र आदि तथा केतु के निमित्त स्कार्फ, टोपी, पगड़ी आदि का दान तथा विकलांग लोगों की सहायता करने से सभी ग्रहों के कारण होने वाले विकारों को दूर किया जा सकता है। माघी पूर्णिमा के दिन पितरों को तर्पण करने का विशेष महत्व होता है। माघी पूर्णिमा के दिन यज्ञ, तप तथा दान का विशेष महत्व है। स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। व्रत रखने वाला ''ओम नमो नारायण कहकर भगवान का आवाहन करे और आसन, गंध, पुष्प आदि से भगवान का पंचोपचार अथवा षोडशोपचार पूजन करे। भगवान के सामने चौकोर वेदी बनाकर हवन करें, हवन में तेल, घी, बूरे आदि की आहूति दें, हवन की समापित के बाद फिर भगवान की पूजा करें और अपना व्रत उनको अर्पण करें। ब्राहमणों को भोजन कराऐं और दान देकर विदा करें। पितरों के निमित्त दान देकर गरीबों को भोजन, वस्त्र, तिल, कम्बल, गुड़, कपास, घी, लडडू, फल, अन्न, खड़ाउं आदि का दान करना चाहिए। जो ग्रह पीड़ादायक हो, उस ग्रह के निमित्त संकल्पपूर्वक अनिष्ट शांति के लिए माघी पूर्णिमा के दिन संगम के अक्षय क्षेत्र में अथवा किसी भी पवित्र नदी-तालाब, मंदिर, देवालय अथवा धर्मक्षेत्र में तीर्थ पुरोहित को दान कर आशीर्वाद प्राप्त करें।

 

 

 

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