Sunday, November 19, 2017
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kumbh rain
25 फरवरी को माघी पूर्णिमा है। इस दिन स्नान करने के बाद एक महीने से कल्पवास कर रहे कल्पवासियों का कल्पवास पूरा हो जाएगा। कल्पवासियों के अलावा बाहर से भी श्रद्धालु इस दिन संगम में डुबकी लगाने के लिए आते हैं। इस बार भी माघी पूर्णिमा पर स्नान के लिए भारी संख्या में स्नानार्थियों का आना जारी है। लगभग एक करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान प्रशासन ने लगाया है और इस भारी भीड़ को नियंति्रत करना मेला प्रशासन के लिए चुनौती है। परंतु इन्द्रदेव मेला प्रशासन से पता नहीं किस जनम की दुश्मनी निकाल रहे हैं।

kumbh crowdस्नान पर्व की तैयारियां चल रही थी कि शनिवार की बरसात ने मेला प्रशासन की परेशानी बढ़ा दी। बसंत पंचमी के अवसर पर हुए मूसलाधार बारिश और गंगा के बढ़े जलस्तर की वजह से मेला अस्त व्यस्त हो चुका था। मेले की रौनक को वापस लौटाने की कोशिश हो रही थी कि शनिवार को फिर से बारिश। स्नान घाट तैयार नहीं हो सके हैं। कल्पवासियों के शिविरों से पानी टपक रहा है। सड़कों और घाटों पर फिसलन बढ़ गई है। ऐसे में क्राउड मैनेजमेंट का काम काफी चुनौतापूर्ण हो जाता है।

प्रशासन के अनुसार मेले में बारिश का पानी निकालने के लिए पंप लगाए गए हैं।कीचड़ वाले रास्तों को चलने लायक बनाने के लिए बालू डाला जा रहा है। घाटों को माघी पूर्णिमा से पहले तैयार कर लिया जाएगा। सड़कों पर अतिरिक्त चकर्ड प्लेट लगवाकर उन्हें चौड़ा किया जाएगा। कमिश्नर देवेश चतुर्वेदी कह रहे हैं कि यह तैयारियां मेले में हो रही हैं।

स्नानार्थियों के लिए रैन बसरों के रूप में रेलवे स्टेशन के पास 22 स्कूल - कालेज खुलवा दिये गये हैं। हैदराबाद धमाकों के बाद चेकिंग अभियान बहुत तेज कर दिया गया है। बारिश और गंगा की कटान की वजह से अनेक घाटों का नामों निशान मिट गया है। माघी पूर्णिमा पर कुल 22 घाट बनाने का लक्ष्य है और 24 तारीख तक उसे पूरा करने की भी आशा है। लेकिन बसंत पंचमी की तरह 25 तारीख को भी पानी बरसे तो यह महत्वपूर्ण स्नान पर्व कैसा बीतेगा कहा नहीं जा सकता।

 

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