Thursday, January 18, 2018
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maghi poornima snan
महाकुंभ का पांचवा और महत्वपूर्ण स्नान पर्व माघी पूर्णिमा सकुशल सम्पन्न हुआ।संगम तट पर आज कई विदेशी भी दिखे। प्रशासन के अनुमान के अनुसार यहां आज एक करोड़ लोगों ने स्नान किया। पौष पूर्णिमा पर प्रारंभ हुआ एक मास का कल्पवास आज माघी पूर्णिमा के स्नान के पश्चात पूरा हुआ।

रविवार आधी रात से ही श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाना प्रारंभ कर दिया था। मकर संक्रांति , पौष पूर्णिमा ,मौनी अमावस्या और बसंत पंचमी के स्नान पर्व में आकर्षण का केंद्र साधू सन्यासी थे। आज के स्नान पर्व में सिर्फ आम श्रद्धालु और कल्पवासी संगम में डुबकी लगाते नजर आए। दो दिन पहले शनिवार को हुए बारिश को देखकर सभी को आशंका थी कि कहीं आज भी बारिश न हो जाए। परंतु आज मौसम सुहावना था और धूप खिली थी। मेला क्षेत्र में चप्पे चप्पे पर सुरक्षा का तगड़ा बंदोबस्त था लेकिन कल्पवासी और श्रद्धालु संगम में इस सुहावने मौसम में स्नान करने का मजा लूट रहे थे। ऐसा लग रहा था मानो एक माह से संगम तट को घर बनाने के बाद जाने से पहले हर कसर पूरी कर रहे हों। 

सूर्य के उत्तरायण होने के बाद पड़ रही पूर्णिमा पर संगम स्नान का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस अवसर पर करोड़ों देवी देवता भी संगम में स्नान करते हैं।

गंगा और यमुना के विभिन्न घाटों पर स्नान करने के पश्चात कल्पवासियों ने शिविरों में पूजा अर्चना की। संक्रांति से संक्रांति तक कल्पवास रखने वाले कुछ कल्पवासी भी आज स्नान पर्व में डुबकी लगाते नजर आए। पूछने पर बताया कि माघी पूर्णिमा के स्नान के लिए ही रूके थे।

कल्पवासियों ने पूजन के बाद जौ के पौधे शिविर में ही विसर्जित कर दिये और कल्पवास के प्रारंभ में जो तुलसी का पौधा लगाया था वह उनके साथ घर जाएगा।

poornima crowd

रविवार रात 12 बजे से ही लोग संगम तट पर जमा होने लगे थे लेकिन आज यहां साधूओं की भीड़ न होने की वजह से आम श्रद्धालुअें को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। प्रशासन ने आज भी शाही स्नान जैसी ही व्यवस्था की थी। घाट पर महिला सुरक्षाकर्मी भी दिखीं। हालंकि चेजिंग रूम न होने की वजह से महिलाओं को कुछ दिक्कत भी उठानी पड़ी। मेले में चार पहिया वाहनों पर रोक लगा देने के कारण श्रद्धालुओं को धक्का मुक्की नहीं करनी पड़ी। 

स्नान के पश्चात पूजन के बाद अब कल्पवासी घरों को लौटने लगे हैं।कुछ कल्पवासी मंगलवार को रवाना होंगे। यानि कि बसंत पंचमी के स्नान के बाद कुंभ मेले की रौनक अखाड़े चले गए और अब आज के बाद कलपवासियों ने भी जाना प्रारंभ कर दिया है। कुंभ मेले की रौनक तो काफी कम हो जाएगी । 10 मार्च महाशिवराति्र के स्नान के पश्चात 2013 का महाकुंभ समाप्त हो जाएगा। बारह साल बाद प्रयाग की धरती पर फिर से ऐसी रौनक देखने को मिलेगी पर हम उम्मीद कर सकते हैं कि इस बार की गलतियां तब नहीं दोहराई जाएंगी।

 

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