Sunday, November 19, 2017
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snan

महाकुंभ 2013 पूरी तरह से ऐतिहासिक बन चुका है। जिस तरह से महाकुंभ के हर पवित्र स्नान तिथियों के दिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी, वो रिकर्ड माघ पूर्णिमा के स्नान के दिन भी बना रहा। तीर्थराज प्रयाग में चल रहे महाकुंभ मेले के पांचवें स्नान माघी पूर्णिमा पर पवित्र डुबकी लगाने के लिए सोमवार को संगम तट पर देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।

शाही स्नान न होने की वजह से जहां आम श्रद्धालु आसानी से संगम में डूबकी लगा पाए वहीं प्रशासन को भी ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। हालांकि प्रशासन ने आम श्रद्धालुओं को स्नान कराने और संगम तक पहुंचाने के लिए ठीक वही व्यवस्था कर रखी थी जो अब से पहले के शाही स्नान के दौरान होते आ रहे थे। यही वजह थी कि रात के 12 बजे श्रद्धालु संगम तट पर पहुंचने लगे। प्रशासन इसके लिए भी पूरी तरह तैयार था।

स्नान से एक दिन पहले साफ-सफाई से लेकर पेय जल की सुविधा पूरी तरह से दुरूस्त हो गई थी। स्नानार्थियों के लिए आवश्यक सूचनाएं भी एक दिन पहले से ही उदघोषित की जाने लगी थी। घाट पर महिला सुरक्षाकर्मियों ने मोर्चा संभाल लिया था। आने जाने के रास्तों पर अद्र्धसैनिक बल के जवान तैनात किए गए थे, जो मेले के लिए निर्देशित नियमों का सख्ती से पालन कराने में लगे हुए थे।

मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं को तकलीफ न हो इसे देखते हुए, स्नान से एक दिन पहल से ही मेला क्षेत्र में चार पहिया वाहनों के परिचालन पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई थी। इसका असर मेला क्षेत्र में साफ नजर आया। स्नानार्थी बिना किसी धक्का-मुक्की के घाट पर पहुंच रहे थे, बारी-बारी से स्नान कर रहे थे। मां गंगा की पूजा अर्चना कर रहे थे और अविलंब घाट छोड़ रहे थे।

इस दौरान बस और रेलवे स्टेशन पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मौजूद थी। प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जत्थों में श्रद्धालुओं को संगम की ओर जाने दिया, मेला क्षेत्र में चार पहिया वाहन के परिचालन पूरी तरह बंद रही। उधर मौनी अमावस्या के दिन हुए हादसे से सबक लेते हुए रेलवे ने काफी संख्या में विशेष रेलगडि़यां चलाई, तो रोडवेज ने लगभग 4 हजार बसों का बंदोबस्त किया है। यही नहीं स्टेशन पर यात्रियों का दबाव बढ़ने पर बीच-बीच में उन्हें मेला क्षेत्र में रूकने के निर्देश भी प्रसारित किए जा रहे है। कल्पवासियों को वापस जाने के लिए प्रशासन ने अलग-अलग रूटों की व्यवस्था कर रखी थी। क्योंकि माघ पूर्णिमा के स्नान के साथ ही उनका एक महीने से चला आ रहा कल्पवास भी खत्म हो जायेगा। माघी पूर्णिमा का स्नान सकुशल सुव्यवसिथत ढंग से सम्पन्न हो गया।

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