Friday, November 17, 2017
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मौनी अमावस्या के दिन संगम में डुबकी लगाने के पश्चात श्रद्धालुओं की भीड़ घर वापसी के लिए जंक्शन पहुंची जहां एक हादसे में 36 लोगों की जान चली गई और 2 लोगों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस हादसे की न्यायिक जांच प्रारंभ हो गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व जज ओंकारेश्वर भटट ने मंगलवार 26-02-2013 को अपनी टीम के साथ हादसे से जुड़े तथ्यों की जानकारी ली।

टीम ने सुबह लगभग साढ़े 11 बजे स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल के वार्ड नंबर 2 में भर्ती घायलों से पूछताछ कर जानकारी ली। जिन शवों की शिनाख्त नहीं हो सकी उनके बारे में अस्पताल प्रबंधन से जानकारी ली गई। लगभग 3 बजे जांच टीम रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 6 के फुट ओवरबि्रज पर पहुंची। न्यायमूर्ति भटट ने रेलवे अधिकारियों से बात चीत की और घटना स्थल को बारीकी से देखते हुए जंक्शन पर उपलब्ध सुविधाओं का अवलोकन किया। न्यायमूर्ति भटट ने डयूटी पर तैनात अधिकारियों के उत्तरदायित्व के बारे में जानकारी ली।

इस हादसे के बाद मुख्य मंत्री अखिलेश यादव ने इलाहाबाद दौरा किया था और जंक्शन पर मौजूद भारी भीड़ को हादसे की वजह मानते हुए अपने अधिकारियों को क्लीन चिट दे दी थी। रेल मंत्री पवन बंसल ने भी भीड़ को हादसे की वजह मानते हुए रेलकर्मियों को कलीन चिट दे दी थी। माना कि भीड़ अधिक थी लेकिन भीड़ को नियंति्रत करने का काम किसका था ? अगर हर किसी को कलीन चिट मिल गई तो हादसे का जिम्मेदार क्या भीड़ है ?अब उम्मीद की जा सकती है कि असली दोषी सामने आए।

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