Sunday, November 19, 2017
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kumbh mela beautyमंडलायुक्त देवेश चतुर्वेदी ने दस दिनों में कुंभ नगरी को वाइंड अप करने के निर्देश दे दिये हैं। गर्मी प्रारंभ हो चुकी है अगर समय पर वाइंड अप नहीं किया तो शहर में संक्रामक बीमारीयों के फैलने का खतरा है। गंगा के किनारे बसे मुहल्लों में मकिखयां बहुत बढ़ गई हैं। स्वास्थ्य विभाग को शौचालयों के लिए खोदे गये गडढ़ों को जल्द से जल्द बंद करने के निर्देश दे दिये गये हैं। पानी जमा करने के लिए जल निगम द्वारा खोदे गये तालाबों को भी बंद करने का आदेश दे दिया गया है। मेला प्रशासन सबसे पहले सबसे दूर के सेक्टरों -6 ,7 ,और 8 को वाइंड अप कर रहा है।

हर चीज जो प्रारंभ होती है वह समाप्त भी होती है। कुंभ भी प्रारंभ हुआ। शहर में काफी हलचल रही और अपने समय से मेला खत्म भी हो गया। करोड़ों लोगों ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई। कुंभ में कुछ विवादित मामले भी सामने आये। 

शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य स्वामी परिपूर्णानंद मेला प्रारंभ होने से पहले 1 जनवरी को रहस्यमयी परिसिथतियों में गायब हो गये और कुंभ खत्म होने के बाद भी अब तक नहीं मिले। पुलिस का कहना है कि वह कहीं चले गये हैं। शंकराचार्य के शिष्यों का कहना है कि प्रशासन ने उनका अपहरण करके उन्हें कहीं छिपा दिया है। वह शंकराचार्य के चतुष्पद की मांग को मानने एवं शंकराचार्य को वापस बुलाने की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे थे।

महामंडलेश्वर परिषद बनाना कुछ को भारी पड़ गया। 8 फरवरी की रात को महामंडलेश्वर परिषद बनाने वाले कुछ महामंडलेश्वरों को बर्खास्त कर दिया गया। उसमें जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर पायलट बाबा भी हैं। ऐसा निर्णय कुंभ में पहली बार लिया गया। इतने बड़े मेले में जहां साधू , संत , गृहस्त , केवल मौज मस्ती करने वाले , कल्पवासी , सभी संप्रदाय के लाखों करोड़ों लोग आये थे वहां कुछ विवाद तो होना ही था और हुआ भी। आज के लिए हम विवादों का दामन छोड़कर हम आगे बढ़ते हैं।

पर्यटन विभाग ने श्रद्धालुओं की मदद के लिए प्रशिक्षित गाइडों की व्यवस्था की थी। हरे रंग की जैकेट और इंक्रेडेबल इंडिया तथा अतिथि देवो भव: लिखी टोपी पहने यह गाइड लोगों को रास्ता दिखाते देखे गये। 

हावर्ड विश्वविधालय की टीम शोध के लिए यहां आई। इससे भी बड़ी बात यह है कि हावर्ड विश्वविधालय ने कुंभ को शोध का विषय वस्तु समझा। विदेशी प्रोफेसर और छात्र ,छात्राओं की टीम ने काम के साथ साथ खूब मौज मस्ती भी की और कुम्भ मेले को देखकर बहुत प्रभावित भी हुए। 

कुंभ में जहां पूजा पाठ का माहौल था। वहीं 26 जनवरी को कुंभ नगरी देश भकित में रंगी नजर आयी। वहां साधू ,संत , आम श्रद्धालु और अधिकारियों की उपसिथति में तिरंगा फहराया गया। एक संस्था ने 64 मीटर लंबा तिरंगा भी बनाया था।

कई बालीवुड सितारे भी कुंभ में डुबकी लगाने आए। कई तरह की अजीबो गरीब चीजें भी देखने को मिली जैसे सलकीन अहमद की सात फिट लंबी बांसुरी , पंजाब के रोपड़ जिले के मस्ताना बाबा की 2000 मीटर कपड़े से बनी 80 किलो वजन की पगड़ी ,राजस्थान के रंग बिरंगे तिरछी टोपी वाले बाबा।

इतने बड़े मेले में जहां एक साथ इतने अधिक लोग हों वहां देश के मौजूदा हालात में सबसे ज्यादा डर आतंकवादियों का था। एक बार तो यह भी खबर आई कि मेले में आतंकवादी घुस गये हैं। लेकिन प्रशासन ने सुरक्षा की ऐसी व्यवस्था की थी कि आतंकवादी तो क्या उसकी परछाई भी मेले में घुस नहीं पायी और बिना डर के लोगों ने मेले का आनंद उठाया। मेले की सुरक्षा के लिए शहर वासियों को बहुत परेशानियां झेलनी पड़ी लेकिन हम इलाहाबादवासी कुंभ मेले के लिए हंसते हंसते सब झेल जाते हैं।

 

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