Friday, November 17, 2017
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kumbh packup
कुंभ मेला समाप्त होने पर रूट डायवर्जन भी खत्म हो गया। शहर वासी अब कहीं भी खुलकर आ जा सकते हैं। 14 जनवरी 2013 से 15 मार्च 2013 तक इलाहाबाद आने जाने के लिए कुंभ मेला सरचार्ज लगाने का निर्णय रेलवे ने लिया था। यह सरचार्ज 5-20 रू प्रति व्यकित था। कल 14 मार्च रात 12 बजे से यह सरचार्ज भी खत्म हो जाएगा। आज से इलाहाबाद जंक्शन पर पहुंचने के लिए बंद किये गये सभी रास्ते खोल दिये गये हैं।शहर अब धीरे धीरे नार्मल होता जा रहा है। लेकिन कुम्भ मेले की यादों को इतनी जल्दी भूलना जरा मुशिकल है।

कुछ ऐसे मामले भी सामने आए जिन्हें जल्दी क्या बाद में भी भूलना मुशिकल होगा।कुंभ मेले में हर अखाड़े के कई महामंडलेश्वर बने। महिलाओं को भी यह पद मिला। लेकिन सबसे विवादित रहा स्वामी नित्यानंद का महामंडलेश्वर बनना।सेक्स स्कैंडल से चर्चा में आए स्वामी नित्यानंद को महानिर्वाणी अखाड़ा ने गुप चुप तरीके से महामंडलेश्वर की उपाधि दे दी।

अखाड़ा परिषद के गठन को लेकर भी इस कुंभ में काफी हलचल रही लेकिन कोर्ट ने महंत ज्ञानदास को ही अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष नियुक्त किया और अखाड़ा परिषद का फिर से गठन नहीं हो सका।

इस कुंभ में अनेक नागा सन्यासी बनें। अनेक महिलाएं भी सनयासी बनीं।
मेले में कई बालीवुड हसितयों और राजनीतिज्ञों के भी दर्शन हुए। इन्होने भी संगम में डुबकी लगाई।2011 के वल्र्ड कप के दौरान अपने बयान की वजह से चर्चा में आई माडल पूनम पांडे सलवार कमीज पहने कुंभ में देखी गईं। इसके अलावा हेमा मालिनी ,शिल्पा शेटटी ,प्रिटी जिंटा, जूही चावला ,एकता कपूर ,आशुतोष राणा ,राजपाल यादव ,मुकेश खन्ना ,मनोज तिवारी , रवि किशन , इमरान हाशमी इत्यादि ने भी डुबकी लगाई। राजनीतिज्ञों में लोक सभा अध्यक्ष मीरा कुमार, राज्यपाल बी एल जोशी ,केंद्रीय मंत्री श्री प्रकाश जायसवाल , कुमारी शैलजा ,राजीव शुक्ल , असम के मुख्य मंत्री तरूण गोगोई , उत्तराखण्ड के मुख्य मंत्री विजय बहुगुणा , हरियाणा के मुख्य मंत्री भुपेंद्र सिंह हुडडा ,भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ,सपा नेता शिवपाल सिंह यादव ,एन डी तिवारी,अमर सिंह इत्यादि आए।

कुंभ में विहिप का धर्म संसद सियासत की संसद बनकर रह गई। साधू संत भी गुजरात के मुख्य मंत्री नरेंद्र मोदी को अगला प्रधानमंत्री बनाने की वकालत करते नजर आए। संत समाज ने तो नरेंद्र मोदी को अपना समर्थन भी दे दिया। पहले सरकार और बाद में प्रकृति की वजह से कुंभ में धर्म गुरू दलाई लामा के दर्शन न हो सके और आम जनता से उनके सीधे संवाद का कार्यक्रम भी न हो सका।

वहीं कुंभ में तरह तरह के बाबा आए। किसकी बातों में कितनी सच्चाई थी यह तो कहना मुशिकल है। मध्य प्रदेश से कंप्यूटर बाबा आए जो हमेशा लैपटाप के साथ ही नजर आते थे। भक्तों के अनुसार उनका दिमाग कंप्यूटर से भी तेज चलता है।एक बाबा ऐसे भी थे जो अपना एक हाथ हमेशा उपर उठाकर रखते हैं तो एक बाबा हमेशा ही खड़े रहते हैं। झपकी भी वह खड़े खड़े ही लेते हैं। सोने के आभूषणों से लदे दिल्ली के गोल्ड बाबा का जलवा तो देखते ही बन रहा था। जिन्होने काली कमली वाले बाबा के दर्शन किये हैं वह उन्हें कभी नहीं भूल पाएंगे। उनके दस उंगलियों में दस अंगूठियां और मालाओं से ढ़का शरीर।धातुओं के अलावा वह जानवरों के खाल और हडडी के बने आभूषण भी पहने हुए थे ,बाप रे बाप। दिल्ली के मचान वाले बाबा हमेशा मचान पर ही रहते हैं।

तिरूपति बालाजी मंदिर की तर्ज पर बालाजी के मंदिर का नकल कुंभ मे बनाया गया था। परंतु यह इतनी अच्छी तरह से बना था कि जहां बारिश की वजह से सब कुछ तहस नहस हो गया , कितने अखाड़ों को नुकसान पहुंचा वहीं तिरूपति बालाजी का मंदिर सिर उठाए खड़ा रहा। एक अनोखा बैंक खुला जहां रूपये नहीं राम नाम जमा किया जाता था।इसका नाम था राम नाम बैंक। इसे परलोक सुधारने वाला बैंक भी कह सकते हैं। यहां सभी धर्म के लोगों ने खाता खोला।

भारत की ऐसी कोई चीज नहीं थी जो कुंभ में न बिकी हो। हर प्रदेश की वस्तुओं के स्टाल वहां लगे थे और छोटे व्यापारी भी अपनी दुकान लगाने आए थे।व्यापारियों को इस बार कुंभ में बारिश , बाढ़ की वजह से नुकसान भी उठाना पड़ा है। 35 किलोमीटर क्षेत्र पर फैले मेले को कुछ पन्नों में समेटना नामुमकिन है। जितना भी प्रयास करें कोई न कोई पहलू छूट ही जाता है। इसलिए यह खेद दिल में लिए ही एकिटव इंडिया की महा कुंभ टीम की ओर से मैं आपसे विदा लेती हूं।

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