Friday, November 24, 2017
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golden bok of awards

  • वाजिद ने ‘चंपा’ पर खर्च किए पांच लाख रुपए, कद्रदान ने ऑफर दिया 10 लाख का
  • ‘गोल्डन बुक ऑफ र्वल्ड’ के विशेषज्ञों ने वाजिद को वर्ष 2012 में ‘गोल्डन बुक ऑफ र्वल्ड रिकॉर्ड’ बनाने वालों में शामिल कर प्रमाण पत्र देकर नवाजा और 28 हजार रुपए की राशि भेंट की

इंदौर। इंदौर के एक युवा कलाकार वाजिद खान ने कुछ अलग करने का ठाना था और जल्दी ही उसकी क्रिएटिविटी रंग लाई और सात समंदर पार अमेरिका में भी उसकी कला की चर्चा होने लगी। ‘नेल आर्ट’ से मशहूर हुए वाजिद ने ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ बनाने के बाद नई क्रिएटिविटी के तौर पर पेश किया है। चंपा को, दरअसल चंपा एक घोड़ी का नाम है जिसे कलाकार ने मोटर गाड़ियों के पुराने पार्ट्स से बनाया है। इसमें दो पहियों के साथ ही बुलेट, मर्सिडीज एवं बीएमडब्ल्यू जैसी मंहगी कारों के पुर्जे भी जोड़े गए हैं। करीब पांच लाख रुपए में तैयार की गई घोड़ी की इस आकृति को बनाने में वाजिद को आठ महीने से अधिक वक्त लगा। घोड़ी के साथ एक जॉकी ‘घुड़सवार’ को भी जोशीले अंदाल में दिखाया गया है।

‘नेल आर्टिस्ट’ वाजिद खान ने बताया कि पुरानी मोटर गाड़ियों के पार्ट्स एकत्रित करने के लिए वह कबाड़ियों की दुकानों पर भटकता रहा और उसने कुछ उपयोगी पार्ट्स खरीदें। वाजिद के अनुसार, जब उसने अपनी आवश्यकता के अनुसार पुरानी गाड़ियों के पुज्रे जुटा लिए तो एक सफेद दीवार पर नटबोल्ट से कसना शुरू कर दिया। चंद महीनों में घोड़ी ने आकार ले लिया तो उसका प्यारा सा नाम रखा ‘चंपा’।

वाजिद ने बताया कि घोड़ी और जॉकी को फास्ट मूवमेंट में दिखाना बड़ी चुनौती थी इसके लिए पहले ऑटो पार्ट्स को ब्लैक कोटेड किया फिर इसको दीवार का केनवास की तरह इस्तेमाल किया तो कलाकृति में जिंदगी के रंग निकल आए। इस सारे कार्य पर पांच लाख रुपए खर्च हुए। उन्होंने बताया कि इस कलाकृति को दर्शकों के लिए फिलहाल इंदौर में प्रगति विहार कॉलोनी में बायपास पर एक बंगले की दीवार पर लगाया गया है और अब इसका एक कद्रदान भी मिल गया है, जिसने इसे 10 लाख रुपए में खरीदने की इच्छा जताई है। खरीदार अल्तमश खान के अनुसार, वह इसे मुंबई भेजेगा और वहां से यह नायाब कलाकृति अमेरिका भेजी जाएगी। जहां एक प्रदर्शनी में रखी जाएगी फिर इसकी बिक्री होगी या किसी आर्ट गैलरी में स्थापित की जाएगी। मूल रूप से मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले के एक छोटे से ग्राम सोनगरी के निवासी वाजिद ने बताया कि उसके पास किसी शैक्षणिक संस्थान से कला की कोई डिग्री नहीं है और न ही परिवार में कला के प्रति विशेष रूझान है। पिता मंदसौर में एक होटल चलाते हैं लेकिन उसके दिमाग में कुछ नया करने का जुनून सवार हो गया और विभिन्न कलात्मक वस्तुओं एवं पेंटिंग देखने के बाद उसने कीलों से फोटो बनाने का कार्य वर्ष 2004 से शुरू किया। उसने कांग्रेस के युवा नेता राहुल गांधी का भी इसी पद्धति से फोटों बनाया और उन्हें भेंट किया जो आज भी दिल्ली में युवक कांग्रेस के कार्यालय में लगा है। उन्होंने बताया कि इसी प्रकार साई बाबा का भी फोटो बनाया। वाजिद ने ‘नेल आर्ट’ से महात्मा गांधी का चित्र भी बनाया। इस चित्र की चर्चा होने पर मुंबई से ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड’ का विशेषज्ञों का एक दल इंदौर पहुंचा तथा बारीकी से उसकी कला का अध्ययन करने के उपरांत उसे वर्ष 2012 में ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ बनाने वालों में शामिल कर प्रमाण पत्र देकर नवाजा गया साथ ही 28 हजार रुपए की राशि भी भेंट की तब ‘नेल आर्ट’ कलाकार वाजिद खान का ड्रीम प्रोजेक्ट बन गया जिसकी परिणिति ‘चंपा घोड़ी’ के रूप में सामने आया।

वाजिद ने बताया कि अब उसका एक नया सपना है कि रोशनी के माध्यम से आकाश में गांधी जी का चित्र बनाना है। वाजिद ने बताया कि इसके लिए 12 से 15 हजार ‘सीएफएल’ लाइट की जरूरत पड़ेगी जिसे इंदौर में बिजली के खंबों अथवा अन्य खंबों पर फिट कर उसका मुंह आकाश की ओर करना है। इन लाइटों पर रंग-बिरंगी पन्नियां लगाई जाएंगी। रात्रि में वायुयान से या हेलीकॉप्टर से देखने पर दर्शकों को आकाश में गांधी जी दिखाई देंगें।

स्रोत: रास्ट्रीय सहारा

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