Friday, November 24, 2017
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वैश्विक बाजार में बढ़ते भाव, डालर के मुकाबले रुपए में कमजोरी और त्योहारी मांग को देखते हुए सोने में अभी कुछ माह तक तेजी का रुख जारी रहेगा। यदि आप शादी-ब्याह के लिहाज से अपने इस्तेमाल के लिए सोना खरीदना चाहते हैं तो मौजूदा भाव पर ही खरीदना पड़ेगा। लेकिन आने वाले दिनों में सोने पर आयात शुल्क घटने और रुपया मजबूत होने पर सोने के दाम काफी हद तक नीचे आ सकते हैं

        चालू खाते का घाटा कम करने के लिए सरकार सोने का आयात सीमित करने के पूरे प्रयास कर रही है लेकिन भारतीयों के इस पीली धातु के प्रति विशेष लगाव के कारण उसे सफलता नहीं मिल पा रही है। जून में सोना 25000 रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर था। बहुत से लोगों ने निचले स्तर पर खरीदारी का फायदा उठाया लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी थे जिन्हें लगा कि सोने के दाम अभी और गिरेंगे। इसके उलट अगस्त में सोना 34000 रुपए के स्तर तक पहुंच गया। दरअसल भारत में सोने की मांग पूरी तरह आयात पर निर्भर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की बढ़ती कीमत, रुपए में कमजोरी व आयात शुल्क में वृद्धि ऐसे कारण हैं जिनकी वजह से सोने के दाम तेजी से बढ़ते चले गए। वैश्विक बाजार में बढ़ते भाव, त्योहारी मांग व शादी-विवाह के अवसर को देखते हुए आने वाले कुछ महीनों के लिए सोने में तेजी बरकरार रह सकती है। यदि आप शादी-ब्याह के लिहाज से अपने इस्तेमाल के लिए सोना खरीदना चाहते हैं तो ज्यादा इंतजार करने की जरूरत नहीं है।

निवेशकों के लिए सलाह

        सोना हमेशा से निवेश का एक अच्छा विकल्प रहा है। सोना आपके पोर्टफोलियो में ग्रोथ के साथ-साथ पोर्टफोलियो की सुरक्षा व स्थिरता बनाए रखने में मददगार होता है। खास बात यह है कि वर्तमान में सोने में तेजी के पीछे डालर की बढ़ती कीमत व आयात शुल्क में इजाफा है। जनवरी 2012 में सोने पर आयात शुल्क दो फीसद था जो फिलहाल 10 फीसद है। यदि आने वाले दिनों में सरकार सोने पर शुल्क कम करती है और रुपया मजबूत होता है तो सोने की कीमत काफी हद तक नीचे आ जाएगी। ऐसे में निवेशकों को सोने में एकमुश्त निवेश से बचना चाहिए। बेहतर रिटर्न के लिए किस्तों में निवेश करें।

निवेश के विकल्प

        आपके पास सोने में निवेश के कई विकल्प हैं। आप पारंपरिक तरीके से ज्वेलर की दुकान से सोना खरीद सकते हैं। लेकिन इस प्रक्रिया में आपको सोने की शुद्धता व उसके रखरखाव का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। वैसे तो सोने की खरीद-फरोख्त बिना बिल के यानी गैर कानूनी तरीके बहुत होता है। लेकिन आपको सलाह है कि अपने ज्वेलर्स से बिल जरूर मांगें ताकि भविष्य में आप इसे बेचते हैं तो क्रय मूल्य को विक्रय मूल्य से घटाकर टैक्स में छूट पा सकते हैं। सोने में निवेश के दूसरे विकल्प ईटीएफ व गोल्ड म्यूचुअल फंड स्कीमें में भी हैं। गोल्ड ईटीएफ में निवेश के लिए आपके पास डीमैट अकाउंट होना अनिवार्य है। लेकिन गोल्ड म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए डीमैट खाते की जरूरत नहीं होती। आप एसआईपी के जरिए न्यूनतम 1000 रुपए प्रतिमाह के हिसाब से गोल्ड आधारित म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं। म्यूचुअल फंड कंपनी आपका पैसा शुद्ध सोने में निवेश करती हैं। इससे सोने के बढ़ते मूल्य का आपको पूरा लाभ मिलता है। गोल्ड ईटीएफ या गोल्ड आधारित म्यूचुअल फंड में निवेश करने पर आपको यूनिट्स आवंटित होती हैं। एक यूिनट एक ग्राम शुद्ध सोने के बराबर होती है। यह ओपन एंडेड म्यूचुअल फंड स्कीम होती है इसलिए आप कभी भी अपनी यूनिट्स बेचकर पैसे का भुगतान ले सकते हैं। गोल्ड आधारित म्यचुअल फंड में निवेश करना पारंपरिक तरीके से वास्तविक सोने में निवेश के मुकाबले काफी सुरक्षित व आसान है।

सोने में निवेश पर टैक्स

        वास्तविक सोने में निवेश वैल्थ टैक्स के दायरे में आता है। यदि आपकी कुल नेटवर्थ 30 लाख रुपए से ज्यादा हो जाती है तो 30 लाख से ऊपर की राशि पर एक फीसद के हिसाब से वैल्थ टैक्स अदा करना पड़ता है जबकि गोल्ड ईटीएफ व गोल्ड आधारित म्यूचुअल फंड वैल्थ टैक्स से मुक्त है। वास्तविक सोने में तीन साल से कम अवधि का निवेश शार्ट टर्म कैपिटल एसेट माना जाता है जबकि इससे अधिक का निवेश लांग टर्म कैपिटल की श्रेणी में आता है। वहीं गोल्ड ईटीएफ व गोल्ड आधारित आधारित म्यूचुअल फंड में एक साल से अधिक का निवेश लांग टर्म कैपिटल एसेट माना जाता है। इस निवेश को बेचने पर आपको कास्ट इंफ्लेशन इंडेक्स का लाभ मिलता है। इससे आपको कुल लाभ पर लगने वाले आयकर से कम कर चुकाना पड़ता है।

        कुल मिलाकर यदि आप सोने में निवेश करना चाहते हैं तो गोल्ड ईटीएफ या फिर गोल्ड आधारित म्यूचुअल फंड में निवेश आपके लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है।

(लेखक पंकज मठपाल, आप्टिमा मनी मैनेजर्स के एमडी हैं)

साभार: राष्ट्रीय सहारा

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