Wednesday, November 22, 2017
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fixed deposits

रुपए में गिरावट थामने के लिए रिजर्व बैंक के सख्त कदमों से बैंकों के पास नकदी की कमी हो गई है। अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए बैंक ऊंची दरों पर पूंजी जुटा रहे हैं। एक साल तक की एफडी पर 9.5 फीसद तक का आफर दिया जा रहा है। रुपए में स्थिरता आने पर ब्याज दरों में नरमी आना तय है। ऐसे में एफडी में निवेश का यह बढ़िया मौका है

        डॉलर के मुकाबले रुपए की गिरावट को थामने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने कई सख्त कदम उठाए हैं। इससे बैंकों के पास नकदी की तंगी हो गई है। अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए बैंक अब बाजार से ऊंची दरों पर नकदी उठा रहे हैं। संकट की घड़ी में ऊंची दरों पर ज्यादा पूंजी जुटाने के लिए बैंकों के बीच प्रतिस्पर्धा छिड़ गई है। देश के प्रमुख बैंक एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, ओबीसी और आईडीबीआई बैंक अपनी जमा दरें बढ़ा चुके हैं। इससे फिक्स्ड डिपाजिट (एफडी) पर ब्याज दरें आकर्षक हो गई हैं। कई बैंक एक साल एफडी पर सालाना नौ फीसद से ज्यादा तक ब्याज दे रहे हैं। शेयर बाजार में भारी अनिश्चितता के बीच इक्विटी आधारित योजनाओं में निवेश पर जोखिम बढ़ गया है। इस हालात में बैंक एफडी सुरक्षित निवेश और ज्यादा रिटर्न के लिए बढ़िया अवसर है।

चूकें न मौका

        एक समय बैंक एफडी का मतलब रकम को डबल करने से होता था लेकिन अब आप सात दिन की एफडी भी करा सकते हैं जिस पर आकर्षक ब्याज मिल रहा है। आमतौर पर बैंक एफडी पर बड़ी अवधि में ज्यादा रिटर्न देते थे लेकिन फिलहाल इसके उल्टा देखने को मिल रहा है। एक्सिस बैंक ने 14 दिन से 29 दिन की सावधि जमा पर ब्याज दर चार से बढ़ाकर आठ फीसद कर दी है। देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक एसबीआई अन फिक्स्ड डिपाजिट स्कीम के तहत सात से 60 दिन की एफडी पर नौ फीसद ब्याज दे रहा है जबकि 61 दिन से अधिक और एक वर्ष से कम की जमा पर 8.25 फीसद ब्याज का आफर है। खास बात यह है कि इस रकम को आप सात दिन बाद कभी भी निकाल सकते हैं जिस पर कोई पेनाल्टी नहीं लगेगी। हालांकि बैंक की यह योजना एक करोड़ और उससे अधिक कमी जमा राशि के लिए है। कई बैंक छोटी रकम पर भी एक साल की एफडी पर 9.5 फीसद तक का ब्याज दे रहे हैं। हालांकि लंबी अवधि के लिए ब्याज दरें कम हैं। इससे संकेत मिलता है कि ऊंची दरों का दौर ज्यादा दिनों तक नहीं चलेगा। बाजार में स्थिरता आने पर ब्याज दरों में नरमी आएगी। ऐसे में एफडी पर ऊंचा रिटर्न हासिल करने का यह सही मौका है।

अवधि में रखें विविधता

        पिछले कई वर्षो से बैंकों की ब्याज दरों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो एक से डेढ़ साल में ही दरों में तीन फीसद का बदलाव आ जाता है। ऐसे में आप टुकड़ों में एफडी कराने पर जोर दें। यदि आप पांच लाख रुपए निवेश कर रहे हैं तो इन्हें एक-एक लाख के हिस्सों में 1, 2, 3, 4 और 5 साल के लिए फिक्स्ड कराएं। जैसे ही एक साल की एफडी मैच्योर हो, उसे फिर से निवेश कर दें। इसी प्रक्रिया को पांच साल तक अपनाते रहें। ऐसा करने से आपके पास हमेशा नकदी की तरलता बनी रहेगी। साथ ही आपके निवेश पर ब्याज दरों के उतार-चढ़ाव का संतुलन बना रहेगा।

जरूरत का रखें ध्यान

        एफडी कराते समय इस बात खयाल रखें कि भविष्य में आपको पैसों की कब जरूरत पड़ेगी क्योंकि लंबी अवधि की एफडी को समय से पहले तुड़वाने पर एक फीसद तक की पेनाल्टी चुकानी पड़ सकती है। ऐसे में यदि आपका बैंक दो साल के लिए 8.5 फीसद और पांच साल के लिए नौ फीसद की ब्याज दर का आफर दे रहा है तो आपके लिए दो साल वाला विकल्प बेहतर सावित हो सकता है। यदि आपने नौ फीसद वाला विकल्प चुना है और बीच में पैसे की जरूरत पड़ गई तो मुश्किल खड़ी हो सकती है। यदि आपने दो साल बाद एफडी तुड़वाई तो पेनाल्टी के बाद आपको आठ फीसद की दर से ही ब्याज मिलेगा जो दो साल के विकल्प से कम होगा। इसलिए आधा फीसद ब्याज के लालच में एक फीसद की पेनाल्टी देने से बचने की कोशिश करें।

साभार: राष्ट्रीय सहारा

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