Wednesday, November 22, 2017
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lok seva ayog front
इलाहाबाद । उत्तर प्रदेश में सरकारी सेवाओ की परीक्षा कराने वाली सबसे बड़ी संस्था राज्य लोक सेवा आयोग की कार्य प्रणाली पर एक बार फिर सवाल उठाने शुरू हो गए है । इस बार मामला है इसी आयोग की तरफ से कराई गई प्रांतीय न्यायिक सेवा परीक्षा  का है जिसके आयोग द्वारा बनाई गई प्रारम्भिक परीक्षा -2011 की मेरिट को इलाहाबद हाईकोर्ट ने गलत मानते हुए इसकी नए सिरे से मेरिट बनाने के आदेश दिए है ।
इस परीक्षा में पूछे गए  15 ऐसे सवाल गलत पूछे गए थे , जिसको लेकर  इसमें शामिल अभ्यर्थियो ने अदालत में इस परीक्षा की मेरिट को चुनौती दी थी । अदालत ने आयोग से तीन  हफ्ते के अंदर इस परीक्षा की नई मेरिट बनाकर मुख्य परीक्षा की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही है । 

 
राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा कराई गई एक और महत्वपूर्ण परीक्षा की मेरिट रद्द किये जाने के बाद लोक सेवा आयोग उत्तर प्रदेश की कार्य प्रणाली पर फिर उंगलिया उठने लगी है । इलाहाबद हाईकोर्ट ने इसी आयोग द्वारा कराई गई पीसीएस जे प्रारम्भिक परीक्षा -2011 के नतीजे रद्द कर दिए है और नए सिरे से इस परीक्षा की मेरिट बनाने के आदेश दिए है । 
 
इस परीक्षा में आयोग द्वारा बनाये गए प्रश्नपत्र में 15 ऐसे सवाल पूछे गए थे जिनके जवाबो के सभी विकल्प गलत थे । इस परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियो ने इन परिणामो को इलाहाबद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी । हाईकोर्ट ने मामले में जब राज्य लोक सेवा आयोग से जवाब माँगा तो आयोग ने भी स्वीकार किया कि उसकी तरफ से तैयार किये गए प्रश्नपत्र में 15 सवाल गलत थे । राज्य लोक सेवा आयोग के इसी जवाब को आधार बनाते हुए इलाहाबद हाईकोर्ट ने ये नतीजे रद्द कर दिए और आयोग को नए सिरे से इसकी मेरिट तैयार करने के आदेश दिए है । सरकारी नौकरियों के लिए परीक्षा आयोजित कराने वाली सूबे की सबसे बड़ी सांविधानिक संस्था पर इस लिए भी अब सवाल उठने  शुरू हो गए है  इसके पहले भी कई परीक्षाओ में ऐसे ही अनिययमितताए सामने आई जिसके बाद आयोग को बैक फुट पर जाना पड़ा था । 

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