Friday, November 24, 2017
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प्रदेश ही नहीं देश , दुनिया के कोने -कोने से टीकरमाफी आश्रम योग सीखने लोग आ रहे है लोग 

इलाहाबाद । इलाहाबाद की  श्रुति दुनिया की सबसे कम उम्र  की टीचर है जो अपनी उम्र  से साठ-सत्तर साल बड़े लोगों को योग-विद्या और योगासनों का पाठ पढ़ा रही है | सुबह की पहली किरण धरती पर पड़ने के पहले ही श्रुति अपने योग के क्लास पहुच जाती है कठिन से कठिन योगआसानी से लोगों को बताने |

श्रुति ने इसके लिए बाकायदा एक योग शाला भी खोल रखी है जिसमे वह अपना योगका क्लास देती है |  योग की जटिलताएं उसके  फायदे  उसका प्रैक्टिकल का तरीका नन्ही योग गुरु श्रुति इतनी आसानी से लोगों को बताती और लोगों को समझाती है कि शहर के अलावा दूसरे जिलों के लोग भी उसकी क्लास करने आते है । इस नन्ही योग गुरु का कहना है कि उसकी योग कि क्लास निशुल्क है और कोई भी यहाँ पर आ सकता है । साथ ही अपनी कक्षा में लोगों को ये सन्देश देना नहीं भूलती कि टी वी के देखकर लोग योग के आसनों कि बारीकियों को न सीखें नहीं तो लेने के देने पड़ जायेंगे ।


इलाहाबाद से तकरीबन दस किलोमीटर कि दुरी पर टीकरमाफी आश्रम, झूसी में यूँ तो वैदिक ऋचाओं के पाठ  और कर्मकांड साल भर चलते है लेकिन कोई चार साल ये आश्रम किसी और वजह से भी सुर्ख़ियों में है और वो है यहाँ कि नन्ही योग गुरु कि वजह से । अपने परिवार में सबसे छोटी और अपने माँ बाप कि दुलारी इस नन्ही योग गुरु का नाम है श्रुति । वेदों में श्रुति को वेद कहा जाता है वैसे ही अपने नाम कि ही तरह श्रुति को योग कि जटिलताओं का ज्ञान महज पांच साल में ही आश्रम में खेलते खेलते हो गया । आज श्रुति आठ साल कि हो चुकी है है और आलम ये है कि योग में उसको कठिन से कठिन माने जाने वाले चौरासी आसनों में महारत हासिल हो चुकी है  । कठिन से कठिन माने जाने वाले योग आसनों पर उसने ऐसी पकड़ बना ली जिसको लगाने में बड़े बड़े से योग गुरुओं को भी पसीने आ जाएँ । श्रुति कि इस विलक्षण प्रतिभा को आश्रम के आचार्य स्वामी हरिचैतन्य महाराज ने बचपन में देख लिया और उसी के बाद उन्होंने उसको योग कि शिक्षा दी । वही श्रुति का परिवार उसपर गर्व करता है । उनका कहना है कि उनकी बेटी कि पढ़ाई में तो रूचि है लेकिन योग कि वजह से उसका दुनिया भर में उसका इतना नाम हो रहा है उन्होंने इसकी कल्पना भी नहीं कि थी । 

कतार लगा कर बैठे ये साधू संत और लोग यहाँ किसी  आद्यात्मिक सम्मेलन में भाग लेने या प्रवचन सुनने के लिए यहाँ नहीं आये है बल्कि ये यहाँ रोज स्वस्थ जीवन जीने की कला सीखने आते है और वो भी दुनिया की सबसे छोटी योग गुरु से | क्या छोटे क्या बड़े क्या साधू और क्या संत,श्रुति कि योग कि पाठशाला में हर उम्र  के लोग आते  है । शहर और गाँव के लोग तो उनकी क्लास में आते है ही शहर के बाहर के  लोग भी अपने दर्द का इलाज ढूंढने उनकी क्लास कार्यशाला में आ रहे है । बड़े ध्यान और मन लगा कर ये लोग इस छोटी सी टीचर से योग का क्लास लेते है और स्वस्थ रहने का मूल मंत्र पाते  है | बीच बीच में अगर कोई ठीक  तरह से अपना आसन नहीं लगा पता तो ये नन्ही मास्टर जी अपने छोटे बड़े छात्रों को डांट भी लगाती है | लोगों का कहना है कि जब से उन्होंने यहाँ आना शुरू किया है वो अपने आप को निरोगी महसूस करने लगे है । कुछ तो ऐसे है जो दूसरे जिले से भी आये है और यहाँ रहकर इस नन्ही योग गुरु से योगासन कि कला सीख रहे है । 


हालाकि  श्रुति ने किसी तरह का योग दर्शन नहीं पढ़ा  है लेकिन अपने गुरु के मार्गदर्शन में वो अपना क्लास बाकायदा दे रही है | महज आठ साल कि इस नन्ही गुरु श्रुति कि  योग की पाठशाला सुबह 5.30 से शुरू हो जाती है। अभिवादन लेने के तुरंत बाद अपनी तोतली जबान से योग की क्लास शुरू करती है | कठिन से कठिन आसन को बड़ी आसानी से करने में बचपन से पारंगत हो चुकी श्रुति की पाठशाला सुबह और शाम तीस तीस लोगों कि है जिसमे वो  लोगों को योग की बारीकियां बताती  है और तो और इनकी पाठशाला में आने वाले हर उम्र के लोग है | श्रुति का कहना है की वो अपने छात्रों को रोज इसी तरह आसनों की बारीकियां समझाती है क्योंकि योग से ही लोग स्वस्थ जीवन की कल्पना कर सकते है | इसके साथ ही श्रुति उन लोगों को भी सन्देश देना नहीं भूलती जो टी वी देखकर योगाभ्यास करते है और बाबा रामदेव कि योग पर भी वो सवाल खड़ा करना नहीं भूलती । उनका कहना है की लोग गलत तरीके से योग का अभ्यास करते है जिसकी वजह से उनकी तकलीफ  कम होने कि बजाय उनके मर्ज को और  बढ़ा देती है । 

इस नन्ही योग गुरु कि पाठशाला के चर्चे अब देश भर में हो रहे है और अलग अलग प्रदेशों में जाकर श्रुति योग के दर्शन को बाकायदा बता और समझा रही है और तो और देश और दुनिया भर कि मीडिआ में वो चर्चा का विषय बनी हुई है । 

 

 

 

 

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