Tuesday, November 21, 2017
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test tube baby

अर्पित टेस्ट टयूब बेबी सेन्टर में उत्तर प्रदेश की प्रथम IMSI मशीन

इलाहाबाद : नि:सन्तान दम्पत्तियों के लिए विशेषकर ऐसे दम्पत्ति जो सन्तान प्रापित के लिए परखनली शिशु के माध्यम से उपचार कराकर निराश हो चुके हैं उनके लिए एक अच्छी खबर तथा नई आशा की किरण के रूप में अर्पित टेस्ट टयूब बेबी सेन्टर इलाहाबाद में प्डैप् सुविधा का समावेश केन्द्र के लिए एक नया मील का पत्थर है।


नि:सन्तानता अथवा बांझपन का अर्थ है, जब एक वर्ष तक नियमित रूप से बिना गर्भनिरोधक साधन का उपयोग किए दम्पत्ति के द्वारा सहवास के उपरान्त भी गर्भाधान या सन्तान उत्पत्ति न हो पाना प्राइमरी इन्फर्टिलिटी कहलाता है। बांझपन के उपचार हेतु परखनली शिशु एक उत्कृष्ठ विकल्प है जिसके अन्तर्गत महिला के अण्डाणु तथा पुरुष के शुक्राणु का संयोग शरीर के बाहर प्रयोगशाला में कराया जाता है तथा इस संयोग के फल स्वरूप बने भ्रूण को तीन से पांच दिन के अन्दर महिला के गर्भाशय में स्थानान्तरित कर दिया जाता है। स्थानान्तरण के पश्चात भ्रूण महिला के गर्भ में सामान्य गर्भस्थ शिशु की भांति ही वृद्धि करता है तथा प्रकृतिक रूप से शिशु का जन्म होता है। मुख्यत: परखनली शिशु का प्रयोग ऐसे दम्पत्तियों के लिए जिनमें पुरुष के शुक्राणुओं की संख्या अथवा गुणवत्ता ठीक न होने पर अथवा महिला के जननांगों में किसी रुकावट के कारण शुक्राणु और अण्डाणु का संयोग न हो पाने की सिथति में अथवा स्त्री के शरीर में अण्डाणु न बनने आदि की सिथति में किया जाता है। ऐसे दम्पत्तियों के लिए परखनली शिशु एक बेहतर उपचार विकल्प है।

अर्पित टेस्ट टयूब सेन्टर की निदेशिका तथा वरिष्ठ बांझपन एवं IVF विशेषज्ञा डा॰ वन्दना एस. बन्सल के अनुसार परखनली शिशु (IVF) उपचार में पुरुष के शुक्राणुओं के आकार प्रकार तथा गतिशीलता का अत्यंत महत्व होता है तथा उपचार की सफलता में इसका बहुत बड़ा महत्व है। इसी महत्व को दृषिटगत रखते हुए सफलता प्रतिशत बढ़ाने तथा ऐसे पुरुषों का भी उपचार करने के दृषिटकोंण से जिनके वीर्य में शुक्राणु सम्बन्धी दोष होते हैं, अथवा ऐसी महिलाएं जिन्हें बार-बार गर्भपात हो जाता है के उपचार के उद्देश्य से जीवन ज्योति हासिपटल, इलाहाबाद की इकाई अर्पित टेस्ट टयूब बेबी सेन्टर में उत्तर प्रदेश की पहली प्डैप् (इंट्रासाइटोप्लाजिमक मार्फोलाजिकली सेलेक्टेड स्पर्म इंजेक्शन) मशीन लगाई गई है।

इंट्रासाइटोप्लाजिमक मार्फोलाजिकली सेलेक्टेड स्पर्म इंजेक्शन (IMSI) एक ऐसी विशेष मशीन है जिसके द्वारा IVF के दौरान विशेषज्ञ चिकित्सक, उच्च कोटि के शुक्राणु का चयन कर सकता है। IMSI का उपयोग ऐसे शुक्राणु को चुनने के लिए किया जाता है, जिसका आकार-प्रकार तथा जिसमें जिसमें जिनेटिक क्वालिटी उत्तम होती है को चुनने के लिए किया जाता है। इंट्रासाइटोप्लाजिमक मार्फोलाजिकली सेलेक्टेड स्पर्म इंजेक्शन (IMS) शुक्राणु की इमेज को साधारण माइक्रोस्कोप की तुलना में 7,200 गुना बड़ा करके दिखाता है जिसकी मदद से शुक्राणुओं की लाखों की संख्या में उच्च कोटि के शुक्राणु को चुना जा सकता है। यह मशीन इंट्रासाइटोप्लाजिमक स्पर्म इंजेक्शन यानी ICSI का एडवांस्ड वर्जन है। जिसमें शुक्राणु ICSI मशीन की अपेक्षा 16 गुना तक बड़े दिखते हैं। प्डैप् एक रीयल टाइम प्रासीजर है जिसमें शुक्राणुओं का चयन माइक्रो इंजेक्शन से तुरन्त पूर्व किया जाता है।

शुक्राणुओं के अत्यधिक मैग्नीफाइड इमेज अथवा अत्यन्त बड़े आकार में दिखने के कारण शुक्राणुओं की इन्टरनल मार्फोलाजी अथवा अन्दरूनी बनावट जोकि साधारण माइक्रोस्कोप नहीं दिखती की सहायता से ऐसे शुक्राणुओं का चयन हो जाने से बचाती है। जिनकी गुणवत्ता अथवा सन्तानोत्पत्ति की क्षमता अच्छी नहीं होती तथा जो बाद में उपचार की सफलता को बाधित कर सकते हैं। इस प्रकार इस मशीन के द्वारा सिर्फ
उत्कृष्ट शुक्राणुओं का ही चयन करने में सहायता मिलती है।

प्रख्यात पुरुष बांझपन विशेषज्ञ तथा जीवन ज्योति हासिपटल, इलाहाबाद के निदेशक डा॰ ए. के. बन्सल के अनुसार प्डैप् ऐसे पुरुष जिनमें शुक्राणु सम्बन्धी दोष होते हैं। उनके उपचार हेतु एक उत्कृष्ट विधि है तथा इसकी सहायता से ऐसे पुरुषों के उपचार का सफलता प्रतिशत बढ़ जाता है तथा यह विधि प्ब्प् यानि इंट्रासाइटोप्लाजिमक स्पर्म इंजेक्शन विधि से IVF कराने वालो रोगी जिनमें असफलता मिल चुकी है ऐसे पुरुषों अथवा दम्पत्तियों का भी उपचार इस विधि से सम्भव तथा उपचार सफलता की सम्भावना बहुत अधिक है। ऐसे नि:सन्तान दम्पत्ति जिनमें सन्तान प्रापित न हो पाने का कोई कारण स्पष्ट नहीं होता उनके के लिए भी यह विधि सर्वोत्कृष्ट है। यह देखा गया है कि प्डैप् का प्रयोग होने से अण्डों के निषेचन प्रतिशत बढ़ जाता है, उत्कृष्ट गुणवत्ता के भ्रूण बनते हैं, ब्लास्टोसिस अच्छे बनते हैं तथा इस प्रकार गर्भाधान तथा सन्तान प्रापित के अवसर बढ़ जाते हैं। इस तकनीक का ऐसे पुरुषों जिनमें गम्भीर शुक्राणु दोष तथा ऐसे केसेस जिनमें बार-बार गर्भपात हो जाता हो अथवा IVF कराने के बावजूद भी सफलता न मिली हो अथवा कई बार IVF फेल्योर
हुआ हो के भी उपचार में सफलता सिद्ध हुई है।

अनुसन्धानों में यह बात सामने आई है कि ऐसे नि:सन्तान दम्पत्ति जिनमें प्डैप् का प्रयोग किया गया उन्हें पारम्परिक IVF . ICSI के मुकाबले गर्भाधान प्रतिशत काफी हद तक बढ़ा पाया गया तथा गर्भपात का प्रतिशत अत्यन्त कम रहा। यह पद्धति IVF के उपचार में नये अध्याय के रूप में उभरी है तथा इस विधि के उपयोग से गर्भाधान प्रतिशत में 30 से 66 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है।

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