Tuesday, November 21, 2017
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शनि जयंती की पूर्व संध्या पर ज्योतिषियों ने कहा: शनि शत्रु नहीं मित्र

इलाहाबाद, शनि जयंती की पूर्व संध्या पर सिविल लाइन्स एन पी ए आर्केड स्थित ग्रह नक्षत्रम् ज्योतिष शोध संस्थान में संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें सिखाया गया कि राम नाम की शक्ति, प्रभाव द्वारा कैसे प्रत्येक व्यक्ति सरलता से अनिष्ट ग्रहों की शक्ति को अपने लिए हितकर बना सकता है। इस अवसर पर मनोकामना पूर्ति हेतु भक्तों ने विशालकाय पुरूषाकार लौह धातु से निर्मित शनि यन्त्र का पूजन किया। कार्यक्रम का शुभारम्भ नन्ही ज्योतिर्विद कृति ने स्वस्तिवाचन कर किया। ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय ने कहा कि शनि का कार्य है विपरीत परिस्थितियों को पैदा कर व्यक्ति को मानसिक रूप से परेशान कर उसके गलत निर्णय द्वारा उसे कष्ट, पीड़ा, जेल आदि संकटों में डालना। केवल राम नाम ही एकमात्र ऐसा व्ययशून्य उपाय है जिसके माध्यम से व्यक्ति सरलता से मस्तिष्क को एकाग्र रखते हुए शनि की साढ़ेसाती में भी सही निर्णय द्वारा कष्टों से बचता हुआ सफलता हासिल कर सकता है। अध्यात्मिक राम नाम बैंक जीरो रोड शाखा प्रभारी उपमा अग्रवाल ने कहा कि शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या पीड़ा से बचने का सबसे सरल एवं व्ययशून्य उपाय है, नित्य राम नाम जप एवं लेखन। वरिष्ठ महिला ज्योतिर्विद मिथिलेश श्रीवास्तव ने गोष्ठी में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए एकाग्रता का होना अनिवार्य है, शनि व्यक्ति को सबसे पहले मानसिक रूप से परेशान करता है, राम नाम लिखने से मस्तिष्क में एकाग्रता आती है, जिससे सफलता मिलती है।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए राम नाम सेवा संस्थान की अध्यक्ष गुंजन वार्ष्णेय ने कहा, राम नाम लाल रंग से लिखने से शनि, राहु, केतु जैसे अनिष्ट ग्रहों की पीड़ा का शमन होता है क्योंकि लाल रंग मस्तिष्क को सक्रिय कर एकाग्रता में वृद्धि करता है। राम नाम से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं, राम की शक्ति, हनुमान की भक्ति से शनि होते हैं शांत। शनिदेव ने हनुमानजी को वचन दिया है कि जो भी सच्चे मन से राम भक्त हनुमान का पूजन-स्मरण किसी भी रूप में करेगा, उसे वह अपनी पीड़ा से मुक्त रखेंगे। इस अवसर पर राम भक्तों को साढ़ेसाती निवारण उपाय पुस्तिका तथा राम नाम लेखन पुस्तिका का निःशुल्क वितरण किया गया और बताया गया कि इस शनि जयंती को भगवान शनि की पूजा-अर्चना अवश्य करें क्योंकि इस शनि जयंती के बाद उच्च के शनि में शनि जयंती पर शनिदेव का पूजन दुर्लभ संयोग वर्ष 2042 में ही प्राप्त होगा। कार्यक्रम को सफल बनाने में जितेन्द्र नारायण सिंह, अधिवक्ता अजय गुप्ता, उषा, विपुल आदि का विशेष योगदान रहा।

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