Friday, November 24, 2017
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इलाहाबाद। रजोनिवृतित प्रत्येक महिला के शरीर का एक अहम बदलाव है तथा इसे टाला नहीं जा सकता । यह हर महिला के जीवन के मध्य आयु में होने वाली प्रक्रिया है, यह जीवन का एक महत्वपूर्ण अंश है जिसे समझदारी, जागरूकता तथा स्वास्थ्य के प्रति सचेत रह कर इस शारीरिक परिवर्तन को सहज एवं सरल बनाया जा सकता है। हालांकि रजोनिवृतित की कोई निशिचत उम्र नहीं है फिर भी यह प्रत्येक महिला के जीवन में 42 से 58 वर्ष में कभी भी हो सकती है।

अलग-अलग महिला में रजोनिवृतित की उम्र भी अलग-अलग होती है तथा समस्याएं भी किसी को अधिक तो किसी को कम हो सकती है। उक्त उदगार इंडियन मीनोपाज सोसाइटी की इलाहाबाद शाखा की सचिव तथा प्रख्यात स्त्री रोग एवं आई0वी0एफ0 विशेषज्ञा डा. वन्दना बंसल ने 27 दिसम्बर को होटल ग्राण्ड कानिटनेन्टल में इंडियन मीनोपाज सोसाइटी द्वारा आयोजित ''रजोनिवृतित के महत्व तथा आवश्यकता विषय पर आयोजित परिचर्चा में संगोष्ठी में पधारे अतिथियों तथा वक्ताओं का स्वागत करते हुए व्यक्त किया। शहर की वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञा डा. नवनीता बनर्जी ने ''रेलिवेन्स एण्ड स्क्रीनिंग इन मीनोपाज विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि रजोनिवृतित जीवन का एक अंग है तथा शरीर के क्रमिक परिवर्तन एक पड़ाव है। यह एक बीमारी अथवा असमान्यता नहीं है। इसलिए इसके उपचार के लिए सामान्यतया किसी औषधि की जरूरत नहीं होती। हालांकि रजोनिवृतित के कुछ मामलों में जब शारीरिक, मानसिक अथवा भावनात्मक प्रभाव इतने तीव्र हो जायें कि वह रजोनिवृतित के दौर से गुजर रहीं महिला के दैनिक जीवन को प्रभावित करने लगे तब उसके उचित प्रबन्धन की आवश्यकता पड़ती है। रजोनिवृतित के उचित प्रबन्धन के द्वारा जीवन के इस महत्वपूर्ण दौर को आसान बनाया जा सकता है।

सुविख्यात प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञा डा. रमा मिश्रा ने ''न्यू प्रास्पेकिटव्स इन मीनोपाज विषय पर चर्चा करते हुए महिलाओं से कहा कि वो रजोनिवृतित से जुड़े पुराने मिथक तथा भय मन से निकाल दें, अपने शरीर को, उसमें हो रहे बदलाव को समझें तथा पहचाने। शरीर में आ रहे बदलावों तथा समस्याओं के बारे में पूरी जानकारी एकत्रित करें, तदनुसार उन बदलावों के प्रबन्धन के बारे में जानकर उचित प्रबन्ध करें तथा अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें। उन्होंने बल देकर कहा कि रजोनिवृतित की उम्र में महिलाओं का सन्तुलित तथा न्यूट्रीशस आहार की जरूरत होती है तथा साथ में व्यायाम का भी इस उम्र में अत्यधिक महत्व है। अपने शारीरिक तथा मानसिक परिवर्तनों के विषय में अपने सम्बनिधयों से चर्चा करें ताकि वो आपकी भावनाओं तथा मन:सिथति को समझ कर आपको सहयोग कर सकें। उन्होंने महिलाओं से कहा कि याद रखें। यह आपके जीवन का अन्त नहीं है वरन एक महत्वपूर्ण पड़ाव है जो जीवन में नये आयामों के प्रारम्भ का संकेत है इसलिए ऊर्जावान बनें, सक्रिय बनें आपके सामने अभी अनन्त खुशियाँ हैं।

संगोष्ठी में एक पबिलक फोरम में रजोनिवृत्ति एवं रजोनिवृत्ति समस्याओं के निराकरण हेतु तथा इस विषय पर लोगों को जागरुक बनाने के उद्देश्य से एक प्रश्नोत्तरी सत्र का आयोजन किया गया। जहां प्रश्नकर्ताओं ने मीनोपाज से सम्बनिधत उनके रोजमर्रा के अनुभवों के आधार पर प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम में सक्रिय भाग लिया। क्लब 35 प्लस की कोआर्डिनेटर श्रीमती वर्षा अग्रवाल तथा डा. शानित चौधरी ने इस सत्र का संचालन किया तथा स्त्री रोग विभाग के निपुण एवं प्रख्यात चिकित्सकों ने लोगों की शंकाओं एवं समस्याओं का निराकरण किया। साथ ही उन्हें यह भी बताया कि कोई भी महिला रजोनिवृत्ति सिथति को पूर्णत: कैसे नियंत्रित कर सकती है।

डा. मधुरिमा श्रीवास्तव, डा. आई. परिहार के कार्यक्रम की अध्यक्षता की तथा डा. अन्जुला सहाय ने धन्यवाद ज्ञापन किया। संगोष्ठी में इंडियन मीनोपाज सोसाइटी के सदस्य डा. ए.के. बंसल, डा. रागिनी मेहरोत्रा, डा. अन्नपूर्णा अग्रवाल, डा. शरद वर्मा, डा. एस.के. राय, डा. ऊषा सिंह, डा. आशा जायसवाल, डा. अरूणा गौर सहित तमाम चिकित्सक तथा अन्य गणमान्य लोग उपसिथत रहे।

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