Tuesday, November 21, 2017
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नई दिल्‍ली। अमेरिकी स्‍पेस एजेंसी नासा का साइंटिस्‍ट होने और अमेरिका के प्रतिष्ठित मेसाचुसेट्स इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी (MIT) से पीएचडी करने का दावा कर सुर्खियां बटोरने वाले अरुण पी विजयकुमार का भंडाफोड़ हो गया है। उन्‍होंने कबूल कर लिया है कि शोहरत के लिए उन्‍होंने झूठे दावे किए थे। विजयकुमार की इन करतूतों का खुलासा नेटिजेन पुलिस (Netizen Police) नाम के एक फेसबुकग्रुप ने किया है। इस ग्रुप का काम पुलिस के साथ मिलकर संदिग्‍ध ऑनलाइन फ्रॉड की जांच करना और उसका खुलासा करना है।
 
क्‍या थे विजयकुमार के दावे?
केरल के रहनेवाले विजयकुमार ने पिछले साल दावा किया था कि नासा ने उन्‍हें बतौर रिसर्च साइंटिस्‍ट चुना है और वह उनकी काबिलियत और देशभक्ति से इतनी ज्‍यादा प्रभावित हुई है कि नागरिकता के मामले में भी छूट दिया है। विजयकुमार ने तब कहा था कि नासा में उनका काम रिमोट सेंसिंग की मदद से दूसरे ग्रहों से जुड़ी जानकारियों का पता लगाना है। उनका यह भी दावा था कि वह अमेरिका के प्रतिष्ठित मेसाचुसेट्स इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी (MIT) में पीएचडी कर रहे हैं। साथ ही, उन्‍होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का दावा भी किया था।
 
पुलिस ने सार्वजनिक की जानकारी
विजयकुमार के कबूलनामे के बाद पुलिस ने बताया कि उनका मकसद सिर्फ शोहरत हासिल करना था और उनके बारे में जानकारियां इसलिए सार्वजनिक की गई हैं ताकि भविष्‍य में वह इस तरह के दावे नहीं कर सकें।

साभार: दैनिक भास्कर

 

 

 

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