Sunday, February 25, 2018
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अक्षय मुकुल, नई दिल्ली : सोनिया गांधी द्वारा पंडित जवाहरलाल नेहरू के कागजात नेहरू मेमोरियल म्यूजियम ऐंड लाइब्रेरी(NMML) को दिए जाने से शुरू में उत्साहित दिख रहे स्कॉलर्स को निराशा हाथ लगी है। सोनिया ने पंडित नेहरू के निजी कागजातों को उपलब्ध करवाने से इनकार कर दिया है। ये वे पेपर है, जिनसे नेहरू के उनके परिजनों और अन्य लोगों से रिश्तों के बारे में जानकारी मिल सकती है।

साल 1947 से लेकर मई 1964 में जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु तक के उनके ऑफिशल पेपर्स, चिट्ठियां, भाषण और दूसरी चीज़ें ही लाइब्रेरी को दी गई हैं। स्कॉलर्स और स्टूडेट्स चाहते हैं कि उनके निजी कागजात भी छापे जाएं, ताकि उन्हें और अच्छी तरह समझा जा सके।

जवाहरलाल नेहरू ने जो लेटर अपने पिता मोतीलाल नेहरू, मां स्वरूप रानी, पत्नी कमला नेहरू, बेटी इंदिरा, बहनों विजयलक्ष्मी पंडित, कृष्णा हठीसिंह और भतीजियों चंद्रलेखा, नयनतारा और रीता को लिखे थे, वे स्कॉलर्स की पहुंच से बाहर रहेंगे। इसके साथ ही नेहरू और पद्मजा नायडू के बीच व इंदिरा गांधी और नायडू के बीच हुआ पत्राचार भी कोई पढ़ नहीं सकेगा।

इसके अलावा नेहरू और एडविना माउंटबैटन के बीच भेजी गई चिट्ठियां भी लोगों की पहुंच से बाहर रहेंगी। पद्मजा के घर पर नेहरू की फाइलें, कमला नेहरू और सैयद महमूद के बीच का पत्राचार भी पर्सनल पेपर्स की कैटिगरी में आएगा।

नेहरू के ऑफिशल रेकॉर्ड्स को सबके सामने लाने का मुद्दा इस साल जून में उठा था, जब यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना के इतिहासकार सुसैन डाबनी पेनीबैकर ने नेहरू मेमोरियल म्यूजियम ऐंड लाइब्रेरी से 1947 के बाद के कागजात मांगे थे। इसके बाद नेहरू के पेपर्स के बारे में सोनिया गांधी को रिक्वेस्ट भेजी गई, जो कि उनके कागजातों की संरक्षक हैं। उन्होंने कहा कि पेनीबैकर ने सरकारी कागजात मांगे हैं, इसिलए उनकी क्लियरेंस की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर वह पर्सनल पेपर चाहते हैं तो परमिशन लेनी होगी।

NMML को मिले नेहरू के इन पेपर्स का नियंत्रण प्रधानमंत्री कार्यालय के बजाय संस्कृति मंत्रालय के पास है। सिर्फ कृष्ण मेनन के कागजात देखने के लिए ही पीएमओ से क्लियरेंस लेनी होगी। मेनन ने इंदिरा गांधी को अपने पेपर्स का संरक्षक बनाया था और उनके बाद यह अधिकार पीएमओ के पास आ गया। था।

बाकी कई अहम कागजात के लिए शख्सियतों के फैमिली मेंबर्स की क्लियरेंस लेनी होती है। विजयलक्ष्मी पंडित की बेटी लेखिका नयतारा सहगल के पेपर जनता के लिए बंद कर दिए गए हैं। इसी तरह महात्मा गांधी के करीबी प्यारेलाल के पेपर भी उनके परिवार द्वारा क्लोज कर दिए गए हैं।

 

साभार: नव भारत टाइम्स

 

 

 

 

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