Friday, February 23, 2018
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नई दिल्ली : इस हफ्ते काठमांडू में होने जा रहे सार्क सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ के बीच बातचीत हो सकती है। दोनों नेताओं के बीच बातचीत की संभावनाओं को भारत ने अभी आधिकारिक रूप से खारिज नहीं किया है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने रविवार को बताया कि पाकिस्तान ने मीटिंग की गुजारिश नहीं की है, लेकिन दोनों नेता दो दिनों तक एक ही कमरे में होंगे। इस बयान के आधार पर माना जा सका है कि दोनों नेता आपस में बातचीत कर सकते हैं, भले ही वह औपचारिक न हो। अकबरुद्दीन ने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 26 और 27 नवंबर को नेपाल में होंगे। अभी उनका शेड्यूल तय किया जा रहा है, लेकिन वह चाहते हैं कि जिनसे भी उनकी मुलाकात या बातचीत हो, वह सार्थक रहे।'

अगस्त में भारत और पाकिस्तान के रिश्तों के बीच उस वक्त खटास आ गई थी, जब पाकिस्तान के राजदूत अब्दुल बासित ने कश्मीरी अलगाववादी नेताओं से मीटिंग की थी। भारत ने इस पर आपत्ति जाहिर करते हुए पाकिस्तान के साथ सचिव स्तर की वार्ता रद्द कर दी थी।

इसके बाद से जम्मू-कश्मीर में सीमा पर सीज फायर उल्लंघन, नवाज शरीफ का यूएन असेंबली में कश्मीर की बात करना, यूएन महासचिव बान की-मून से कश्मीर मुद्दे पर दखल की मांग से लेकर पिछले हफ्ते अमेरिका के राष्ट्रपति से भी ऐसी ही अपील करने जैसी कई घटनाओं ने आग में घी का काम किया है।

पाकिस्तान का दावा है कि अगस्त में भारत का सचिव स्तर की वार्ता को रद्द करना और 'बिना किसी उकसावे के' एलओसी पर फायरिंग करना दिखाता है कि वह रिश्ते सामान्य होने देने का हिमायती नहीं है।

सैयद अकबरुद्दीन ने शरीफ द्वारा बराक ओबामा से कश्मीर पर की गई गुजारिश के बारे में कहा, 'शिमला समझौते और लाहौर घोषणापत्र में तय बातों के आधार पर ही पाकिस्तान से रिश्ते सुधारे जा सकते हैं। हमारे ख्याल से द्विपक्षीय वार्ता ही इसके लिए सीधा रास्ता है। अगर हम इससे हटे, तो कहीं नहीं पहुंचेंगे।'

 

साभार: नव भारत टाइम्स

 

 

 

 

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