Tuesday, November 21, 2017
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इलाहबाद।स्वदेशी जागरण मंच की ओर से इलाहाबाद विश्वविद्यालय के निराला सभागार में ष्राष्ट्र चेतना और स्वामी विवेकानंदष् विषयक गोष्ठी को संबोधित करते हुए भारत सरकार के पूर्व केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री चिन्मयानन्द ने कहा कि राष्ट्रीयता की समझ वो है जो आस्था से निकलती है।आज आस्था का पतन ही भारत के पतन का कारण है।इस देश की अस्मिता और आस्था को बचाने के लिए फिर से एकबार विवेकानंद जैसे राष्ट्र संत के जन्म लेने की जरुरत है।

स्वामी विवेकेनंद की १५० वीं जयंती के अवसर पर आयोजित गोष्ठी को संबोधित करते हुए स्वामी चिन्मयानन्द ने कहा कि जब विवेकानंद पैदा हुए थे तब देश टुकड़ों में बंटा औरगुलाम था।१८५७ की क्रांति की विफलता के बाद से देश में चारों तरफ निराशा का भाव था।मदन मोहन मालवीय ,विवेकानंद और गाँधी एक ही कालखंड के उपज थे,जिन्होंने आगे चलकर देश में चेतना का संचार किया।उन्होंने कहा कि जिस आस्था को अंग्रेजों ने तोड़ने की कोशिश की उसे विवेकानंद और गाँधी ने जोड़ने का कम किया।विवेकानंद भारतीयता और आध्यात्मिकता के साधक थे।उन्होंने कहा कि देश में चेतना का आभाव है,तभी हम अपने देश के सैनिकों की बर्बर हत्या पर भी खामोश रहते हैं।उन्होंने कहा कि जब देश में आस्था अंगड़ाई लेती है तो बड़ी-बड़ी व्यवस्थाएं धराशायी हो जाती है।

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न्यायमूर्ति गिरिधर मालवीय ने अध्यक्षता करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद ने राष्ट्र के गौरव को विश्व स्तर पर स्थापित किया।विश्व हमारी ज्ञान-विज्ञानं की उपलब्धियों को नहीं मानता पर हमारी अध्यात्मिक और सांस्कृतिक उपलब्धियों को सारा विश्व सम्मान देता है।

अखिल भारतीय केंद्री विवि शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रोफेसर गिरीश चन्द्र त्रिपाठी ने कहा कि जो राष्ट्र अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान खो देता है ,उसका अस्तित्व नहीं बचता।स्वामी विवेकानंद ने राष्ट्र की अस्मिता को बचाने का कार्य किया।वे वयक्तिक मोक्ष के साधक नहीं थे।उनका मोक्ष कालजयी था।उनके विचार आज भी उतने ही व्यावहारिक हैं,जिसमें राष्ट्र की चेतना को जगाने की ताकत है।

उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री डॉ नरेन्द्र कुमार सिंह गौर ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचारों से ही राष्ट्र की चेतना जागृत होगी।उन्होंने कहा कि आज सत्ता में बैठे लोगों में राष्ट्र चेतना का आभाव है,तभी तो सैनिकों की नृशंश हत्या पर भी हम मौन बैठे हैं।

इलाहाबाद विवि मिनिस्ट्रियल और टेक्नीकल स्टाफ युनियन के अध्यक्ष अखिलेश श्रीवास्तव ने कहा कि विवेकानंद जी ने भारतीय संस्कृति को विदेशों में सम्मान दिलाया।उन्होंने कहा कि अपनी संस्कृति से ही राष्ट्र चेतना उत्पन्न होगी,सिर्फ नागरिकता ग्रहण कर लेने से कोई देशभक्त नहीं हो जाता ।सञ्चालन राष्ट्रीय परिषद् के सदस्य डॉ निरंजन सिंह ने और धन्यवाद ज्ञापन जिला संयोजक अजय सिंह ने किया।इससे पहले अतिथियों का स्वागत प्रबुद्ध प्रकोष्ठ के संयोजक डॉ वी के सिंह और महानगर संयोजक सुरेश बहादुर सिंह ने किया।

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