Friday, November 24, 2017
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नई दिल्ली : यूपीए सरकार में पर्यावरण मंत्री रहीं जयंती नटराजन का कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखा एक बेहद भावुक पत्र मीडिया में है। इस पत्र में उन्होंने लिखा है कि उन्होंने पार्टी और खासकर राहुल गांधी की सारी बातों को माना, इसके बावजूद उनकी उपेक्षा की गई और उनका नाम खराब किया गया।

उन्होंने कहा है कि कैबिनेट के सहयोगियों और पार्टी के नेताओं की ओर से भारी दबाव के बावजूद उन्होंने कई बड़ी योजनाओं को पर्यावरण के मुद्दे पर रोके रखा, सिर्फ इसलिए कि राहुल गांधी की ओर से उन्हें खास अनुरोध मिले थे।

नटराजन इस बात पर सवाल उठाती हैं कि जब वह सब काम पार्टी और राहुल गांधी के मुताबिक कर रही थीं तो ऐसा क्या हुआ कि उन्हें हटा दिया गया। 20 नवंबर 2013 को नटराजन ने इस्तीफा दिया था। इसके बाद जो हुआ, उस पर नटराजन ने अपने खत में विस्तार से लिखा है। वह लिखती हैं, 'मेरे सूत्रों ने बताया कि राहुल गांधी के दफ्तर से कुछ लोग मीडिया को फोन करके कह रहे थे कि मुझे पार्टी के काम के लिए नहीं हटाया गया है। उसके बाद मीडिया में मेरे खिलाफ खबरों की बाढ़ आ गई। उसी दिन, यानी मेरे इस्तीफा देने के ठीक एक दिन बाद राहुल गांधी ने फिक्की के कार्यक्रम में भाषण दिया। इस भाषण में उन्होंने पर्यावरणीय मंजूरियों को लेकर होने वाली देरी का जिक्र किया और कहा कि इस कारण अर्थव्यवस्था पर बुरे असर हुए। उन्होंने कॉर्पोरेट जगत को भरोसा दिलाया कि अब से पार्टी और सरकार सुनिश्चित करेगी कि कोई देरी न हो और उद्योग के लिए कहीं रुकावटें न हों। मैंने वह भाषण यूट्यूब पर देखा। उसके बाद मीडिया ने मुझसे पूछा कि क्या मुझे तुरंत प्रभाव से हटाया गया था ताकि मुझे हटाने की खबर को बैकग्राउंड में रखकर राहुल गांधी फिक्की और कॉर्पोरेट को संबोधित कर सकें।'

एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक नवंबर में नटराजन ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में नटराजन ने आरोप लगाया था कि पार्टी के कुछ लोग मीडिया के जरिए उनके खिलाफ दुष्प्रचार की मुहिम छेड़े हुए हैं। नटराजन के मुताबिक यह मुहिम तब शुरू हुई, जब राहुल गांधी पर्यावरण के पक्ष में अपनाया रुख छोड़कर कॉर्पोरेट प्रेमी हो गए थे।

नटराजन लिखती हैं, 'मुझे राहुल गांधी और उनके दफ्तर से खास अनुरोध (जो हमारे लिए निर्देश) होते थे, जिनमें कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पर्यावरण को लेकर चिंताएं जाहिर की जाती थीं। मैंने उन अनुरोधों का पालन किया।'

नटराजन ने इस पत्र में लिखा है कि राहुल गांधी अनुरोध भेजते थे लेकिन यह हमारे लिए आदेश सरीखा होता था। उन्होंने आरोप लगाया है कि जब उन्हें पार्टी के काम के बहाने मंत्रीपद से हटाया गया, उसके एक दिन बाद फिक्की के कार्यक्रम में राहुल गांधी ने व्यापारियों से कहा कि उन्हें कोई दिक्कत नहीं होगी।

नटराजन लिखती हैं कि राहुल गांधी खुद नियामगीरी गए थे और वहां उन्होंने खुद को आदिवासियों का सिपाही बताया था, जिसके बाद उनके दफ्तर ने इस बारे में मुझे सूचित भी किया था। नटराजन के मुताबिक उसके बाद उन्होंने वेदांता के प्रॉजेक्ट को मंजूरी नहीं दी थी और बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी उनके रुख को सही बताया।

इस पत्र के मुताबिक नटराजन ने राहुल और सोनिया गांधी से मिलने की कई बार कोशिश की लेकिन उन्हें लगातार नजरअंदाज किया जाता रहा। यहां तक कि उन्हें पार्टी के लिए काम करने के नाम पर मंत्रीपद से हटाकर दरकिनार कर दिया गया। उन्होंने इशारा किया है कि कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए उन्हें हटाया गया। वह लिखती हैं, 'मेरे बाद मंत्री बने श्रीमोइली ने मेरे सारे फैसले तक रोक दिए। इस्तीफे से कुछ दिन पहले मुझे कुछ कानूनी मुद्दों पर अडाणी की फाइल की समीक्षा करनी थी। जब मैंने फाइल मांगी तो बताया गया कि वह खो गई है। काफी खोजबीन के बाद अधिकारियों को फाइल मिल गई। बताया गया कि यह कंप्यूटर सेक्शन के वॉशरूम में थी। लेकिन यह मिली उसी दिन, जिस दिन मुझे हटाया गया। जाहिर है कि मेरे मंत्रालय में तब कुछ ऐसे अफसर थे, जो वह फाइल मुझे देना नहीं चाहते थे, वजहें मुझे नहीं पता।'

नटराजन ने अपने खत में बार-बार लिखा है कि मैंने और मेरे परिवार ने पार्टी के लिए जी-जान से काम किया लेकिन मेरे करियर को बर्बाद कर दिया गया और मुझे मानसिक प्रताड़ना से गुजरना पड़ा।

 

साभार: नव भारत टाइम्स 

 

 

 

 

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