Friday, November 24, 2017
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नई दिल्ली : विदेश सचिव सुजाता सिंह के कार्यकाल में कटौती कर उनकी जगह अमेरिका में भारतीय राजदूत सुब्रमण्यम जयशंकर की नियुक्ति पर कई चीजें सामने आ रही हैं। अंग्रेजी न्यूज चैनल सीएनएन-आईबीएन ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज सुजाता सिंह को हटाने के पक्ष में नहीं थीं। सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और सुषमा स्वराज में सुजाता सिंह पर तनातनी की स्थिति थी। सुजाता सिंह को आठ महीने के कार्यकाल रहते हुए हटाने का एक कारण यह भी है। इन खबरों के बीच विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्वीट कर बताया कि वह डॉ. जयशंकर की नियुक्ति पर हुए फैसले में पूरी तरह से शामिल थीं।

सुषमा ने कहा, 'मैंने सुजाता सिंह से कहा था कि सरकार डॉ. जयशंकर को नया विदेश सचिव बनाना चाहती है। फिर मैंने इस मसले पर सुजाता सिंह से व्यक्तिगत तौर पर बात की।' इस मामले की जानकारी रखने वाले बीजेपी के एक नेता ने इकनॉमिक टाइम्स से इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि इस फैसले की जानकारी आधिकारिक तौर पर विदेश मंत्रालय को नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा, 'स्वराज को सुजाता का समर्थन करते देखा गया। उन्होंने संदेश भी भेजा कि फॉरन सेक्रेटरी- एक महिला और दलित- को उनका कार्यकाल समाप्त होने से 8 महीने पहले हटाने से सरकार की छवि खराब होगी।'

सूत्रों का यह भी कहना है कि पिछले 6 महीने में विदेश मंत्रालय ने राजदूत और हाई कमिश्नर की नियुक्तियों पर जितनी सिफारिशें भेजीं उनको प्रधानमंत्री ऑफिस ने कबूल नहीं किया। इस वजह से नए राजदूतों की नियुक्तियां नहीं हो पाईं। पूर्व डेप्युटी नैशनल सिक्यॉरिटी अडवाइजर नेचल संधु को बाहर का दरवाजा दिखाने के बाद सुजाता सिंह की बर्खास्तगी अहम घटना है। हालांकि सुजाता सिंह ने कार्यकाल खत्म होने से पहले हटाए जाने पर गुरुवार को कहा कि उन्होंने रिटायरमेंट की मांग की थी। खबरों के मुताबिक केंद्र सरकार की तरफ से उन्हें इशारों में बता दिया गया था कि वह लंबे समय तक इस पर नहीं रह पाएंगी।

सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुजाता सिंह को पर्याप्त संकेत दे दिए थे कि वह उनके कामों से खुश नहीं हैं। उन्हें फॉरन प्रमुखों के डेलिगेशन लेवल की कई अहम बैठकों से और अन्य कई मौकों पर अलग रखा गया। यहां तक कि सुजाता सिंह को डेलिगेशन की बैठक खत्म होने के बाद के लंच में भी शामिल नहीं किया गया था।

सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार यह मानकर चल रही थी कि वह खुद स्थिति को भांपते हुए इस्तीफा दे देंगी। उन्हें सम्मानजनक तरीके से विदा होने का प्रस्ताव भी दिया गया लेकिन वह तैयार नहीं हुईं। वह 8 महीने तक इस पद बने रहना चाहती थीं और झुकने को तैयार नहीं थीं।

अमेरिका में भारतीय राजदूत सुब्रमण्यम जयशंकर 31 जनवरी को रिटायर हो रहे थे। 9 जनवरी को जयशंकर की उम्र 60 साल हो गई थी। ऐसे में मोदी सरकार ने सुजाता सिंह पर आखिरकार सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें बर्खास्त करने का फैसला किया। सूत्रों के मुताबिक मोदी सरकार चाहती थी कि जयशंकर को नया विदेश सचिव 31 जनवरी को रिटायर होने से पहले बना दिया जाए। यदि ऐसा नहीं होता को जयशंकर को विदेश सचिव बनाने के लिए सरकार को अध्यादेश का रुख करना पड़ता।

जयशंकर ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की सफल यात्रा में अहम भूमिका अदा की थी। इन्होंने यूपीए सरकार के वक्त इंडो-यूएस सिविल न्यूक्लियर डील की बातचीत में भी बड़ी भूमिका निभाई थी।

ओबामा की भारत यात्रा पर वाइट हाउस से डील करने में जयशंकर का बड़ा रोल रहा है। जयशंकर चीन में भी भारतीय राजदूत की भूमिका निभा चुके हैं। चीन में जयशंकर की भूमिका से मोदी बहुत प्रभावित रहे हैं। जयशंकर अमेरिका, चीन और सिंगापुर में नई सराकरों के साथ बढ़िया रिश्ता बनाने में कामयाब रहे हैं।

 

साभार: नव भारत टाइम्स 

 

 

 

 

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