Sunday, February 25, 2018
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नई दिल्ली : रिटारयमेंट से सात महीने पहले विदेश सचिव के पद से हटाए जाने और एस जयशंकर को नया विदेश सचिव बनाने के फैसले को सुजाता सिंह ने 'बेहद दुख' पहुंचाने वाला बताया है। सुजाता सिंह ने कहा कि मेरे 39 साल के डिप्लोमैटिक करियर की प्रतिष्ठा को चोट पहुंचाने के लिए मीडिया में प्रायोजित तरीके से स्टोरी चलाई गई। उन्होंने कहा कि वह पिछले दो दिनों से इस मसले पर मीडिया में चल रही खबरें और रिपोर्ट देख रही हैं। सिंह ने कहा कि मीडिया की कॉमेंट्री से मुझे गहरा दुख हुआ। उन्होंने कहा, 'मैं मानती हूं कि इस हद तक नहीं गिरना चाहिए।'

सरकार से नाराज सुजाता सिंह ने कहा, 'मेरी प्रतिष्ठा पर चोट की गई है। मेरे रेकॉर्ड को दागदार बनाया गया है। ऐसा करने की क्या जरूरत पड़ गई थी? मैं बिना किसी औपचारिकता और हंगामा के हटना चाहती थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ और मेरी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया गया।'

सुजाता सिंह ने अचानक दो साल की अवधि वाले कार्यकाल में सात महीने पहले हटाने की डिटेल देते हुआ कहा कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बुधवार को दोपहर बाद 2 बजे फोन किया था। उन्होंने फोन पर कहा, 'गुड न्यूज नहीं है। प्रधानमंत्री एस जयशंकर को नया विदेश सचिव बनाना चाहते हैं।' सुजाता सिंह ने सुषमा स्वराज से कहा, 'मेरा रेजिग्नेशन लेटर तैयार है लेकिन मैं इस स्थिति में रिटायरमेंट लाभ से वंचित रह जाऊंगी। इसके बाद मैंने 'प्रधानमंत्री के निर्देशानुसार' वक्त से पहले रिटायरमेंट के लिए सात बजे शाम में इस्तीफे का अनुरोध करते हुए एक लेटर भेजा। दो घंटों के भीतर आधिकारिक रूप से सरकार की बेवसाइट पर तत्काल प्रभाव के साथ मेरे कार्यकाल में कटौती की घोषणा हो गई।'

सुजाता सिंह ने कहा कि तीन हफ्ते पहले मुझे इस पद को छोड़ने के इशारे मिल गए थे। उन्होंने कहा, 'मुझे कहीं और शिफ्ट करने की बात हो रही थी, लेकिन मैं कहीं राजदूत या यूपीएससी मेंबर किसी भी सूरत में नहीं बनना चाहती थी।' एनडीटीवी से इंटरव्यू में सुजाता सिंह ने कहा कि इस हद तक गिरने की क्या जरूरत थी? सिंह ने कहा कि मैं सम्मानपूर्वक जाना चाहती थी लेकिन सोशल मीडिया पर जानबूझकर तथ्यहीन चीजें पेश की गईं। 1987 में 28 साल पहले तब के प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने तत्कालीन विदेश सचिव एपी वेंकटेश्वरण को हटाया था। इसके बाद सुजाता सिंह पहली विदेश सचिव हैं जिन्हें कार्यकाल के बीच में ही पद छोड़ना पड़ा।

सुब्रमण्यम जयशंकर अमेरिका में भारतीय राजदूत थे। वह सुजाता सिंह से एक बैच जूनियर हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुजाता सिंह के कामों से प्रभावित नहीं थे। पीएम ने सुजाता सिंह को कई बार हटाने के लिए भी कहा था लेकिन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज हटाना नहीं चाहती थीं। पूर्व विदेश सचिव ने कहा कि बीते आठ महीनों के दौरान उन्होंने जिस तरह से विदेश नीति को संचालित किया है उसका उन्हें अधिक श्रेय दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्होंने क्रेडिट लेने का खेल कभी नहीं खेला, वरना ऐटमी करार पर उनकी भूमिका काफी अहम रही। इसके अलावा उनकी जगह विदेश सचिव के पद पर नियुक्त हुए एस जयशंकर पर भी परोक्ष रूप से कटाक्ष करते हुए सुजाता सिंह ने कहा, 'मेरी सबसे अहम खूबी बौद्धिक ईमानदारी और निष्ठा है, जो कि किसी भी तरह से बौद्धिक प्रतिभा से बेहतर है।' इसके साथ ही उन्होंने कहा, कुछ लोग हर चीज में मैं की बात करते हैं, मुझे भी अपनी उपलब्धि बतानी चाहिए।

 

साभार: नव भारत टाइम्स 

 

 

 

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