Friday, November 24, 2017
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नई दिल्ली : दिल्ली में बीजेपी की बुरी तरह से हार हुई है और 'आप' प्रचंड बहुमत हासिल करती दिख रही है। दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों ने न सिर्फ इस शहर की सरकार का फैसला किया है, बल्कि इसमें बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की रणनीति भी पूरी तरह से फ्लॉप साबित हुई है। दिल्ली बीजेपी के हाथ से फिसलने का असर न सिर्फ पूरे देश के सेंटिमेंट पर पड़ेगा, नरेंद्र मोदी और अमित शाह की रणनीति पर भी सवाल उठने लगे हैं। इसी वजह से पार्टी के नेताओं में नतीजों से पहले जबर्दस्त बेचैनी है।

अमित शाह को अब तक चाणक्य के तौर पर पेश किया जाता रहा है, लेकिन दिल्ली की हार से यह भी सवाल उठने लगेंगे कि नेताओं की पूरी फौज और सेनापति के रूप में नरेंद्र मोदी को झोंकने के बावजूद अगर पार्टी को कामयाबी नहीं मिली तो जाहिर है कि पार्टी की रणनीति ही फेल हो गई। आइए जानते हैं कि बीजेपी से पांच बड़ी गलतियां क्या-क्या रहीं...

अरविंद को मिला मौका
पहली गलती तो यही की गई कि लोकसभा चुनाव के बाद अरविंद केजरीवाल को फिर से अपना नेटवर्क खड़ा करने का मौका दिया गया। कायदे से उसी लहर के वक्त दिल्ली में चुनाव कराए जाते तो बीजेपी के लिए शायद ही इतनी बड़ी मुश्किल होती। चार राज्यों में तो चुनाव हुए, लेकिन दिल्ली को लेकर बीजेपी हिम्मत नहीं जुटा सकी और बार-बार इसे टालती गई। इसकी वजह से केजरीवाल को फिर से खुद को खड़ा करने का मौका मिला।

हर्षवर्धन को हटाया
दूसरी सबसे बड़ी गलती पार्टी और खुद नरेंद्र मोदी के स्तर पर हुई। पहले पार्टी के नेता हर्षवर्धन का मंत्रालय बदलकर यह संदेश देने की कोशिश की गई कि वह सक्षम नहीं हैं। इससे हर्षवर्धन की क्षमता पर खुद पार्टी ने सवाल खड़े कर दिए। अगर हर्षवर्धन को सीएम प्रोजेक्ट किया जाता तो यह जरूर है कि दिल्ली में पार्टी के लिए केजरीवाल का सामना करना अपेक्षाकृत आसान होता।

इसके बाद जब किसी को भी मुख्यमंत्री का उम्मीदवार न बनाने का फैसले को बदल दिया। सीएम कैंडिडेट भी पार्टी के भीतर के बजाय किरन बेदी को बनाया, जिसका असर यह हुआ कि अपना संगठन ही नाराज हो गया।

पस्त और हताश दिख रही थी बीजेपी
'आप' पिछले एक साल से चुनाव की तैयारी कर रही थी, जबकि पिछले छह महीनों में चार राज्यों में चुनाव लड़ चुकी बीजेपी पस्त दिख रही थी। 'आप' के सुनियोजित और आक्रामक प्रचार के सामने पूरे कैंपन के दौरान बीजेपी हताश दिखी और दिल्ली में ऐसे बाहरी नेताओं को लगाया गया जिन्हें यहां की समझ नहीं थी। इससे जमीनी कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी थी।

नकारात्मक प्रचार
बहुत से लोगों को बीजेपी का अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधना भी नहीं भाया। खासकर, पार्टी ने अंतिम दिनों में अखबारों में विज्ञापन देकर अरविंद केजरीवाल पर जो निजी हमले किए उसका फायदा भी 'आप' को ही मिल गया।

विजन डॉक्युमेंट में भी गलती
अंत में विजनम डॉक्युमेंट में भी बड़ी गलती हो गई। उत्तर-पूर्व राज्य के लोगों के लिए इसमें प्रवासी लिख दिया गया। हालांकि, पार्टी ने तुरंत माफी मांगते हुए इस गलती को सुधार लिया और बड़ा राजनीतिक मुद्दा नहीं बन पाया। लेकिन वोटरों के बीच यह संकेत चला गया कि पार्टी कितनी हताशा में है।

 

साभार: नव भारत टाइम्स

 

 

 

 

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