Friday, November 24, 2017
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नई दिल्ली. साउथ अमेरिकी देश चिली में गुरुवार को भूकंप के 33 झटके आए। इन झटकों के कारण चिली ही नहीं बल्कि 3500 km दूर तक जमीन हिल गई। सबसे पहला और बड़ा झटका रिक्टर पैमाने पर 8.3 का था। इसके बाद 8 घंटे के अंदर 6 बड़े और 27 झटके महसूस किए गए।भूकंप के 90 मिनट बाद चिली के शहर के कोक्विम्बो में 15 फीट ऊंची लहरें उठीं हैं। इसके कारण निचले इलाकों में पूरी तरह से पानी भर गया है। दस लाख लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है। चिली में पांच लोगों की मौत हो गई है। कई इमारतें जमींदोज हो गई हैं।
 
कहां और कब महसूस किए गए झटके
* usgs के मुताबिक, चिली के लापेल में भूकंप का पहला झटका 10 बज कर 59 मिनट पर (लोकल टाइम के अनुसार) महसूस किया गया। इसके बाद 17 सितंबर सुबह चार बजे तक 6 बड़े झटके आए। इनकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6 से ऊपर थी।
 
* छह बड़े झटके आठ घंटे के अंदर महसूस किए गए। earthquaketrack के मुताबिक, 16 सितंबर रात 22:54 बजे से लेकर 17 सितंबर की सुबह 5 बज कर 57 मिनट तक (लोकल टाइम) भूकंप के 33 झटके आए।

* झटके अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में भी महसूस किए गए। यहां कई इमारतें और घर नष्ट हो गए। कई लोग घायल हुए हैं।

* चिली में भूकंप के बाद खनन का काम रोक दिया गया है।
 
कहां आई सुनामी, कहां के लिए है वॉर्निंग?
* पेरू, फ्रेंच पॉलीनेशिया, हवाई (अमेरिका), न्यूजीलैंड में सुनामी की वॉर्निंग है।

* चिली की नेवी ने स्टेटमेंट में बताया कि भूकंप के बाद 3 से 15 फीट ऊंची लहरें उठी हैं। कोक्मिबो शहर के कोस्टल इलाकों में पानी भर गया है। कोक्मिबो की मेयर क्रिस्टीना गालेगुइल्लोस ने कहा- भूकंप और इसके बाद लहरे उठने से हालात खराब हो गए हैं।
 
* 2010 में चिली में 8.8 तीव्रता का भूकंप आया था। इसके बाद सुनामी की लहरें उठीं थीं। इसमें सैकड़ों लोगों की मौत हो गई थी। लाखों घर तबाह हो गए थे।
 
क्यों आता है भूकंप?
पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स हैं जो लगातार घूम रही हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की एनर्जी बाहर आने का रास्ता खोजती है। डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।

कितनी तबाही लाता है भूकंप
रिक्टर स्केल
असर
0 से 1.9
सिर्फ सीज्मोग्राफ से ही पता चलता है।
2 से 2.9
हल्का कंपन।
3 से 3.9
कोई ट्रक आपके नजदीक से गुजर जाए, ऐसा असर।
4 से 4.9
खिड़कियां टूट सकती हैं। दीवारों पर टंगी फ्रेम गिर सकती हैं।
5 से 5.9
फर्नीचर हिल सकता है।
6 से 6.9
इमारतों की नींव दरक सकती है। ऊपरी मंजिलों को नुकसान हो सकता है।
7 से 7.9
इमारतें गिर जाती हैं। जमीन के अंदर पाइप फट जाते हैं।
8 से 8.9
इमारतों सहित बड़े पुल भी गिर जाते हैं। सुनामी का खतरा।
9 और उससे ज्यादा
पूरी तबाही। कोई मैदान में खड़ा हो तो उसे धरती लहराते हुए दिखेगी। समंदर नजदीक हो तो सुनामी।
भूकंप में रिक्टर पैमाने का हर स्केल पिछले स्केल के मुकाबले 10 गुना ज्यादा ताकतवर होता है।
 
700 साल पुरानी फॉल्ट लाइन में है एशिया का बड़ा हिस्सा
अर्थक्वेक ट्रैक एजेंसी के मुताबिक हिमालयन बेल्ट की फॉल्ट लाइन के कारण एशियाई इलाके में ज्यादा भूकंप आ रहे हैं। इसी बेल्ट में हिंदुकुश रीजन भी आता है। इस साल अप्रैल-मई में नेपाल में आए भूकंप के कारण करीब 8 हजार लोगों की मौत हुई थी। हिमालय कुछ सेंटीमीटर की दर से उत्तर में खिसक रहा है। हिमालयन फॉल्ट लाइन पर भारत सरकार की मदद से अमेरिकी वैज्ञानिकों ने एक स्टडी की थी। यह स्टडी यूएस जर्नल लिथोस्फीयर और जेजीआर में छपी थी। इस स्टडी को लीड कर चुके जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च के सी.पी. राजेंद्रन के मुताबिक हिमालय 700 साल पुरानी फॉल्ट लाइन पर मौजूद है। यह फॉल्ट लाइन ऐसे मुहाने पर पहुंच चुकी है जिसकी वजह से कभी भी वहां ऐसा ताकतवर भूकंप आ सकता है जो पिछले 500 साल में नहीं देखा गया हो।

 

 

 

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