Friday, November 24, 2017
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इलाहाबाद। आसिटयोपोरोसिस यानि असिथक्षरण अथवा आम बोलचाल में कहा जाये तो हडिडयों का कमजोर होना यह ऐसा गम्भीर खतरा है जो उम्र के साथ-साथ बढ़ता जाता है खासकर ऐसी महिलाओं में जो रजोनिवृतित यानि मीनोपाज की उम्र के करीब हैं अथवा जिनमें रजोनिवृतित हो चुकी है, ऐसी महिलाएं असिथक्षरण यानि आसिटयोपोरोसिस की शिकार हो रही हैं। यह आज के दौर में भारतीय चिकित्सा परिदृश्य का सर्वाधिक चिन्तनीय विषय है जिसके कारण बढ़ती उम्र की महिलाओं में हडिडयों के टूटने तथा अन्य तकलीफ होने के केसों में वृद्धि दर्ज की गयी है। हर फ्रैक्चर से आसिटयोपोरोसिस का रिस्क बढ़ जाता है। इसके बावजूद भी चिन्ताजनक पहलू यह है कि भारतीय महिलाओं में इसको लेकर जागरूकता नहीं है तथा इसकी रोकथाम के उपाय भी जो करने चाहिए नहीं हो पा रहे हैं। अतएव इस ओर प्रयास करना तथा आसिटयोपोरोसिस को रोकने का प्रयास, आसिटयोपोरोसिस से ग्रस्त रोगियों का उपयुक्त उपचार तथा समाज में आसिटयोपोरोसिस के विषय में जागरूकता उत्पन्न करना यह हमारा प्राथमिक प्रयास होना चाहिए। यह उदगार प्रख्यात स्त्री रोग तथा आर्इ.वी.एफ. विशेषज्ञा डा. वन्दना बंसल ने बुधवार शाम आसिटयोपोरोसिस और उससे बचाव विषय पर इलाहाबाद लेडीज क्लब द्वारा आहूत संगोष्ठी के अवसर पर व्यक्त किये।

डा. वन्दना बंसल ने आसिटयोपोरोसिस की वृद्धि तथा पीडि़त लोगों की चर्चा करते हुए बताया कि आसिटयोपोरोसिस का खतरा मीनोपाज वाली महिलाओं तथा अधिक उम्र के लोगों को ज्यादा होता है, डा. बंसल ने बताया कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है हडिडयाँ कमजोर होने लगती हैं तथा उचित खान-पान तथा व्यायाम के अभाव में आसिटयोपोरोसिस होने लगती है।

डा. बंसल ने कहा कि सर्वेक्षण के आँकड़े बताते हैं कि पशिचमी देशों में आसिटयोपोरोसिस अधिक उम्र में करीब 70-80 वर्ष की उम्र में होती है, जबकि भारत में यह 10-20 वर्ष पहले यानि 50-60 वर्ष की उम्र के लगभग होने लगती है। उन्होंने बताया कि एक अनुमान के अनुसार तकरीबन 300 मिलियन लोग इस रोग से किसी-न-किसी स्टेज पर पीडि़त हैं।

महिलाओं में जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है इस्ट्रोजेन हार्मोन का स्तर कम होने लगता है तथा आसिटयोपोरोसिस का खतरा बढ़ने लगता है। जो महिलाएं गर्भ निरोधक गोलियाँ लेती हैं, उनमें आसिटयोपोरोसिस का खतरा कम होता है क्योंकि ज्यादातर गोलियों में इस्ट्रोजेन की मात्रा पायी जाती है।


डा. बंसल ने इससे बचाव के तरीके बताए। शारीरिक व्यायाम का आसिटयोपोरोसिस के रोकने में अत्यन्त महत्वपूर्ण रोल है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर ऐसा होता है कि उम्र बढ़ने के साथ लोग व्यायाम तथा चलना-फिरना आदि का कम कर देते है। ऐसा करना हानिकारक सिद्ध होता है। अत: सुबह-शाम की सैर तथा अन्य व्यायाम बढ़ती उम्र में आसिटयोपोरोसिस को रोकने में मददगार सिद्ध होते हैं। उन्होंने महिलाओं में रजोनिवृतित को उम्र को एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए उन्होंने इस उम्र में आसिटयोपोरोसिस के प्रति सजगता तथा इसके रोकथाम हेतु प्रयास को अत्यन्त आवश्यक बताया।

डा. वन्दना बंसल ने कहा कि कम उम्र की महिलाएं विशेषकर बचिचयों को शारीरिक व्यायाम, खेलकूद आदि शारीरिक श्रम वाली गतिविधियों को अपनी दिनचर्या में शामिल करना, उच्च कैलिशयम वाले आहार आदि लेना, सुबह की धूप में सैर आदि बढ़ती उम्र में होने वाले आसिटयोपोरोसिस के खतरे को कम करती है। उन्होंने कहा कि बच्चे जब बढ़ रहे हों तो उनपर किशोरावस्था में ध्यान देने की अधिक जरूरत है, जिससे कि उनके शरीर में पर्याप्त ऊर्जा तथा असिथयों का विकास हो सके।

कार्यक्रम की शुरूआत में लेडीज क्लब की अध्यक्षा श्रीमती पदमा टण्डन ने अतिथियों तथा सभा में मौजूद लोगों का स्वागत किया। लेडीज क्लब, इलाहाबाद की सचिव श्रीमती कीर्ति टण्डन, संयुक्त सचिव श्रीमती वर्षा अग्रवाल सहित तमाम गणमान्य लोग कार्यक्रम के दौरान मौजूद रहे। डा. शानित चौधरी ने कार्यक्रम में आये अतिथिगण का स्वागत किया तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमती वर्षा अग्रवाल और डा. शानित चौधरी ने की।

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