Sunday, February 25, 2018

 


नई दिल्ली : पूर्व विदेश सचिव सुजाता सिंह को उनके रिटायर होने से पहले ही पद से हटा दिया गया। सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले 6 महीनों से विदेश मंत्रालय और खासकर पूर्व विदेश सचिव सुजाता सिंह के नेतृत्व से नाखुश थे क्योंकि वह पीएम के बड़े हितों से तालमेल नहीं बैठा पा रही थीं। साथ ही, जरूरी सुधारों के प्रति सुजाता सिंह की असमर्थता और अनिच्छा ने उनके और पीएमओ के रास्ते अलग कर दिए।

सुजाता सिंह और पीएमओ के बीच समस्याएं तब शुरू हुईं, जब ब्रिक्स समिट डिक्लेरेशन के एक पैराग्राफ में इज़राइल की आलोचना की गई। इस समिट से पहले पीएम मोदी इज़राइल को एक प्राथमिक पार्टनर घोषित कर चुके थे।

इसके बाद भारत ने UNHRC में इज़राइल के खिलाफ वोट दिया, जो विदेश मंत्रालय के पारंपरिक उद्देश्यों के मुताबिक तो था लेकिन नई सरकार के स्टैंड से बिल्कुल अलग था। सितंबर में हुई पीएम मोदी की जापान यात्रा के संबंध में भी पीएमओ का यही कहना था कि सुजाता सिंह यहां भी यात्रा के परिणामों के साथ चलने में नाकाम रहीं। इन सबका नतीजा यह हुआ कि जिन रिश्तों में मोदी ने काफी मेहनत की थी, उनकी रफ्तार धीमी होती गई।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और सुजाता सिंह के बीच अच्छी रिलेशनशिप हो गई थी। हालांकि इनमें से किसी के भी पीएमओ के साथ अर्थपूर्ण रिश्ते नहीं थे, जिस वजह से विदेश नीति से जुड़े अहम फैसलों में विदेश मंत्रालय की उपेक्षा होनी शुरू हो गई।

गुरुवार को सुषमा स्वराज ने ट्वीट करके जानकारी दी थी कि सुजाता सिंह की जगह जयशंकर को विदेश सचिव बनाया गया है। जब से मोदी ने ओबामा को गणतंत्र दिवस का निमंत्रण दिया था, तभी से सुजाता सिंह को बता दिया गया था कि उनकी जगह किसी और को लाया जा सकता है।

 

साभार: नव भारत टाइम्स 

 

 

 

 

National

 

नई दिल्ली : यूपीए सरकार में पर्यावरण मंत्री रहीं जयंती नटराजन ने कांग्रेस छोड़ दी है। उनके द्वारा सोनिया गांधी को लिखा लेटर मीडिया में आने के बाद शुक्रवार दोपहर उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र की कमी की बात भी उठाई।

जयंती नटराजन ने कहा, 'मैंने पार्टी की हर बात मानी, मगर मुझे क्यों हटाया गया था, कुछ पता नहीं। अभी मेरा किसी और पार्टी को जॉइन करने का इरादा नहीं है।' कांग्रेस हाई कमान पर हमला करते हुए जयंती ने कहा कि राज्य कांग्रेस से कोई विवाद नहीं। समस्या हाई कमान से है। मुझे मैडम सोनिया गांधी से मिलने का वक्त नहीं दिया गया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में ही जयंती ने कांग्रेस से अपने रिश्ते की बात कही। उन्होंने कहा कि मेरे लिए ये दर्द भले पल हैं क्योंकि मेरा परिवार कांग्रेस के साथ इसके गठन के वक्त से है। हालांकि उन्होंने यह कहते देर नहीं लगाई कि अब वक्त आ गया है जब मुझे कांग्रेस से जुड़े होने पर पुनर्विचार करना पड़ेगा। यह कांग्रेस वह नहीं है, जिसके साथ मैं जुड़ी थी।

पर्यावरण मंत्री के पद से हटाए जाने पर जयंती ने बोला, मैंने मंत्री के रूप में हर कदम कानून के मुताबिक और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए उठाया। मैंने अपना काम पूरी ईमानदारी से किया।' इसके अलावा 'कांग्रेस उपाध्यक्ष के ऑफिस ने भी कहा कि बड़े प्रॉजेक्ट्स की वजह से पर्यावरण का नुकसान नहीं होना चाहिए। पार्टी का भी यही रुख था। ऐसे में मैंने यही किया।'

जयंती ने कहा कि पार्टी लाइन पर चलने के बावजूद मुझे मंत्री पद से इस्तीफा क्यों दिलवाया गया, यह मुझे आज तक समझ में नहीं आया। 'जब मैंने इस्तीफा दिया था, प्रधानमंत्री ने मेरे काम की तारीफ की थी। कोई गलती या कमी नहीं गिनाई गई थी।'

लोकसभा चुनाव के पहले नरेंद्र मोदी ने पर्यावरण मंत्रालय को लेकर 'जयंती टैक्स' कहकर तंज कसा था। इस पर जयंती नटराजन ने कहा, 'पीएम मोदी ने 'जयंती टैक्स' की बात की थी। अब वह सरकार में हैं, इसकी जांच करवा लें। मैं इसका स्वागत करती हूं।'

 

साभार: नव भारत टाइम्स 

 

 

 

 

National

  


वाराण्‍ासी/गाजीपुर/श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर के त्राल में आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद हुए कर्नल मुनेंद्र नाथ राय की सेना प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग ने भी तारीफ की है। सुहाग ने बुधवार को कहा, ''यह आगे बढ़कर नेतृत्व करने का बेहतरीन उदाहरण है।'' बता दें कि 42 राष्ट्रीय राइफल्स के कमांडिंग अफसर 39 वर्षीय राय और जम्मू पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल संजीव कुमार सिंह पुलावामा जिले में मंगलवार को एक एंटी टेररिस्ट ऑपरेशन के दौरान शहीद हो गए थे। इस कार्रवाई में दो आतंकी भी मारे गए थे। राय को एक दिन पहले ही रिपब्लिक डे के मौके पर युद्ध सेवा मेडल दिए जाने का एलान भी किया गया था। 

'आतंकियों ने धोखे से मारा'
सेना के प्रवक्ता की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, आतंकियों के मौजूद होने की खबर मिलने के बाद कर्नल राय, संजीव कुमार सिंह और अन्य सुरक्षाकर्मी श्रीनगर से 36 किमी दूर मिंडोरा गांव पहुंचे थे। कर्नल मुनेंद्र नाथ राय को खबर मिली थी कि हिजबुल मुजाहिदीन का एक स्थानीय आतंकवादी अपने एक सहयोगी के साथ आया हुआ है। जब इलाके की घेराबंदी हो गई तो मारे गए आतंकियों में से एक के पिता और भाई राय के पास पहुंचे और दावा किया कि आतंकी सरेंडर करना चाहते हैं। हालांकि, जब राय ने उन्हें ऐसा करने का मौका दिया तो आतंकियों ने घर से निकलते वक्त अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। इसके बाद, छिड़ी मुठभेड़ में आतंकी मारे गए लेकिन राय और सिंह शहीद हो गए। मारे गए आतंकवादियों की पहचान मिंडोरा के रहने वाले आदिल खान और शिराज डार के रूप में हुई है। मुठभेड़ के स्थान से हथियार और गोला-बारूद बरामद हुए हैं। मुठभेड़ में सेना का एक अफसर, एक जवान और पुलिसकर्मी घायल भी हो गए।

 

'राय ने बदला घाटी का माहौल'
चिनार कॉपर्स के जनरल कमांडिंग अफसर लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रत साहा ने बताया कि 2014 में भी कर्नल राय ने आतंकियों के खिलाफ चलाई गई कई मुहिम में फ्रंट से लीड किया। साहा के मुताबिक, राय आतंकियों के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशंस में महारत हासिल थी। उनके सटीक ऑपरेशंस का ही नतीजा था कि कई मौकों पर मुठभेड़ के दौरान आम लोगों की जानमाल का खतरा डाला जा सका। इसके अलावा, राय घाटी के युवाओं के लिए कई सकारात्मक पहल करने वाले अफसरों में गिने जाते हैं। उन्होंने युवाओं के लिए क्रिकेट और फुटबॉल टूर्नामेंट भी कराए। साहा ने यह भी कहा कि यह राय की कोशिशों का ही नतीजा था कि त्राल में हालात बदल रहे थे, जिसका एक उदाहरण हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में हाई वोटिंग पर्सेंटेज के तौर पर भी नजर आया। 
 
गाजीपुर में होगा अंतिम संस्कार 
राय का अंतिम संस्कार गुरुवार को उनके पैतृक निवास गाजीपुर (उत्‍तर प्रदेश) में किया जाएगा। पहले सूचना थी कि शहीद कर्नल का अंतिम संस्कार दिल्ली में होगा। उनके पिता पिता नागेंद्र राय का कहना है कि आतंकवादियों ने गोली मार कर उनके बेटे की बहादुरी का अपमान किया है। इस बीच, उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव ने शहीद मुनेंद्र के परिवार को 30 लाख रुपए आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। कर्नल मुनेंद्र नाथ राय का जन्म गाजीपुर के सुहवल थाना डेढ़गांवा गांव में हुआ था। हालांकि, उनके परिजन पिछले कई सालों से चंदननगर कॉलोनी में रहते हैं। मुनेंद्र नाथ तीन भाइयों में सबसे छोटे थे। उनके दो बड़े भाई भी सेना में ही उच्च पदों पर हैं। उनके पिता प. बंगाल के दार्जिलिंग से प्राचार्य पद से रिटायर होकर गाजीपुर में ही रहते हैं। शहीद कर्नल का एक बेटा और दो बेटियां हैं।
साभार: दैनिक भास्कर

 

 

 

National

  


नई दिल्ली। किरण बेदी को लाकर सीएम उम्‍मीदवार और पार्टी का चेहरा घोषित करने के बाद दिल्‍ली प्रदेश भाजपा में पनपे अंसतोष के चलते शीर्ष नेतृत्व ने रणनीति में बदलाव किया है। इसके तहत स्‍थानीय नेताओं के बजाय केंद्रीय मंत्रियों को अहम जिम्‍मेदारियां सौंपी गई हैं। हालांकि, पिछले चुनाव में पार्टी का चेहरा रहे और केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री हर्षवर्धन को दूर रखा गया है। अरुण जेटली को मोदी की रैली की सफलता की जिम्‍मेदारी दी गई है। खबर यह भी आ रही है कि दिल्ली में बीजेपी कैंपेन की पूरी कमान जेटली को सौंप दी गई है। सूत्रों का कहना है कि बुधवार से जेटली दिल्ली प्रदेश बीजेपी दफ्तर में मौजूद रहेंगे। कोयला मंत्री पीयूष गोयल को बिजली को लेकर किए जा रहे 'आप' के दावों की काट निकालने के लिए कहा गया है।
 
पार्टी नेतृत्व ने प्रदेश भाजपा नेताओं की रैलियों के आयोजन को छोड़कर किसी काम की जिम्मेदारी नहीं सौंपी है। हाल ही में पूर्वी दिल्ली में हुई एक बैठक में कुछ कार्यकर्ताओं ने टिकटों के बंटवारे को लेकर सवाल कर दिए थे। इन सवालों का सटीक जवाब देने में भाजपा की मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार किरण बेदी असमर्थ रही थीं। इसी बैठक के बाद प्रदेश नेताओं की गुटबाजी और कार्यकताओं के बीच पनपते असंतोष को भांपते हुए प्रदेश इकाई के नेताओं को जिम्मेदारियों से दूर कर दिया गया और केंद्रीय मंत्रियों को लाया गया।
 
पार्टी ने 'आप' की स्थिति के अपने अंदरूनी आकलन के बाद भी रणनीति में बदलाव का फैसला किया। टीवी सर्वे में 'आप' को बढ़त मिलते दिखाए जाने और क्षेत्र में 'आप' की रैलियों का आकलन करने के बाद भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री राम लाल ने खुद पूरे चुनावी प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल ली और मीडिया को संभालने की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण को सौंप दी गई। अल्पसंख्यकों को साधने के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री शाहनवाज हुसैन को लगाया गया।
 
पार्टी के 14 कैबिनेट मंत्रियों को 14 जिलों की कमान सौंपी गई है। इनके अलावा राज्य मंत्रियों सहित दूसरे मंत्रियों को सभी 70 विस क्षेत्रों की अलग-अलग जिम्मेदारी सौंपी गई है। ये सभी चुनाव होने तक दिल्ली में रहकर प्रचार से लेकर चुनाव प्रबंधन तक की सभी जिम्मेदारियां निभाएंगे।
 
'आप' नेता इन मंत्रियों को दिल्ली चुनाव में लगाने के भाजपा नेतृत्व के निर्णय को मुद्दा बनाने की रणनीति पर विचार कर रहे हैं। केजरीवाल व उऩकी पार्टी के नेताओं ने केंद्रीय नेताओं के संसदीय क्षेत्रों में किए जाने वाले कामकाज को छोड़कर दिल्ली विस चुनाव में पार्टी के लिए प्रचार करने को हितों के टकराव का मुद्दा बनाने का मन बनाया है।
 
 
इन केंद्रीय मंत्रियों को सौंपी गई है दिल्ली चुनाव की जिम्मेदारी
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा को करोलबाग, पीयूष गोयल को चांदनी चौक, कृष्णलाल गुर्जर को मयूर विहार, महेश शर्मा को शाहदरा, कैलाश विजयवर्गीय को केशवपुरम, धर्मेंद्र प्रधान को नई दिल्ली, डॉ.संजीव बालियान को बाहरी दिल्ली, मुख्तार अब्बास नकवी को नवीन शाहदरा, शयाम जाजू को उत्तर पूर्वी, अनुराग ठाकुर को पश्चिमी दिल्ली, भूपेंद्र यादव को नजफगढ़, थावर चंद गहलोत को मेहरौली, अनंत कुमार को दक्षिणी दिल्ली और राधामोहन सिंह को उत्तर पश्चिमी जिला की कमान सौंपी गई है।
 
मोदी करेंगे तीन रैलियां 
 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी दिल्ली में चार चुनावी रैलियों को संबोधित करेंगे। 31 जनवरी से 4 फरवरी के बीच कड़कड़डूमा, द्वारका, रोहिणी और अंबेडकर नगर में मोदी की रैली होगी। वरिष्ठ बीजेपी नेता और कैबिनेट मंत्री अरुण जेटली को इन रैलियों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
 
31 जनवरी को कड़कड़डूमा की रैली में बीजेपी के 17 उम्मीदवार मौजूद रहेंगे, जबकि द्वारका की रैली में 12 उम्मीदवार शरीक होंगे। 1 फरवरी को द्वारका में सेक्टर 14 के डीडीए ग्राउंड में बीजेपी की रैली होगी। 3 फरवरी को रोहिणी के जापानी पार्क में मोदी एक रैली को संबोधित करेंगे जबकि 4 फरवरी को अंबेडकरनगर में मोदी की चौथी रैली होगी।
साभार: दैनिक भास्कर 

 

 

 

National

 


पुणे : प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट आरके लक्ष्मण मंगलवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। महाराष्ट्र सरकार ने राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार कराया। इस अवसर परमहाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने उनके नाम पर एक स्मारक बनाए जाने की घोषणा की।

लक्ष्मण को श्रद्धांजलि देने मंगलवार को यहां पहुंचे फड़णवीस ने कहा, 'लक्ष्मण सिर्फ एक कार्टूनिस्ट नहीं थे। उन्होंने अपने कार्टून के माध्यम से जो कहा, वह भावी सरकारों को प्रेरित करेगा। वह नहीं रहे, लेकिन उनके द्वारा बनाया गया 'द कॉमन मैन' हमेशा जिंदा रहेगा।'

बेहतरीन कार्टूनिस्ट व व्यंग्यकार लक्ष्मण (94) का बीमारी की वजह से सोमवार को एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। बैकुंठ श्मशानघाट में मंगलवार दोपहर पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार हुआ।
फड़णवीस के अलावा उनके मंत्रिमंडल के कुछ सहयोगी, शिव सेना के प्रमुख उद्धव ठाकरे, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेता राज ठाकरे तथा अन्य लोग भी लक्ष्मण को श्रद्धांजलि देने पुणे के एक निजी कॉलेज पहुंचे, जहां उनका शव लोगों के अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था।

अंग्रेजी के दिवंगत प्रख्यात उपन्यासकार आरके नारायणन के भाई लक्ष्मण के घर में पत्नी कमला, सेवानिवृत्त पत्रकार बेटा श्रीनिवास तथा पुत्रवधु उषा हैं। उन्हें मूत्रनली में संक्रमण और फेफड़े की समस्या के कारण 16 जनवरी को पास के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

उनके स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं होने पर उन्हें दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल में भर्ती कराया गया। लक्ष्मण के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था।

 

साभार: नव भारत टाइम्स

 

 

 

 

National

  

The landmark visit of President Obama to India  will be regarded as memorable for more reasons than one. It was the first visit of any American head of state to attend  India’s grand Republic Day parade . And Obama turned out to be the only US President who visited any country twice during the same tenure—a distinction which India alone enjoys now. But  bigger than these two ‘firsts’ was the fact that the visit was marked by several momentous agreements, to say nothing of the fact that the three-day visit of the American President with the first lady passed off peacefully. The president had to cancel his Agra visit because he had to rush to Saudi Arabia to attend a condolence meeting to mourn for the late King who passed away recently. .
A major  highlight of the visit was  that within hours of Obama's landing in Delhi, he and  Prime Minister Narendra Modi   announced  that the obstacles to operationalising the Indo-US nuclear deal had been resolved with both sides agreeing   to create a national nuclear insurance pool from which nuclear vendors would be able to buy coverage against a potential claim by a nuclear operator against them. The insurance pool method to tackle issues arising out of liability legislation has been followed in at least 26 nuclear contracts in the United States and France.
 Thus the  nuclear suppliers would be indemnified and there would be no need to modify India's controversial 2010 Civil Liabilities for Nuclear Damage Act. It may be recalled that there was a nuclear impasse  after the agreement between India and the United States in 2008 on civilian nuclear cooperation was signed  because  New  Delhi had to put in place a nuclear liability regime as per international norms. Until then, it was simply assumed that any nuclear accident in India would be compensated for by the government. However, India's nuclear liability law ran afoul of international custom of making the operator solely responsible financially for any accident. India’s argument has been that   the lessons of the Union Carbide gas leak in Bhopal in 1984 should not be forgotten and that an nuclear suppliers should be held accountable for the quality of their wares. It is not yet known how receptive nuclear vendors will be to the understanding between Modi and Obama. Hence for now, more details and reactions are awaited before there can be complete clarity on what exactly the declared nuclear breakthrough entails.

 Another highlight of the visit was  the  meeting  of  the US-India  Business Council which the two leaders addressed jointly and which was  attended by top corporate leaders of both the countries. It was here that   Modi  promised an open business environment, predictable tax regime and to remove "remaining uncertainties" as President Barack Obama raised issues of trade barriers and intellectual property while seeking ease of doing business in India. It was here that Obama  pledged US $4 billion in lending by US banks and expressed America’s readiness  to help India grow by working with it in development of infrastructure like railways, ports, roads and clean energy power plants expressing at the same time the   need to streamline regulations, cut the red tape and jump through bureaucracy. Modi  assured the entrepreneurs:"You will find environment that is not only open, but also welcoming. We will guide you and walk with you in projects. You will find a climate that encourages investment and rewards enterprise. It will nurture innovation and protect your intellectual property’.  Obama responded by saying:’   "We need to incentivise trade rather than stifle it” He said: "We can work together to develop new technologies to help India leap forward and partner in next generation clean energy projects and upgrade railways, roads, ports, airports and broadband connectivity to provide best connectivity to the world."  Modi even assured the tycoons that he would personally monitor big projects that might be launched. Encouraging indeed. But how soon and how far these assurances are turned into reality will indeed be   eagerly awaited.  Doubts may arise because this is Obama’s last year in office and he is heading almost a lame-duck  regime.  Whether  the ‘Hotline’ link between White House and Modi lasts  when Obama’s successor reaches there remain ns to be seen. 

 

 

 

National

  


नई दिल्ली. अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का तीन दिवसीय भारत दौरा मंगलवार को खत्म हो गया। दिल्ली के पालम हवाई अड्डे से उनके एयरफोर्स वन विमान ने सऊदी अरब के लिए उड़ान भरी।  व्हाइट हाउस ने इस सफल दौरे के लिए पीएम मोदी और भारतीय जनता को धन्यवाद दिया। वहीं, मोदी ने भी ट्वीट करके उनके सफल यात्रा की कामना की। ऐसे में जब अमेरिकी राष्ट्रपति का दौरा खत्म हो चुका है, ये सवाल उठने लाजिमी हैं कि भारत को क्या हासिल हुआ। जानकार मानते हैं कि इस दौरे से जितना कुछ भारत को मिला, उतना ही यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए भी फायदेमंद रहा। बराक ओबामासे निकटता ने उनकी ग्लोबल इमेज को एक नया मुकाम दिया है। अपने ट्वीट में पीएम मोदी ने भी कहा कि दोनों देशों के बीच आपसी रिश्ते नई ऊंचाई पर पहुंच चुके हैं। ओबामा का दौरा खत्म होते ही मोदी ने ट्वीट किया 'आपके (ओबामा) दौरे से भारत-अमेरिका के रिश्ते नए स्तर पर पहुंच चुके हैं और नए अध्याय की शुरुआत हुई है।'

 

ओबामा-मोदी ने तय से कहीं ज्यादा वक्त बिताया साथ 

 

आज ओबामा और मोदी के दोस्ती की भारत ही नहीं अमेरिका में भी चर्चा है। अमेरिका के डिप्टी नेशनल सेक्युरिटी एडवाइजर बेन रोड्स का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के तीन दिन  के दौरे के दौरान बराक ओबामा ने मोदी के साथ तय से ज्यादा वक्त बिताया। दोनों ने इतना वक्त साथ बिताया कि उतने देर साथ रहने के बारे में व्हाइट हाउस तक ने नहीं सोची थी। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं की व्यक्तिगत कहानी काफी हद तक एक दूसरे से मिलती जुलती है। विश्व को लेकर दोनों का नजरिया भी एक जैसा है। रोड्स ने कहा कि इन मुलाकातों से आपसी सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे। आपसी मुलाकात और दोस्ती के जिक्र पर पीएम मोदी ने भी हैदराबाद हाउस में कहा था कि बड़े देशों के नेताओं के बीच आपसी मुलाकात और आपसी रिश्ते कारगर साबित हो सकते हैं। 

 

 

 

भारत के प्रति बदला है ओबामा का नजरिया

 

ओबामा के तीन दिन के दौरे की सफलता का श्रेय लेखक और विश्लेषक शंकर अय्यर पीएम मोदी और उनकी सरकार को देते हैं। पिछली साल सितंबर महीने में अमेरिकी दौरे के दौरान ही मोदी ने ओबामा के इस दौरे का खांका तैयार कर दिया था। न्यूक्लियर डील पर सहमति की शुरुआत हो या फिर निवेश लाने की कोशिश, पीएम मोदी ने आगे बढ़ कर सभी मुद्दों का नेतृत्व किया। अय्यर कहा कि पिछली सरकार की निष्क्रियता के कारण 2010 में जब ओबामा भारत आए थे तो भारत को बहुत ज्यादा कुछ हासिल नहीं हो सका था। हालांकि, अटल बिहारी वाजपेयी ने क्लिंटन के साथ ठीक उसी तरह का संबंध की शुरूआत की, जैसा कि आज पीएम मोदी और ओबामा के बीच है। अपना अंतिम कार्यकाल पूरा कर रहे ओबामा अपनी लेगसी छोड़ कर जाना चाहते हैं इसलिए वह पिछली बातों को नहीं दोहरा रहे हैं जो वह अपने पहले कार्यकाल में कहा करते थे। इसका असर अमेरिकी निवेशकों पर भी पड़ा है। अय्यर के मुताबिक, इससे पहले यहां के वित्त मंत्री अमेरिका जाते थे तो वहां की कंपनियों के सीईओ मुलाकात को तैयार नहीं होते, अगर मुलाकात करते भी तो केवल निवेश को लेकर होने वाली अड़चनों की शिकायत करते थे। लेकिन मोदी ने देश की छवि बदलने की कोशिश की और अमेरिकी कंपनियों को विश्वास दिलाया कि देश में चीजें बदल रहीं हैं और निवेश के अवसर बढ़ रहे हैं। 
 
'मोदी की स्थाई सरकार पर ज्यादा भरोसा कर रहा है अमेरिका'
अमेरिका भारत को आज नई नजर से देख रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण देश में स्थायी सरकार बनना जो अपने हिसाब से फैसले लेने में सक्षम है। राजनीतिक विश्लेषक कंचन गुप्ता का कहना है कि पिछली सरकार में अंदरुनी स्थिरता नहीं थी, जोकि बदले हालात में आज मोदी सरकार की सबसे बड़ी ताकत बन रही है। पिछली सरकार में खींचतान और गठबंधन की सरकार होने के कारण नीतिगत फैसले लेने में मुश्किलें होती थीं, जो कि मोदी सरकार के साथ नहीं है। 

साभार: दैनिक भास्कर

 

 

 

 

National

  


नई दिल्ली: भारत दौरे पर आए अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और पीएम नरेंद्र मोदी सोमवार शाम दोनों देशों की टॉप कंपनियों के सीईओ की बैठक में शामिल हुए। बैठक का मकसद दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को नई ऊंचाईयों पर ले जाना था। दोनों नेताओं ने कुछ अहम एलान किए। इसी क्रम में भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि वह बड़े प्रोजेक्ट्स को खुद मॉनिटर करेंगे। मोदी ने बेहतर टैक्सि कानूनों का भी भरोसा दिलाया। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत में चार अरब डालर के कारोबारी निवेश का एलान किया। ओबामा ने कहा कि दोनों देश मिलकर विकास और समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। ओबामा ने दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को 'स्वाभाविक' बताते हुए भरोसा दिलाया कि वह H-1B वीसा समेत अन्य अहम मुद्दों पर विशेष ध्यान देंगे। जानें बैठक से जुड़ी अहम बातें: 

 

*पीएम ने दोनों देशों के उद्योगपतियों से इन्फ्रास्ट्रक्चर और कृषि के क्षेत्र में बेशुमार निवेश की अपील की ताकि भारत की परचेजिंग पावर बढ़े। मोदी ने कहा कि भारत पूरे विश्व को एक परिवार मानता है और सहयोग पर भरोसा करता है। 

 

*मोदी बोले-यह जानना बेहद अहम है कि सरकार कैसे काम करे, इस दिशा में निवेशक क्या सोचते हैं? पीएम ने समस्याएं उठाने के लिए बिजनेस कम्युनिटी के लोगों का धन्यवाद दिया। 

 

*पीएम मोदी ने कहा कि बिजनेस कम्युनिटी की सभी समस्याओं का हल गुड गवर्नेंस है। बिजनेस करने के माहौल को बेहतर बनाने की दिशा में सरकार काम कर रही है। 

 

*प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य सवा सौ करोड़ भारतीयों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाना है और उसकी सभी योजनाओं में यही प्राथमिकता है।

 

*अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा ने कहा कि दोनों देशों के बीच स्वाभाविक रिश्ते हैं। ओबामा ने कहा, '' मैं इस बात से उत्साहित हूं कि न केवल अमेरिका भारत में निवेश कर रहा है, बल्कि बहुत सारे भारतीय भी अमेरिका में निवेश कर रहे हैं।''

 

*ओबामा ने कहा, ''मोदी और मैं हितैषी कानूनों के पक्षधर हैं।'' ओबामा ने कहा कि ग्रोथ सिर्फ जीडीपी में नहीं मापी जाती। आम लोगों के जिंदगी को बेहतर बनाना भी इसमें शामिल है। ओबामा ने कहा, ''दोनों देश मिलकर ऐसी तकनीक डिवलप कर सकते हैं, जो भारत को आगे ले जाए।''

 

*ओबामा का एलान- अमेरिका का एग्जिम बैंक विभिन्न प्रोजेक्ट्स के लिए देगा 1 अरब डॉलर। यूएस ट्रेड एंड डेवलपमेंट एजेंसी भी रिनुअल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए 2 अरब डॉलर देगा। इसके अलावा, यूएस का ओवरसीज प्राइवेट इनवेस्टमेंट कार्पोरेशन भारत के पिछड़े ग्रामीण क्षेत्र में छोटे तथा मध्यम उद्योगों के लिए एक अरब डॉलर का कर्ज देगा।  

 

*ओबामा ने कहा कि पिछले कुछ सालों में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार 60 प्रतिशत बढ़कर 100 अरब डॉलर पर पहुँच गया है। बता द अमेरिका भारत में निवेश करने वाला छठा सबसे बड़ा देश है। अमेरिका की योजना 2025 तक दोनों देशों के बीच दि्वपक्षीय व्यापार को 500 बिलियन डॉलर के लक्ष्य तक पहुंचाना है। 

 

*पीएम मोदी के महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट 'मेक इन इंडिया' को केंद्र में रखकर इस बैठक का आयोजन किया गया। दि्वपक्षीय बिजनेस रिश्तों के लिए बेहतर माहौल बनाने के मुद्दे पर चर्चा हुई।

 

*अमेरिका के 30 बिजनेस लीडर्स इस बैठक में शामिल हुए। इनमें पेप्सिको की इंद्रानी नूई, मैकग्रा हिल फायनेंशल कंपनी के चेयरमैन हैरोल्ड मैकग्रा, मास्टरकार्ड के सीईओ अजय बग्गा भी शामिल हैं। 

 

*भारत की ओर से 17 सीईओ इस बैठक में शामिल हुए। इसमें टाटा सन्स के साइरस मिस्त्री, रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुकेश अंबानी और उनके छोटे भाई अनिल अंबानी, भारतीय ग्रुप के सुनील मित्तल, आईसीआईसीआई की चंदा कोचर आदि भी शामिल हैं। 

 

*2013-2014 में दोनों देशों के बीच दि्वपक्षीय व्यापार 61.64 बिलियन डॉलर का रहा। अप्रैल 2000 से नवंबर 2014 के बीच भारत को अमेरिका से एफडीआई के तौर पर 13.28 बिलियन डॉलर का निवेश मिला।

साभार: दैनिक भास्कर

 

 

 

 

National


नई दिल्ली : अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने भारत दौरे के आखिरी दिन दिल्ली के सीरी फोर्ट ऑडिटोरियम में बेहद जोशीला भाषण दिया।  ओबामा ने भारत और अमेरिका को मजबूत पार्टनर बताते हुए कहा कि भविष्य की चुनौतियों से दोनों देश एक साथ निबटेंगे। 'नमस्ते' से भाषण की शुरुआत और 'जय हिंद' से अंत करने वाले ओबामा भारतीय संस्कृति से जुड़े प्रतीकों और हस्तियों का जिक्र करना नहीं भूले, जिससे उनका भाषण काफी प्रभावी बन पड़ा।

उन्होंने कहा,'हाल के वर्षों में भारत ने किसी अन्य देश के मुकाबले अधिक लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है। हम भारत की स्वच्छ ऊर्जा की आवश्यकताओं को पूरा करने के महत्वकांक्षी लक्ष्यों का स्वागत करते हैं और इसमें मदद करने के लिए तैयार हैं।' धर्म पर बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा ने कहा, 'महात्मा गांधी कहते थे कि सभी धर्म एक ही पेड़ के फूल हैं। धर्म का गलत इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। धर्म के नाम पर नहीं बंटेगा तो भारत जरूर तरक्की करेगा।'

'नमस्ते' से भाषण की शुरुआत
अमेरिकी राष्ट्रपति की पत्नी मिशेल ओबामा पहले ऑडिटोरियम में आईं। ओबामा कुछ देर बाद वहां पहुंचे और मंच संभालते ही उन्होंने कहा, 'नमस्ते।' काफी सहज और ऐक्टिव नजर आ रहे ओबामा ने हिंदी में धन्यवाद भी कहा। उन्होंने कहा, 'मैं भारत के रिपल्बिक डे सेरिमनी में शिरकत करने वाला पहला अमेरिकी राष्ट्रपति हूं। मुझे इस बात का गर्व है।'

'मेरे भारतीय भाइयो और बहनो'
ऑडिटोरियम में मौजूद करीब 2 हजार लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि पिछली बार वह दिवाली पर भारत में थे और उन्होंने मुंबई में बच्चों के साथ डांस किया था। उन्होंने कहा कि इस बार मैं डांस करने का वक्त नहीं निकाल पाया। भाषण की शुरुआत में उन्होंने कहा, 'सौ से ज्यादा साल पहले अमेरिका ने भारत के बेटे स्वामी विवेकानंद का स्वागत किया था। उन्होंने भाषण शुरू करने से पहले संबोधित किया था- मेरे प्यारे अमेरिकी भाइयो और बहनो। आज मैं कहता हूं- मेरे प्यारे भारतीय भाइयो और बहनो।' यह सुनकर ऑडिटोरियम तालियों से गूंज उठा।

DDLJ का डायलॉग बोलने की कोशिश
इसके बाद ओबामा ने कहा कि वह बाइक की सवारी करना चाहते थे, लेकिन सीक्रिट सर्विस ने उन्हें इसकी इजाजत नहीं दी। दरअसल कल गणतंत्र दिवस की परेड के दौरान बीएसएफ के जवानों द्वारा मोटरसाइकल पर किए स्टंट्स से वह काफी प्रभावित हुए थे। इसके बाद उन्होंने फिल्म डीडीएलजे का डायलॉग बोलने की कोशिश की। उन्होंने कहा, 'बड़े-बडे़ देशों में.... (डायलॉग भूल गए).... आप समझ गए होंगे कि मैं क्या कहना चाहता हूं।'

'भारत हमारा बेस्ट पार्टनर'
इसके बाद ओबामा ने भारत के साथ अमेरिका के रिश्तों पर बात करना शुरू किया। भारत को बेस्ट पार्टनर बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका की दोस्ती लंबे समय तक बनी रह सकती है। उन्होंने कहा, 'गर्व है कि अमेरिका में 30 लाख भारतीय हैं जों हमें जोड़े रखते हैं। हमारी दोस्ती सहज है। हम आगे भी हर क्षेत्र में एक दूसरे के साथ बढ़ते रहेंगे।' अमेरिका ने एशिया पसिफिक में भारत की वृहद भूमिका का स्वागत किया और कहा कि विवादों का समाधान शांतिपूर्ण ढंग से किया जाना चाहिए।

'हम हर संभव मदद करेंगे'
ओबामा ने यह भी कहा कि अमेरिका संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत को स्थाई सदस्य के रुप में शामिल किए जाने का समर्थन करता है। इसके अलावा उन्होंने भारत की उम्मीदों पर भी बात की। उन्होंने कहा, 'हम भारत की स्वच्छ उर्जा की जरूरतों को पूरा करने के लक्ष्यों का स्वागत करते हैं। हम इसमें हर संभव मदद करने के लिए भी तैयार हैं।'

'धार्मिक आधार पर न बंटे भारत'
ओबामा ने कहा कि हमारे देशों ने मिलकर आतंकवाद को झेला है, इसलिए साथ चलने की जरूरत है। उन्होंने कहा, 'भारत व्यापक विविधता के साथ अपने लोकतंत्र को मजबूती से आगे बढ़ाता है तो यह दुनिया के लिए एक उदाहरण होगा। भारत सफल तभी होगा, जब वह धार्मिक आधार पर बंटेगा नहीं।' ओबामा ने कहा कि हर व्यक्ति को किसी भी तरह के डर के बिना अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है और हमें समाज को बांटने वाले तत्वों से सावधान रहना होगा।

'कुक का पोता हूं, प्रेजिडेंट बना'
ओबामा ने कहा कि मेरे दादा ब्रिटिश आर्मी में कुक थे और जब मेरा जन्म हुआ था तो मेरे जैसे लोगों को वोट देने का अधिकार भी नहीं था। उन्होंने कहा, 'हम ऐसे देशों में रहते हैं जहां पर कुक का पोता प्रेजिडेंट बन सकता है औप चाय बेचने वाले का बेटा प्रधानमंत्री।' ओबामा ने कहा कि वह हर क्षेत्र में दोनों देशों को करीब देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा, 'मैं चाहूंगा कि अमेरिका आने वाले छात्रों की संख्या के मुकाबले भारत आने वाले अमेरिकी छात्रों की संख्या बढ़े।'

'बेटियों को उनका हक देना होगा'
अमेरिकी राष्ट्रपति ने महिला सशक्तिकरण पर भी बात की। उन्होंने कहा कि हम अमेरिका में महिलाओं को समान अवसर देने की दिशा में लगातार कोशिशें कर रहे हैं। अपनी बेटियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, 'मेरी भी दो बेटियां हैं। हमें अपनी बेटियों सशक्त करना होगा। यह उनका अधिकार है और इसके लिए हमें ही पहल करनी होगी।' ओबामा ने कहा कि सफल महिलाएं ही सफल राष्ट्र का निर्माण करती हैं। ओबामा ने उन्हें दिए गए गार्ड ऑफ ऑनर का नेतृत्व करने वाली लेडी ऑफिसर विंग कमांडर पूजा ठाकुर का जिक्र करते हुए कहा कि यह गर्व और मजबूती की बात है।

'परमाणु हथियारों का खात्मा हो'
ओबामा ने कहा कि हमारा लक्ष्य ऐसी दुनिया बनाने का होना चाहिए जहां पर ऐटॉमिक हथियारों की कोई जगह न हो। उन्होंने कहा कि हम दुनिया में शांति चाहते हैं, लेकिन यह शांति इंसान के अंदर ही बसती है। ओबामा ने कैलाश सत्यार्थी, मिल्खा सिंह, मैरी कॉम वह कुछ अन्य लोगों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत को इन लोगों पर गर्व है और ऐसे लोगों की यहां पर कोई कमी नहीं है।

'हम परफेक्ट देश नहीं हैं'
आखिर में ओबामा ने कहा, 'भारतीय भाई-बहनो! हम परफेक्ट देश नहीं हैं। हमारे सामने कई चुनौतियां हैं। हममें कई समानताएं हैं। हम कल्पनाशील और जुझारू हैं। हम सब एक ही बगिया के खूबसूरत फूल हैं। अमेरिका को भारत पर भरोसा है। हम आपके सपने साकार करने में आपके साथ हैं। आपका पार्टनर होने का हमें गर्व है। जय हिंद।'

भाषण खत्म होने के बाद एक बार फिर ऑडिटोरियम तालियों से गूंज उठा। इसके बाद ओबामा मंच से उतरे और वहां मौजूद लोगों से खुलकर मिले। उन्होंने लोगों से हाथ मिलाए और फोटो भी खिंचवाए।

साभार: नव भारत टाइम्स 

 

National

 


नई दिल्ली : जमा देने वाली हवाएं, धुंध और बारिश... उत्तर भारत में अब तक यह सिलसिला जारी है। शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचे इलाकों में ताजा बर्फबारी हुई, जिससे ठंड में इजाफा हुआ है। पिछले 24 घंटों मे पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में भी बारिश हुई है।

राजस्थान में भी हल्की बारिश हुई, जिससे कुछ इलाकों में कोहरे की वजह से ट्रैफिक पर असर पड़ा। धुंध की वजह से शुक्रवार को देश भर में 79 ट्रेनें रद्द हुई हैं, जबकि कई तय वक्त से काफी पीछे चल रही हैं

रद्द हुई ट्रेनों की लिस्ट:



साभार: नव भारत टाइम्स

 

 

 

 

National

More Articles...

Page 495 of 553

495

Who's Online

We have 2261 guests online
 

Visits Counter

783354 since 1st march 2012