Saturday, November 25, 2017
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26 जनवरी 1950 को भारत गणतंत्र हुआ था। तब से लेकर 2014 तक एक लंबा सफर तय किया है गणतंत्र भारत ने। सफर की शुरूआत में सभी भारतवासी दिल में देश भकित की भावना लेकर गणतंत्र दिवस मनाते थे। समय के साथ साथ देश भकित की भावना कहीं  खो गर्इ।

आज 2014 में 26 जनवरी केवल एक छुटटी का दिन बनकर रह गया है। आफिस या स्कूल कालेज में ध्वजारोहण के समय उपसिथत रहना तो एक रस्म बन गया है।

नये साल का कैलेंडर आते ही सबसे पहले देखा जाता है कि 26 जनवरी किस दिन पड़ी है। अगर रविवार पड़ जाता है तो हम सब दुखी हो जाते हैं कि एक छुटटी का दिन गया। सच्चे दिल से सोचिए पहली बार इस साल का कैलेंडर देखकर यह भावना मन में आर्इ थी या नहीं। 26 जनवरी को आजकल पिकनिक डे के रूप में मनाया जाता है अर्थात इस दिन तो पिकनिक पर जाना तय। टीवी पर राजपथ, दिल्ली से लार्इव गणतंत्र दिवस परेड

 का प्रसारण होता है लेकिन कितने लोग देखते हैं। परेड देखने के लिए घर पर रूकेंगे तो सैर सपाटा , पिकनिक के लिए समय कम नहीं हो जाएगा। घर के बड़ों के साथ साथ बच्चे भी यही सीखते हैं।

क्या यह ठीक है ? बच्चों को तो यह जानना चाहिए कि गणतंत्र दिवस क्यों मनाया जाता है। स्कूल की किताबों में तो वह इस विषय में पढ़ते हैं पर वह किताबों तक ही सीमित रहता है, दिल में नहीं उतरता। आगे चलकर 26 जनवरी का मतलब उनके लिए कुछ और ही हो जाता है। उनके माता पिता को ही जब याद न रहे कि गणतंत्र दिवस क्यों मनाया जाता है तो  बच्चों का क्या दोष।

भारत में गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को मनाया जाता है। 26 जनवरी 1950 को  भारत का संविधान लागू हुआ था। इससे पहले गवर्नमेंट आफ इंडिया एक्ट (1935) लागू था। संविधान ने इसकी जगह ले ली। भारत के संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को ही संविधान पास कर दिया था परंतु इसे लोकतांति्रक सरकारी तंत्र के साथ 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया। इसके साथ ही भारत एक स्वतंत्र गणतांति्रक देश बन गया। 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस कहलाने का गौरव मिला क्योंकि 1930 मे इसी दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने  पूर्ण स्वराज की घोषणा की थी।

भारत की आम जनता को यह दोष देने का कोर्इ फायदा नहीं  है।जब दिल्ली के मुख्य मंत्री आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल गणतंत्र दिवस परेड को मनोरंजन से जोड़ते हैं। हाल ही में उन्होने गणतंत्र दिवस परेड के बारे में कहा कि राजपथ पर कुछ लोग आराम से बैठकर झांकियां देखकर मनोरंजन करते हैं। वह परेड जिसकी शुरूआत राष्ट्रपति के ध्वजारोहण से होती है इसके पश्चात देश के अस्त्र शस्त्र दिखाए जाते हैं जो हमारे देश का गौरव एवं शकित है। इसके बाद परेड प्रारंभ होता है जिसमें सेना के तीनों अंग भी शामिल होते हैं। अलग अलग प्रांतों की विशेषता दर्शाती झांकियां और सांस्कृतिक झलकियां होती हैं। इस कार्यक्रम में हर साल मुख्य अतिथि विदेश की कोर्इ विशेष राजनीतिक हस्ती होते हैं। यह कार्यक्रम देशभकित के रंग में रंगा होता है। लेकिन देखने का अपना अपना नजरिया है। चिंता का विषय तो तब बन जाता है जब किसी मुख्य मंत्री को इस कार्यक्रम में सिर्फ मनोरंजन नजर आता है। दिल्ली में 25 जनवरी 2014 को गणतंत्र दिवस समारोह में केजरीवाल ने ध्वजारोहण के पश्चात भाषण के दौरान मीडिया , पुलिस और भ्रष्ट अफसरों पर प्रहार करते दिखे। एक बार भी उनको याद नहीं किया जिनकी वजह से भारत गणतंत्र हुआ। उनके भाषण में अपनी पार्टी का एजेंडा भी था लेकिन देशभकित का नामों निशान नहीं था। केजरीवाल सोचते हैं कि धरना देना , संविधान को न मानना , मुख्य मंत्री पद की गरिमा के साथ खिलवाड़ करना ही देशभकित है।

26 जनवरी नैशनल हालीडे है। खुशी जरूर मनाएं। सैर सपाटा , पिकनिक भी करें परंतु नेशन को भूल मत जाएं।

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